प्राइवेट ट्रेन: अगर कंपनियों के बीच ये समझौता हुआ तो भारत में भी चलेगी फ्रांस की तरह हाईस्पीड ट्रेन
अलस्टॉम इंडिया कंपनी प्राइवेट ट्रेन चलाने वाले संभावित निवेशकों से संपर्क कर उन्हें समर्थन देने पर विचार कर रही हैं। कंपनी ने निवेशकों को प्रस्ताव दिया है कि वे मिलकर ऐसी हाईस्पीड ट्रेन चलाएंगे जैसी फ्रांस में चलती है...
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देश में प्राइवेट ट्रेन चलाने को लेकर कई नामी कंपनियां दिलचस्पी दिखा रही हैं। इसी कड़ी में अलस्टॉम इंडिया नाम की कंपनी ने आईआरसीटीसी और मेघा इंजीनियरिंग के साथ निजी ट्रेन चलाने को लेकर बातचीत शुरू कर दी है। आईआरसीटीसी और मेघा इंजीनियरिंग पहले ही रेल मंत्रालय में निजी ट्रेन के लिए बोली लगा चुकी हैं।
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार अलस्टॉम इंडिया कंपनी प्राइवेट ट्रेन चलाने वाले संभावित निवेशकों से संपर्क कर उन्हें समर्थन देने पर विचार कर रही हैं। कंपनी ने निवेशकों को प्रस्ताव दिया है कि वे मिलकर ऐसी हाईस्पीड ट्रेन चलाएंगे जैसी फ्रांस में चलती है। पहले दौर की बोली में तीन कंपनियों ने रूचि दिखाई थी। इसमें मेघा इंजीनियरिंग और आईआरसीटीसी शामिल हैं। इन दोनों कंपनियों से अलस्टॉम कंपनी बातचीत कर रही है। हालांकि इस मामले में आईआरसीटीसी का कहना है कि अभी तक उन्हें अलस्टॉम इंडिया कंपनी की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
प्रस्तावित ट्रेन टीजीवी एक हाईस्पीड ट्रेन होती है, जिसका परिचालन फ्रांस में होता है। इसी ट्रेन के एक उन्नत संस्करण ने अप्रैल 2007 में 574.8 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़कर दुनिया को हैरान कर दिया था। इसकी स्पीड 300-320 किलोमीटर प्रति घंटे है। इस ट्रेन में 508 यात्री सफर कर सकते हैं।
निजी ट्रेन के लिए फिर से निकलेंगे टेंडर
भारतीय रेलवे प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए जारी पहले चरण के टेंडर को रद्द कर सकता है। निजी ट्रेन चलाने की इस बिडिंग में कंपनियों ने कुछ खास उत्साह नहीं दिखाया है। सूत्रों के मुताबिक, प्राइवेट ट्रेन चलाने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए केवल दो कंपनियों ने बोलियां लगाई थी। इसके बाद रेल मंत्रालय फिर से इस पर विचार कर रहा है। रेल मंत्रालय ने पूरे देश में 12 क्लस्टर्स में प्राइवेट यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निविदाएं मांगी थीं। इनमें से सिर्फ तीन क्लस्टर के लिए ही बोली लगाई गई है। प्राइवेट यात्री ट्रेन चलाने की पूरी प्रक्रिया का फिर से मूल्यांकन किया जा रहा है। हो सकता है कि इसे बाद में रद्द भी कर दिया जाए।
16 में से केवल दो कंपनियों ने ही दिखाई दिलचस्पी
अक्तूबर में रेल मंत्रालय के 12 क्लस्टरों के लिए 15 फर्मों से 120 आवेदन प्राप्त हुए हैं। नवंबर में इन 120 आवेदनों में से 102 को आरएफक्यू में हिस्सा लेने के लिए पात्र पाया गया। सभी क्लस्टरों को फरवरी 2021 तक परियोजना आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया था। जिन आवेदकों ने आरएफक्यू जमा कराए थे, उनमें मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, साईनाथ सेल्स एंड सर्विसेज, आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी), जीएमआर हाईवेज, वेलस्पन एंटरप्राइजेज, गेटवे रेल फ्रेट और क्यूब हाईवेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर-3 शामिल थीं।
एल एंड टी इंफ्रास्ट्रक्चर, आरके एसोसिएट्स एंड होटलियर्स, पीएनसी इन्फ्राटेक, अरविंद एविएशन और बीएचईएल आदि भी इसके लिए पात्र पाई गई थीं। लेकिन पिछले महीने जब वास्तविक बोली खोली गई तो आईआरसीटीसी और एमईआईएल ने ही बोलियां लगाईं। इससे लगा कि निजी रेल चलाने की परियोजना को ठंडी प्रतिक्रिया मिली है। इसके परिचालन के लिए आईआरसीटीसी साझेदार भी तलाश रही थी, ताकि निजी रेल के परिचालन में आने वाली लागत का वहन किया जा सके।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी यात्रा मार्गों पर ट्रेन चलाने के लिए निजी क्षेत्रों से आवेदन पत्र आमंत्रित किऐ थे। इनमें 151 आधुनिक रेलगाड़िय़ों को शामिल किया जाना था। अनुमान के मुताबिक इस परियोजना में निजी क्षेत्र से करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।