सीआरपीएफ: कैडर पदोन्नति और 100 दिन की छुट्टियों पर फंसा पेंच, ग्राउंड कमांडरों से बढ़ रही आईजी-एडीजी रैंक की दूरी
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विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और जवानों को एक साल में सौ दिन की छुट्टी, इन दोनों मामलों पर पेंच फंसता नजर आ रहा है। सीआरपीएफ 19 मार्च को अपना 83वां स्थापना दिवस मना रही है, लेकिन अभी तक बल में अनेक समस्याओं का निदान नहीं हो सका है। ग्राउंड कमांडरों से 'आईजी/एडीजी' रैंक दूर होता जा रहा है। प्रमोशन का पहला पायदान मिलने में ही 12 से 15 साल लग रहे हैं। जवानों को सौ दिन की छुट्टी, यह घोषणा तीसरे साल में प्रवेश कर गई है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हो सकी है। जम्मू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह कहते हैं, कभी-कभी तो इतना होता है कि जितना प्रपोजल हम बोलते हैं, उससे भी आगे की सोच के साथ 'सर' हम लोगों को डायरेक्शन देते हैं। कुछ हमारे प्रपोजल पेंडिंग हैं, जिन पर हम अलग से गृह मंत्रालय में 'सर' से बात करेंगे और उसके बाद उस पर कार्रवाई करने का अनुरोध करेंगे।
जून 2016 में मिली थी कैडर रिव्यू प्रपोजल को कैबिनेट की मंजूरी
कायदे से सीआरपीएफ में कैडर समीक्षा अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। पांच साल में होने वाले कैडर रिव्यू प्रपोजल को पिछली बार 29 जून 2016 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। कैडर रिव्यू कमेटी की बैठक 15 दिसंबर 2015 को हुई थी। इस हिसाब से गत वर्ष यह प्रकिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार कैडर रिव्यू प्रपोजल पिछले दिनों ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। हालांकि डीओपीटी की कैडर रिव्यू डिवीजन की प्रक्रिया रिपोर्ट कुछ और ही बताती है। वेबसाइट पर डाली गई एक जनवरी 2016 से 28 फरवरी 2022 तक की रिपोर्ट में सीआरपीएफ कैडर रिव्यू का कहीं कोई जिक्र ही नहीं है। बल के पूर्व एडीजी एसएस संधू का कहना है कि कैडर अफसरों को समय पर प्रमोशन न मिलने के कारण वे जॉब छोड़ रहे हैं। वे दूसरे विकल्पों की ओर जा रहे हैं। जब पहला प्रमोशन 15 साल में मिलेगा तो उसके बाद डीसी, टूआईसी, कमांडेंट व डीआईजी, के पद से होते हुए आईजी, एडीजी तक कोई कैसे पहुंचेगा। आईपीएस की तरह कैडर अफसरों को टाइम बाउंड प्रमोशन नहीं मिलता। अगर सीट खाली है तो पदोन्नति हो जाती है।
डीजी कहते हैं, हम सभी ने चर्चा कर रिपोर्ट भेज दी है...
गुरुवार को बल मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, हमने सभी साथियों से चर्चा कर कैडर रिव्यू प्रपोजल, गृह मंत्रालय में भेज दिया है। बता दें कि गृह मंत्रालय में भेजे गए प्रपोजल में कई तरह की कांट-छांट होती है। उसके बाद वह प्रपोजल कैडर रिव्यू कमेटी के पास जाता है। वहां से पास होने के बाद वह फाइल वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में जाती है। अगर यहां से उसे मंजूरी मिलती है तो ही कैडर रिव्यू प्रपोजल, केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाता है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद उसे लागू कर दिया जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी इस प्रक्रिया में कितना और समय लग सकता है। डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, बल की मौजूदा परिस्थितियों में सभी के हितों को ध्यान में रखकर कैडर रिव्यू प्रपोजल तैयार किया गया है।
100 दिन की छुट्टियां, इस बाबत काम हो रहा है: डीजी
सीएपीएफ एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह कहते हैं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 के आखिर में यह घोषणा की थी कि सभी जवानों को एक साल में 100 दिन की छुट्टी मिलेगी। यानी वे इतने दिन अपने परिवार के साथ रह सकते हैं। बतौर रणबीर सिंह, वह फॉर्मूला अब फेल हो गया है। ढाई साल बाद भी यह तय नहीं हो सका है कि ये छुट्टियां कैसे देनी हैं। पैरामिलिट्री फोर्स में जवानों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए बल के कैप्सूल कोर्स बेमानी साबित हो रहे हैं। इस सवाल के जवाब में डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, सौ दिन की छुट्टी के प्रपोजल पर काम चल रहा है। जवान को साठ दिन की छुट्टी तौ वैसे ही मिलती है। सीएल को जोड़ें तो वह संख्या अस्सी तक पहुंच जाती है। अब बाकी की छुट्टियां कैसे मिलें, इस पर माथापच्ची हो रही है। बल में हाउसिंग की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। देर हो रही है, लेकिन इस घोषणा को लागू किया जाएगा।