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राहुल-मोदी की मुलाकात से विपक्ष में टूट, 4 पार्टियों ने किया राष्ट्रपति मार्च का बहिष्कार
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 16 Dec 2016 04:04 PM IST
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- फोटो : Social Media
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात ने एकजुट विपक्ष के बीच फूट डाल दी है। शुक्रवार को राहुल गांधी किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद गैरकांग्रेसी चार पार्टियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।
उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल शीत सत्र के आखिरी दिन संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले पीएम मोदी से मिलने पहुंचा। मुलाकात में नोटबंदी के चलते किसानों को हो रही समस्या और कई अन्य मांगों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने खाद्यान्न के समर्थन मूल्य बढ़ाने की भी मांग की।
प्रधानमंत्री से मिलने राहुल के साथ लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैप्टन अमरिंदर सिंह और आनंद शर्मा थे।
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दूसरी विपक्षी पार्टियों जैसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, डीएमके और लेफ्ट पार्टियों ने प्रधानमंत्री के साथ कांग्रेस नेताओं की मुलाकात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। इन विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।
इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टियां अपनी सुविधा अनुसार आगे बढ़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक गुलाम नबी आजाद और सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने विपक्षी नेताओं को मनाने की हरसंभव कोशिश की। हालांकि इन पार्टियों के नेता नहीं माने। इसके बाद कांग्रेस नेता कई विपक्षी पार्टियों के बिना ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने चले गए।
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उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल शीत सत्र के आखिरी दिन संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले पीएम मोदी से मिलने पहुंचा। मुलाकात में नोटबंदी के चलते किसानों को हो रही समस्या और कई अन्य मांगों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने खाद्यान्न के समर्थन मूल्य बढ़ाने की भी मांग की।
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प्रधानमंत्री से मिलने राहुल के साथ लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैप्टन अमरिंदर सिंह और आनंद शर्मा थे।
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दूसरी विपक्षी पार्टियों जैसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, डीएमके और लेफ्ट पार्टियों ने प्रधानमंत्री के साथ कांग्रेस नेताओं की मुलाकात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। इन विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।
इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टियां अपनी सुविधा अनुसार आगे बढ़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक गुलाम नबी आजाद और सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने विपक्षी नेताओं को मनाने की हरसंभव कोशिश की। हालांकि इन पार्टियों के नेता नहीं माने। इसके बाद कांग्रेस नेता कई विपक्षी पार्टियों के बिना ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने चले गए।
संसद में गतिरोध पर राष्ट्रपति क्या करेंगे?
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'हमने राष्ट्रपति को बताया कि विपक्ष नोटबंदी, किसानों की समस्या और छोटे व्यापारियों पर संसद में बहस चाहता था।'
खड़गे ने कहा कि सरकार संसद को सुचारू रूप से चलाने में असफल साबित हुई है।
संसद में जारी गतिरोध के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि इस तरीके का माहौल मैंने कभी नहीं देखा। यह लोगों के पैसे की बर्बादी है, आम जनता खुश नहीं है। संसद सत्र पर उपराष्ट्रपति के बयान से सहमति जताते हुए देवगौड़ा ने कहा, 'मैं उनसे सौ प्रतिशत सहमत हूं। सदस्यों को अपने बारे में पुर्नविचार करना चाहिए।'
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ राष्ट्रपति के पास न जाने के सवाल पर सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने कहा, 'हमने पहले ही कहा था कि इसमें राष्ट्रपति क्या करेंगे। हमारा मानना था कि जनता के पास जाएं।'
दिलचस्प है कि शीत सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट था, लेकिन सत्र के आखिरी दिन मोदी और राहुल की मुलाकात ने इस एकजुटता में फूट डाल दी है।
खड़गे ने कहा कि सरकार संसद को सुचारू रूप से चलाने में असफल साबित हुई है।
संसद में जारी गतिरोध के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि इस तरीके का माहौल मैंने कभी नहीं देखा। यह लोगों के पैसे की बर्बादी है, आम जनता खुश नहीं है। संसद सत्र पर उपराष्ट्रपति के बयान से सहमति जताते हुए देवगौड़ा ने कहा, 'मैं उनसे सौ प्रतिशत सहमत हूं। सदस्यों को अपने बारे में पुर्नविचार करना चाहिए।'
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ राष्ट्रपति के पास न जाने के सवाल पर सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी ने कहा, 'हमने पहले ही कहा था कि इसमें राष्ट्रपति क्या करेंगे। हमारा मानना था कि जनता के पास जाएं।'
दिलचस्प है कि शीत सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट था, लेकिन सत्र के आखिरी दिन मोदी और राहुल की मुलाकात ने इस एकजुटता में फूट डाल दी है।