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कैंसर के बावजूद हासिल किए 95.8 प्रतिशत अंक!
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Sun, 15 May 2016 03:04 PM IST
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मेरा नाम है राघव चंदक और मैंने कैंसर होने के बावजूद आईसीएसई के दसवीं कक्षा की परीक्षा में 95.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। मैं कोलकाता के हैरिटेज स्कूल में पढ़ता हूं और स्कूल ने मेरी बड़ी मदद की। जब मुझे पता चला कि मुझे कैंसर की बीमारी है, तो मैं डर गया था, पर फिर मेरे चाचा ने मुझे समझाया तब जाकर मैं थोड़ा सही हुआ। मैंने अपने बेस्ट फ्रैंड को भी शुरु में नहीं बताया था, पर जब मैंने उसे बताया तो वो यकीन ही नहीं कर पाया, लेकिन बाद में उसने मुझे हिम्मत ना हारने के लिए कहा।
मैं अस्पताल में अपने साथ किताबें ले जाता था और चार से पांच घंटे पढ़ाई करता था। मैं पूरे साल में बस एक-दो महीने ही स्कूल जा पाया और बाकी की पढ़ाई घर पर की। मेरी प्रिंसिपल, मेरी क्लास टीचर, सबने मेरी बड़ी मदद की। मुझे स्कूल ने सभी टीचर के नंबर भी दे दिए थे, जिससे मैं उन्हें कोई परेशानी होने पर फोन कर सकूं।
स्कूल में मैं मास्क पहन कर और अपनी गाड़ी से जाता था। क्लास में मेरा टेबल अलग था और मैं बाकी बच्चों से दूर बैठा करता था, ताकि इंफेक्शन न फैले।मुझे शुरु में अजीब लगता था कि अकेला मैं ही मास्क लगा कर घूमता रहता था।फिर मेरे बाल झड़ने शुरु हो गए तो मैंने टोपी पहननी शुरु कर दी, लेकिन किसी ने मुझे बुरा भला नहीं कहा और सबने मेरी हालत को समझा।
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क्रिकेटर युवराज सिंह मेरे प्रेरणा स्रोत हैं। जिस तरह से उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को हराया और क्रिकेट के खेल में वापसी की, उसने मुझे काफी हौसला दिया।अगर हौसला रखा जाए और हिम्मत जुटा कर इस बीमारी से लड़ा जाए, तो जीत आपकी ही होगी और आप आगे की जिंदगी आसानी से जी सकते हैं।राघव आगे जाकर आईआएटी से इंजीनियर बनना चाहते हैं।
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मैं अस्पताल में अपने साथ किताबें ले जाता था और चार से पांच घंटे पढ़ाई करता था। मैं पूरे साल में बस एक-दो महीने ही स्कूल जा पाया और बाकी की पढ़ाई घर पर की। मेरी प्रिंसिपल, मेरी क्लास टीचर, सबने मेरी बड़ी मदद की। मुझे स्कूल ने सभी टीचर के नंबर भी दे दिए थे, जिससे मैं उन्हें कोई परेशानी होने पर फोन कर सकूं।
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स्कूल में मैं मास्क पहन कर और अपनी गाड़ी से जाता था। क्लास में मेरा टेबल अलग था और मैं बाकी बच्चों से दूर बैठा करता था, ताकि इंफेक्शन न फैले।मुझे शुरु में अजीब लगता था कि अकेला मैं ही मास्क लगा कर घूमता रहता था।फिर मेरे बाल झड़ने शुरु हो गए तो मैंने टोपी पहननी शुरु कर दी, लेकिन किसी ने मुझे बुरा भला नहीं कहा और सबने मेरी हालत को समझा।
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क्रिकेटर युवराज सिंह मेरे प्रेरणा स्रोत हैं। जिस तरह से उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को हराया और क्रिकेट के खेल में वापसी की, उसने मुझे काफी हौसला दिया।अगर हौसला रखा जाए और हिम्मत जुटा कर इस बीमारी से लड़ा जाए, तो जीत आपकी ही होगी और आप आगे की जिंदगी आसानी से जी सकते हैं।राघव आगे जाकर आईआएटी से इंजीनियर बनना चाहते हैं।