अब चीन मामले पर सियासत: कांग्रेस ने जारी की सैटेलाइट तस्वीरें, राहुल बोले- सरकार को अब चीनी कब्जे की सच्चाई भी मान लेनी चाहिए
पीएम मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों के वापस लेने की घोषणा के बाद राहुल गांधी ने चीन के साथ एलएसी पर मौजूदा स्थिति को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
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कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में कथित चीनी घुसपैठ को लेकर रविवार को भाजपा सरकार पर धोखे में रखने और जानबूझकर मामले को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। साथ ही इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सैटेलाइट तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा में छह-सात किलोमीटर के अंदर एक और गांव बसा दिया है, जिसमें 60 से अधिक ढांचों का निर्माण किया गया है। विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पूरे देश को राष्ट्रीय सुरक्षा पर पाठ पढ़ाती है जबकि वह भारत की अखंडता एवं सम्प्रभुता को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दों के समाधान में नाकाम रही है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के एक दिन बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को चीन मामले पर सरकार को निशाने पर लिया। राहुल ने कहा कि सरकार को अब चीनी कब्जे की सच्चाई को भी अब स्वीकार कर लेना चाहिए। मोदी सरकार द्वारा पिछले साल बनाए गए तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और आंदोलनकारी किसानों व विपक्षी दलों की मांग पर सहमति जताते हुए राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट किया- चीनी कब्जे की सच्चाई को भी अब स्वीकार किया जाना चाहिए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने चीन के साथ एलएसी पर मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार से सवाल करते रहे हैं।
सिंघवी ने यह भी दावा किया कि कुछ दिन पहले ही चीन के राष्ट्रपति ने इस जगह के उत्तर में कुछ किलोमीटर की दूरी की यात्रा की थी। कांग्रेस नेता ने मांग
उठायी कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे का समाधान करें और वह इस संबंध में उठाए जा रहे कदमों के बारे में देश को अवगत कराएं।
भारत-चीन बातचीत पर सहमत
भारत और चीन गुरुवार को पूर्वी लद्दाख में एलएसी से लगते संघर्ष वाले स्थानों पर सहमति बनाने के लिए जल्द से जल्द 14वें दौर की सैन्य वार्ता करने पर सहमत हुए। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध पिछले साल 5 मई को पैंगोंग झील क्षेत्रों में एक हिंसक झड़प के बाद भड़क गया था। इसके बाद दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों से अपनी तैनाती बढ़ा दी थी।
पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में एक घातक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों ने फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और अगस्त में गोगरा क्षेत्र में सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। अभी एलएसी पर दोनों देशों के लगभग 50 से 60 हजार सैनिक हैं।