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सेना ने लिया बड़ा सबक, उड़ी आतंकी हमले की जांच एनआईए के हवाले

Tue, 20 Sep 2016 04:48 AM IST
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Sep 2016 04:48 AM IST
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probe of uri terror attacks to NIA
uri - फोटो : PTI

सेना के उड़ी बेस पर हुए आतंकी हमले की जांच राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (एनआईए )करेगी। एनआईए की टीम ने आतंकियों से बरामद दो जीपीएस, दो नक्शे की शीट, मैट्रिक्स शीट, एक मोबाइल फोन तथा कुछ दवाओं और खाने-पीने के सामानों के नमूने को अपनी कस्टडी में ले लिया है। जांच एजेंसी के सूत्रों को आतंकियों से बरामद जीपीएस पर पूरा भरोसा है माना जा रहा है कि इसके जरिए पाकिस्तान में स्थित उनकी जड़ तक पहुंचा जा सकता है।

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भारत इस हमले के बाद आतंकियों से मिले सबूत की जांच में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की भी मदद ले सकता है। सूत्र बताते हैं कि इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब किया जा सके।
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इससे पहले पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए हमले की जांच में भी अमेरिकी एजेंसियों की सहायता ली गई थी। गृहमंत्रालय के प्रवक्ता केएस धतवालिया ने उड़ी आतंकी हमले की जांच एनआईए द्वारा किए जाने की पुष्टि की है। उच्च स्तर पर तय किया गया है कि सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां जांच-पड़ताल में एनआईए की मदद करेगी।

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सेना से भी हुई चूक

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साऊथ ब्लाक में यह सवाल काफी गंभीर बना है। प्रधानमंत्री के आवास सात रेसकोर्स रोड पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी इस पर चर्चा से इनकार नहीं किया जा रहा है। फौरी तौर पर इसे सेना के स्तर पर हुई बड़ी लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।

सेना की बिहार बटालियन पर हमला हुआ है। ये जवान  नियंत्रण रेखा से आए थे और इनका स्थान डोगरा बटालियन ले रही थी। जब भी सैन्य टुकड़ी की अदला-बदली होती है, बेहद सतर्कता बरती जाती है। वैसे भी उड़ी आतंकियों की घुसपैठ के लिहाज से काफी संवेदनशील है। ऐसे में पास में ही कंकरीट के बने सुविधा युक्त ठिकाने में जगह होने के बाद भी इन जवानों को टेंट में ठहराना गले के नीचे नहीं उतर रहा है।

सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता बढ़ी है। नियंत्रण रेखा पर लगातार आतंकियों की घुसपैठ का दबाव है। सेना मुख्यालय के हवाले से भी कहा जा रहा है कि 2016 में 17 आतंकियों के घुसपैठ के रास्ते नष्ट किए गए। जम्मू-कश्मीर में करीब 110 आतंकी घुसपैठ के दौरान मारे गए। 31 आतंकी घुसपैठ के प्रयास में मारे गए। ऐसे में सेना के जवानों को इस तरह से तंबू में रहने का स्थान देना अखर रहा है।

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