टीपू सुल्तान को राहुल गांधी ने बताया सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक
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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। टीपू सुल्तान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि मुस्लिम नेता सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक हैं। विधानसभा चुनाव से पहले राज्यव्यापी मंदिर यात्रा के दौरान राहुल ने श्रृंगेरी शरदम्बा पीठा का दौरा किया। हिंदू मठ के साथ टीपू के जुड़ाव को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में गांधी ने कहा कि वह उनके काम से प्रभावित हैं कि उन्होंने संकट की घड़ी में मंदिर की मदद की थी। राहुल मंदिर के पारंपरिक कपड़ों में दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर दर्शन के दौरान राहुल के साथ केपीसीसी के प्रवक्ता के दिवाकर और मठ के अधिकारी मौजूद थे।
दिवाकर ने बताया कि राहुल ने मठ के साथ टीपू के जुड़ाव को लेकर सवाल पूछा। जिसके जवाब में मैंने उन्हें मठाधीश को लिखे गए टीपू के पत्र और उनके द्वारा दिए गए दान के बारे में बताया। राहुल इस ऐतिहासिक घटना से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने कर्नाटक को सांप्रदायिक सद्भावना का उदाहरण बनने की वजह से प्रशंसा की। राहुल का टीपू को सेक्युलर बताना कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग को शुरू कर सकता है। अतीत में भाजपा ने सुल्तान को सांप्रदायिक करार देते हुए उनके जयंती समारोह का विरोध किया था। अपनी मंदिर यात्रा के दौरान राहुल ने मठ के अंदर पत्रकारों से बातचीत नहीं की लेकिन सुरक्षा का घेरा तोड़कर स्थानीय लोगों से गुफ्तुगू की।
राहुल ने किसानों के लिए काम किया था। मैं उनकी तरह हूं। राहुल ने सद्विद्या संजीवनी संस्कृत महापाठशाला के छात्रों से बातचीत की और प्राचीन भाषा का प्रचार-प्रसार करने का वादा किया। एक छात्र ने कहा- राहुल ने हमें आश्वासन दिया है कि वह राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से संस्कृत और मनुस्मृतियों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद करेंगे। उन्होंने हमसे विशेष पैकेज देने का वादा किया है।