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Promotion: एक UPSC बैच, लेकिन प्रमोशन में पिछड़े, कुछ CISF में वरिष्ठ कमांडेंट तो कुछ CRPF में AC ही बन पाए

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 19 Feb 2024 06:32 PM IST
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सार
कई बलों में इस बैच के अधिकारी अब कमांडेंट या टू-आईसी बन चुके हैं, डिप्टी कमांडेंट का भी रैंक भी मिला है, जिन्हें सीआरपीएफ कैडर अलॉट हुआ, वे अधिकांश अफसर 'सहायक कमांडेंट' से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इस बाबत पिछले साल, दिल्ली हाई कोर्ट में एक मामला सामने आया था...
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Promotion: UPSC batch is same, but CRPF, BSF officers lagged behind in getting promotion
Promotion: CAPF - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में सीधी भर्ती के माध्यम से आए सहायक कमांडेंट (डीएजीओ), पदोन्नति और वेतनमान, दोनों क्षेत्रों में पिछड़ गए हैं। बीएसएफ में भी सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट बनने में 13 से 15 वर्ष लग रहे हैं। खास बात है कि यूपीएससी द्वारा भर्ती, सीएपीएफ के ये अधिकारी एक ही बैच के हैं, मगर पदोन्नति के मामले में उनके बीच काफी दूरी हो चुकी है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआईएसएफ के करीब दो दर्जन कमांडेंट को वरिष्ठ कमांडेंट पद (वेतन मैट्रिक्स स्तर-13, 123100-215900) के गैर-कार्यात्मक चयन श्रेणी (एनएफएसजी) के लाभांश प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की है। ये अधिकारी 2010 बैच के हैं। दूसरी तरफ सीआरपीएफ में 2009-2010 का डीएजीओ बैच अभी तक सहायक कमांडेंट के पद पर ही अटका है। ऐसे में सहायक कमांडेंट, रैंक के अलावा प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये के लाभ से वंचित हैं।

डीजी के स्पीकिंग ऑर्डर से निराश हुए अधिकारी

कई बलों में इस बैच के अधिकारी अब कमांडेंट या टू-आईसी बन चुके हैं, डिप्टी कमांडेंट का भी रैंक भी मिला है, जिन्हें सीआरपीएफ कैडर अलॉट हुआ, वे अधिकांश अफसर 'सहायक कमांडेंट' से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इस बाबत पिछले साल, दिल्ली हाई कोर्ट में एक मामला सामने आया था। पदोन्नति में हो रही देरी को लेकर सहायक कमांडेंट प्रजीत सिंह, दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचे थे। इसके बाद सीआरपीएफ डीजी द्वारा एक स्पीकिंग ऑर्डर निकाला गया। उस आदेश में पदोन्नति में देरी का कोई हल नहीं निकल सका। ऐसे तर्क दिए गए कि दूसरे बलों में जितनी तेज पदोन्नति मिल रही है, वैसा सीआरपीएफ में संभव नहीं है। बल की 138वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट प्रजीत सिंह के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीआरपीएफ डीजी ने अक्तूबर 2023 के आखिरी सप्ताह में जो आदेश निकाला था, उसके चलते बल के याचिकाकर्ता 'सहायक कमांडेंट' निराश हो गए। प्रजीत सिंह व अन्य याचिकाकर्ता, यूपीएससी की 2009 की परीक्षा में शामिल हुए थे। अगले वर्ष उन्हें सीआरपीएफ के 43वें बैच 'डीएजीओ' के तहत सहायक कमांडेंट का पद मिला था।

कॉमन रिक्रूटमेंट रूल्स बनाने की मांग

इसी बैच के वे अधिकारी, जिन्हें सीआईएसएफ, एसएसबी या आईटीबीपी कैडर अलॉट हुआ था, अब डिप्टी कमांडेंट, टूआईसी व कमांडेंट बन गए हैं। सीआईएसएफ में तो वरिष्ठ कमांडेंट का वेतनमान मिल गया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसे में सीआरपीएफ के 'ग्रुप ए एग्जीक्यूटिव कैडर' को पदोन्नति देने के लिए पर्याप्त संख्या में पद सृजित किए जाएं। सीएपीएफ में 'ग्रुप ए एग्जीक्यूटिव कैडर' पद पर चयनित होने वाले सभी अधिकारियों के लिए कॉमन रिक्रूटमेंट रूल्स बनाए जाएं। कमांडेंट के पद तक उन्हें टाइम बाउंड पदोन्नति मिले। एक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी होने के बाद 'पे अपग्रेडेशन' हो। इस संबंध में सीआरपीएफ के तत्कालीन डीजी डॉ. एसएल थाउसेन ने जो आदेश निकाला था, उसमें कहा गया कि सभी बलों का अपना एक अलग रोल है। उन्हें कई तरह की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। हालांकि सभी बलों का समान महत्व और जिम्मेदारी रहती है। सभी अर्धसैनिक बल सजातीय नहीं हैं। उनका कैडर ढांचा भी यूनिक है। इन बलों को उनकी आपरेशनल क्षमता एवं कार्यात्मक क्षमता के मुताबिक ढाला गया है। ऐसे में विभिन्न बलों में पदोन्नति के नियम/अवसर भी अलग हैं। इसी हिसाब से इनके रिक्रूटमेंट रूल्स तैयार होते हैं। देश की सुरक्षा में सभी बलों का एक अलग रोल है। इन बलों में पदोन्नति या करियर को आगे जाने वाले अवसर भी अलग हैं।

