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CAA : केरल के राज्यपाल को इतिहासकार ने बोलने से रोका, कहा- कलाम नहीं, गोडसे का हवाला दें

Sat, 28 Dec 2019 02:25 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 28 Dec 2019 02:25 PM IST
सार

  • केरल: कन्नूर विश्वविद्यालय में राज्यपाल का विरोध
  • भारतीय इतिहास कांग्रेस के कार्यक्रम में मंच पर हंगामा
  • आजाद का जिक्र करने पर शुरू हुआ बवाल
  • इरफान हबीब ने कहा, कलाम नहीं, गोडसे का हवाला दें
  • राज्यपाल बोले- आप मुझे चुप नहीं करा सकते

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protest against Governor Arif Mohammed Khan at inauguration of 80th Indian History Congress
आरिफ मोहम्मद खान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

भारतीय इतिहास कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की मौजूदगी में अप्रिय स्थिति बन गई। न केवल उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा, बल्कि इतिहासकार इरफान हबीब ने मंच पर चढ़कर उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास किया।

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हबीब ने कहा कि राज्यपाल को मौलाना अब्दुल कलाम नहीं बल्कि नाथूराम गोडसे का हवाला देना चाहिए। इस पर राज्यपाल ने कहा कि प्रदर्शन का हक सभी को है, लेकिन उनका बोलने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बाद में राज्यपाल खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
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हंगामा केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय में हुआ, जहां राज्यपाल 80वीं इतिहास कांग्रेस का शुभारंभ करने मुख्य अतिथि के तौर पर गए थे। राज्यपाल ने पहले बोल चुके माकपा के राज्यसभा सदस्य केके रागेश और इतिहासकार इरफान हबीब का संदर्भ देते हुए नागरिकता कानून पर बोलना शुरू किया।
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इस पर सामने बैठे कुछ प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई। इस पर राज्यपाल ने कहा, जब आप चर्चा और बहस का दरवाजा बंद करते हैं, तो हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने ‘सीएए का बहिष्कार’ लिखे बैनर दिखाए। कुछ लोगों ने ‘केरल गवर्नर शेम शेम’ के नारे भी लगाए।

भाषण देने से रोकना अलोकतांत्रिक है
केरल राजभवन की ओर से बयान के मुताबिक इरफान हबीब ने सीएए को लेकर कुछ बिंदु उठाए थे। राज्यपाल ने उस पर बोलना शुरू किया तो हबीब खडे़ हो गए और मंच पर ही उन्हें पकड़कर रोकने का प्रयास किया।

उन्हाेंने मौलाना अब्दुल कलाम के उल्लेख पर आपत्ति जताई और चिल्लाए कि गोडसे का उल्लेख करें। उन्हाेंने राज्यपाल के सुरक्षा अधिकारी को धक्का दिया। अपने से अलग मत रखने वाले के प्रति असहिष्णुता की वजह से मंच पर भाषण देने से रोकना अलोकतांत्रिक है।

काले झंडे दिखाने पर छात्र पुलिस हिरासत में
इससे पूर्व राज्यपाल के कार्यक्रम में पहुंचने पर कुछ छात्रों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। पुलिस ने केरल कांग्रेस छात्र संघ व यूथ कांग्रेस के 12 और मुस्लिम स्टूडेंट्स फ्रंट के पांच छात्रों को हिरासत में लिया। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे धक्का-मुक्की की। वहीं, भारतीय इतिहास कांग्रेस के सचिव ने कहा कि कुछ छात्र बैनर लिए खड़े थे, जिन्हें पुलिस ने वहां से जबरन खदेड़ दिया।

आजाद का जिक्र करने पर शुरू हुआ बवाल

घटना का एक छोटा वीडियो सामने आया है। इसमें राज्यपाल ने विभाजन के बाद के हालात का जिक्र करते हुए कहा, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ने कहा था कि विभाजन गंदगी बहा ले गया, कुछ गड्ढे हैं, जिनमें गंदा पानी बच गया और उसमें से बदबू आ रही है।

राज्यपाल ने नारेबाजी और विरोध कर रहे लोगों की ओर मुखातिब होकर कहा, मौलाना आजाद ने आप लोगों के लिए ही यह कहा था। मौलाना आजाद आपकी जायदाद नहीं, हमारी हैं। मैंने आपको चुपचाप सुना तो आपको भी सुनना चाहिए। आप सुनेेंगे नहीं, धमकियां देंगे यहां?

मुझे जवाब देने का अधिकार है? इस बीच, राज्यपाल के भाषण के बीच बड़ी संख्या में प्रतिनिधि खड़े होकर विरोध करने लगे। इरफान हबीब राज्यपाल को रोकने माइक के पास पहुंचने की कोशिश करते दिखे। कुछ देर व्यवधान के बाद राज्यपाल ने कहा, अगर जवाहरलाल नेहरू को कोट करना बदतमीजी है तो मैं बदतमीजी कर रहा हूं।

क्या आप लोग तय करेंगे कि मैं किसे कोट करूं? आप कह रहे हैं कि मैं गोडसे को कोट करूं। आपके लिए वो तमीज है? राज्यपाल ने पूछा, जामिया में प्रो. मुशीरुल हसन पर हमला करने वाले लोग कौन थे, उनके बारे में पता किया जाना चाहिए।

सरकार प्रायोजित प्रदर्शन : भाजपा
यह पूरा प्रदर्शन और घटनाक्रम केरल सरकार द्वारा प्रायोजित था। यह राज्यपाल का अपमान है। इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। - एमटी रमेश, महासचिव, भाजपा, केरल

यह गुंडागर्दी है : संतोष
यह कॉमरेडों का निंदनीय कार्य है। इरफान हबीब को कानून के तहत सजा दी जानी चाहिए। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, शुद्ध गुंडागर्दी है। - बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव संगठन, भाजपा
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