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क्या सचिन तेंदुलकर इसे ‘खेल भावना’ से ही लेंगे?

Thu, 21 Dec 2017 07:08 PM IST
amarujala.com, presented by: अतुल सिन्हा
amarujala.com, presented by: अतुल सिन्हा Updated Thu, 21 Dec 2017 07:08 PM IST
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question arises that will sachin tendulkar take it as sportsman spirit
सचिन - फोटो : SELF
क्या आपने सचिन तेंदुलकर को राज्यसभा में बोलने की कोशिश करते देखा? क्या आपने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को उन्हें बोलने देने की अपील करते हुए सुना? मैदान में हर कोने पर धुआंधार शॉट लगाने वाले महानतम क्रिकेटर और भारत रत्न सांसद सचिन आखिर पहली बार में ही अपनी ही पार्टी से ‘क्लीन बोल्ड’ क्यों हो गए। देर तक खड़े रहकर सचिन बार बार कुछ बोलने की नाकाम कोशिश करते रहे और कांग्रेस के हंगामे के बीच एक शब्द भी न बोल पाने की उनकी बेबसी एक कॉमेडी बन कर रह गई।
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पांच साल से सचिन सांसद हैं, लेकिन बोलने की कोशिश करते उन्हें पहली बार देखा गया। पर आज उन्हें ये समझ में आ गया कि खेल के मैदान में हजारों दर्शकों के शोर के बीच दनादन शॉट लगाने से ज्यादा मुश्किल है सांसदों के शोर शराबे और हंगामे के बीच एक शब्द भी बोल पाना। भले ही आप भारत रत्न हों या फिर उसी पार्टी के मनोनीत सांसद, लेकिन जब मुद्दा 2 जी में बेदाग साबित हुई आपकी ही पार्टी का हो जिसे इसी मामले पर सत्ता गंवानी पड़ी हो, तो उस वक्त खिलाड़ियों से बड़ा राजनीतिक विश्वसनीयता बचाने का ‘खेल’ ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
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ये भी पढ़ें: राज्यसभा में अपनी 'डेब्यू' स्पीच पर हंगामे से बोल्ड हुए सचिन तेंदुलकर
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सचिन पर ये आरोप लगते रहे हैं कि पांच साल में वो सबसे कम उपस्थित रहे हैं। अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक सचिन 348 दिनों में सिर्फ 23 दिन ही राज्यसभा आए जबकि बतौर सांसद उनपर करीब 60 लाख रूपए खर्च हो चुके हैं। राज्य सभा सदस्य होने के नाते सचिन को हर महीने 50 हजार रुपये वेतन मिलता है। साथ ही 45 हजार रुपये संसदीय क्षेत्र में खर्च करने और 15 हजार दफ्तर खर्च, यात्रा और दैनिक भत्ते के तौर पर मिलते हैं।


सचिन को न बोलने दिए जाने पर सांसद जया बच्चन की नाराज़गी हो या सत्ताधारी पार्टियों की दलीलें, लेकिन कांग्रेस के लिए आज सबसे अहम दिन होने के नाते खिलाड़ियों को लेकर दिए जाने वाले सचिन के सुझाव के लिए वक्त सही नहीं था, ऐसा जयंती नटराजन ने साफ कहा। बेशक इस मामले पर बात फिर कभी हो जाएगी और पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीजीएचएस यानी स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने को लेकर सचिन की मांग को सीधे प्रधानमंत्री और मंत्रालय के स्तर पर मान लिया जाए, लेकिन फिलहाल संसद में सचिन आज एक मज़ाक बन कर रह गए। जाहिर है फिल्मकारों, संगीतकारों या खिलाड़ियों के लिए संसद के खेल को खेल भावना से लेना ही बेहतर होगा।
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