मेडिकल अफसर को लेकर कही ये बात

पूर्व डीजी थाउसेन ने अपने आदेश में लिखा था, दूसरे बलों में या मेडिकल अफसरों को जल्द पदोन्नति, याचिकाकर्ता का यह तर्क टिकाऊ नहीं है। मेडिकल अफसरों की पदोन्नति, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अलग आदेश हैं। इनकी पदोन्नति की तुलना, रिक्तियां आधारित सामान्य ड्यूटी वाले अधिकारियों की पदोन्नति के साथ नहीं की जा सकतीं। सभी बलों के अधिकारी यूपीएससी की एक ही परीक्षा पास करते हैं, ऐसे में उनके भर्ती नियम कॉमन हों, ये तर्क भी एक गलतफहमी है। याचिकाकर्ता ने न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की अवधि पूरी होने के बाद डीओपीटी के 20 सितंबर 2022 के आदेश के मुताबिक वित्त अपग्रेडेशन देने की बात कही थी। इस मामले में याचिकाकर्ता को चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने के पश्चात सीनियर टाइम स्केल दिया जा चुका है। इस संबंध में गृह मंत्रालय के 2001 और 2002 के कार्यालय ज्ञापन को आधार बनाया गया है। वित्त अपग्रेडेशन, पदोन्नति और पे स्केल आदि में डीओपीटी के 2009 में जारी आदेश का पालन होता है। ऐसे में यह केस विचार करने के योग्य नहीं है और इस पर विचार करने का कोई मैरिट आधार भी नहीं बनता।

पदोन्नति में देरी, ये प्लानिंग का फेल्योर है

कन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी सीआरपीएफ एचआर सिंह ने कहा, सहायक कमांडेंट हों या सिपाही, इन्हें तय समय पर ही पदोन्नति मिलनी चाहिए। अगर रैंक मिलने में देरी हो रही है, तो उन्हें एनएफएसजी दिया जाए। एक समय था जब सीआरपीएफ में चार पांच वर्ष में डिप्टी कमांडेंट 'डीसी' बन जाते थे। अब पहली पदोन्नति के लिए सहायक कमांडेंट को 14 वर्ष या उससे ज्यादा समय लग रहा है। ये प्लानिंग का फेल्योर है। सरकार को इस तरह के मामलों में एक कमेटी बनानी चाहिए। अगर संबंधित अधिकारी की अच्छी सर्विस है, तो उसके करियर में बाधा नहीं पहुंचे। गृह मंत्रालय में जिस तरह से बॉर्डर मैनेजमेंट एक अलग विभाग है, वैसे ही इंटरनल सिक्योरिटी मैनेजमेंट विभाग बनाया जाए। वहां पर पहले से ही व्यस्तता ज्यादा रहती है, ऐसे में समय पर पदोन्नति तय हो, इसके लिए सीएपीएफ मिनिस्ट्री ऑफ इंटनरल सिक्योरिटी मैनेजमेंट की मदद ली जाए। इसकी कमान, आईएएस या आईपीएस की बजाए, सीएपीएफ के किसी वरिष्ठ कैडर अधिकारी को सौंपी जा सकती है। पदोन्नति के मामले में एडजस्ट किया जा सकता है। सभी की ट्रेनिंग को एक ही जैसी होती है। क्रेश कोर्स भी कराया जाता है। सिपाही की भर्ती को इंटरचेंज कर सकते हैं। वैकेंसी को कॉमन माना जा सकता है। किसी भी तरह से पदोन्नति या उसके समकक्ष वेतनमान मिलना चाहिए। अगर रैंक देना संभव नहीं है, तो कम से कम वेतन दे दें।

