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सुप्रीम कोर्ट : केंद्र ने कहा- मानव जीवन की रक्षा पर्यावरण से ज्यादा अहम

Fri, 23 Apr 2021 07:44 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 23 Apr 2021 07:44 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल की दलील, वेदांता की याचिका पर सुनवाई आज
  • साल्वे बोले, लोग रोज मर रहे हैं, मंजूरी मिले तो छह दिन में उत्पादन शुरू हो जाएगा

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Protecting human life is more important than environment, says central government
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि मानव जीवन की रक्षा और पर्यावरण की रक्षा में से किसी एक को चुनना हो तो फिलहाल हमें मानव जीवन की रक्षा पर गौर करना चाहिए।

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दरअसल, शीर्ष अदालत वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें उसने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट कॉपर संयंत्र को फिर से शुरू करने की इजाजत मांगी है।
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वेदांता ने कहा है कि इस संयंत्र को स्वास्थ्य के मकसद से खोलने की इजाजत देने से हजारों टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकेगा। यही नहीं हम यह ऑक्सीजन कोविड-19 मरीजों को मुफ्त में देंगे। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष वेदांता और केंद्र ने संयुक्त रूप से संयंत्र को खोलने का अनुरोध किया।
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वेदांता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, वेदांता तांबे को गलाने काम शुरू करने की बात नहीं कर रहा है, बल्कि अपने ऑक्सीजन संयंत्र को क्रियाशील बनाने के लिए अनुरोध कर रहा है, ताकि उसे चिकित्सा उद्देश्यों के लिए हजारों टन ऑक्सीजन उपलब्ध कर सके।

साल्वे ने कहा, लोग रोज मर रहे हैं। हम केवल ऑक्सीजन संयंत्र शुरू करने की अनुमति चाहते हैं। इतना ही नहीं हम इसे मुफ्त में आपूर्ति करेंगे। अगर आज हमें अनुमति मिल जाए तो हम पांच-छह दिनों में इसका उत्पादन शुरू कर सकते हैं।

मेहता बोले, सरकार हरसंभव स्रोतों से बढ़ा रही ऑक्सीजन की आपूर्ति
तुषार मेहता ने कहा कि देश को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है और केंद्र सरकार सभी संभावित स्रोतों से अपनी आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मेहता ने कहा, वेदांता अपने संयंत्र को केवल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए संचालित करना चाहती है और इसे केवल चिकित्सा उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। जितना जल्द यह संयंत्र शुरू होगा उतना ही यह देश के लिए बेहतर होगा।

तमिलनाडु सरकार से कहा, आपके रवैये से हम खुश नहीं
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील सीएस वैद्यनाथन ने वेदांता की इस अर्जी का विरोध किया। तमिलनाडु के इस रवैये पर पीठ ने आपत्ति जताई। चीफ जस्टिस ने कहा यह कैसा रवैया है?

आप इसका निर्माण नहीं कर रहे हैं और आप इसे अपनी चिकित्सा आपात स्थितियों के लिए मुफ्त में प्राप्त कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी पर्यावरण मानदंडों का पालन हो। लेकिन हम आपके रवैये की कतई खुश नहीं हैं। यह एक राष्ट्रीय आपातकाल है।

2018 से बंद पड़ा है संयंत्र
गौरतलब है कि 22 मई 2018 में स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शन में 13 नागरिकों की मौत होने के बाद तमिलनाडु सरकार द्वारा संयंत्र को बंद कर दिया गया था। वर्ष 2020 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस संयंत्र को खोलने की इजाजत देने की मांग वाली वेदांता की याचिका को खारिज कर दिया था।


हाईकोर्ट ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं सहित अन्य चूक का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट भी पूर्व में ट्रायल रन के तौर पर इस संयंत्र को शुरू करने की अनुमति देने से इनकार कर चुका है। 

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