कोर्ट का फैसला सही तरीके से लागू नहीं

बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है, सीएपीएफ में सिपाही से लेकर कमांडेंट तक, पदोन्नति में बुरी तरह पिछड़ रहे हैं। अगर कोई त्वरित राहत प्रदान नहीं की गई तो अगले दो दशक तक पदोन्नति का अंतर कम नहीं हो सकता। सर्वोच्च न्यायालय तक मामला पहुंचने के बाद, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जुलाई 2019 को अपनी एक घोषणा के जरिए 'सीएपीएफ संगठित सेवा ए' को मंजूरी प्रदान कर दी थी। तब कैडर अफसरों में यह उम्मीद जगी थी कि उन्हें एनएफएफयू के परिणामी लाभ मिल जाएंगे, मगर उसे सही रूप में लागू नहीं किया गया। वह फैसला ठीक से लागू होता, तो आज सीएपीएफ के विभिन्न बलों में पदोन्नति और वेतनमान में अंतर को लेकर जो दिक्कतें सामने आ रही हैं, उनसे बचा जा सकता था। पद न सही, उतना वेतन तो मिलना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में सीआरपीएफ और बीएसएफ में डीएजीओ को पहली पदोन्नति में ही 15 साल लग रहे हैं। इन बलों में पदोन्नति बड़े विस्तार पर टिकी है। इन दोनों बड़े बलों में प्रयोग के तौर पर हर बटालियन में सात कंपनी बनाई गई थीं। बाद में वह आदेश स्थायी हो गया। इससे कमांडेंट स्तर पर 25 फीसदी काम बढ़ गया था। अब पुरानी छह कंपनी कर दी जाएं, तो पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे। बीएसएफ की बात करें तो इसके चलते 30 से ज्यादा बटालियन खड़ी होंगी। करीब 120 डीसी और 60 टूआईसी मिलेंगे। 30 कमांडेंट भी आएंगे। हालांकि सीएपीएफ में समान पदोन्नति व वेतनमान के लिए ठोस नीति क्रियान्वयन जरूरी है। यूपीएससी के एक ही बैच का एक अधिकारी सीनियर कमांडेंट और दूसरा सहायक कमांडेंट है तो ये फोर्स में आत्मविश्वास के लिए ठीक नहीं है। अगर रैंक नहीं तो उसके समान वेतन तो आवश्यक तौर से मिलना चाहिए।

दो दर्जन कमांडेंट को मिला वरिष्ठ कमांडेंट का वेतन

केंद्रीय गृह मंत्रालय में छह फरवरी को आयोजित हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में सीआईएसएफ के दो दर्जन कमांडेंट को वरिष्ठ कमांडेंट पद (वेतन मैट्रिक्स स्तर-13, 123100-215900) के गैर-कार्यात्मक चयन श्रेणी (एनएफएसजी) के लाभांश प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। कमांडेंट दिनेश कुमार पी. दहीवाडकर को एक जनवरी 2023 से, नीरज कुमार को एक जनवरी 2023 से, अंकित दुबे एक जनवरी 2023, कमलेश पूनिया एक जनवरी 2023, अनिल कुमार एक जनवरी 2023, विपिन यादव एक जनवरी 2023, रितेश कुमार रॉय एक जनवरी 2023, योगेश कुमार एक जनवरी 2023, प्रभु राम एक जनवरी 2023, अनिल ढौंडियाल एक जनवरी 2023, बीरेंद्र कुमार तिवारी एक जनवरी 2023 और आशीष कुमार कुंदन एक जनवरी 2023 से एनएफएसजी के लाभांश प्रदान किए जाएंगे। इनके अलावा कमांडेंट सुगना राम को एक जनवरी 2023, दीपक कुमार एक जनवरी 2023, राहुल एस गौतम एक जनवरी 2023, राजीव गुप्ता एक जनवरी 2023, पीके विश्वकर्मा एक जनवरी 2023, प्रदीप कुमार 9 जनवरी 2023, सोनू एस सिकरावर एक मार्च 2023, वैभव वीएस गौतम 13 मई 2023, मंजीत कुमार 24 जुलाई 2023, जितेंद्र एक सितंबर 2023, नवीन भगत 16 सितंबर 2023, पीजी अभिलाश कुमार 18 सितंबर 2023 और कमांडेंट सुधीर कुमार (फायर कैडर) को 27 मार्च 2023 से एनएफएसजी के लाभांश प्रदान किए जाएंगे। उक्त आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस 2 डिवीजन (कार्मिक 1 डेस्क) द्वारा जारी किया गया है।

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