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शिवा शर्मा केस: बुर्का पहनकर छिपी थी मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, ई-रिक्शा के सुराग से नागपुर में ऐसे पकड़ी गई
सार
लखनऊ के शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को नागपुर में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह करीब दस दिनों से ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बच रही थी और पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहन रही थी।
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श्रद्धा दुबे।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
लखनऊ के कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रद्धा पिछले दस दिनों से लगातार अपने ठिकाने बदल रही थी और अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने बुर्का पहन रखा था। पुलिस को उस तक पहुंचाने में एक ई-रिक्शा का सुराग अहम साबित हुआ, जिसके आधार पर नागपुर पुलिस ने 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और आखिरकार उस फ्लैट तक पहुंच गई, जहां श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ छिपी हुई थी।
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शिवा शर्मा की मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज
यह पूरा मामला लखनऊ के हजरतगंज इलाके का है, जहां अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद 27 साल के कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। शिवा की मां रंजना ने श्रद्धा दुबे और उसके साथियों पर बेटे की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया था। उनका कहना था कि शिवा को लगातार परेशान किया जा रहा था, उसे धमकियां दी जा रही थीं और उसके साथ मारपीट भी की गई थी। इस मामले में लखनऊ पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी, लेकिन श्रद्धा और उसके साथी लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहे थे।
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दस दिनों तक बदलती रही ठिकाने, बुर्का पहनकर छिपी
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि श्रद्धा पिछले करीब दस दिनों से अलग-अलग जगहों पर छिपती फिर रही थी। नागपुर पहुंचने से पहले उसके नेपाल, आगरा, लखनऊ और कानपुर में छिपे होने की जानकारी मिली थी। पुलिस को यह भी शक था कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह बातचीत के अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रही थी। अपनी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश के साथ सफर करते समय उसने बुर्का पहन रखा था, ताकि रास्ते में कोई उसे पहचान न सके।
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यूपी पुलिस के इनपुट पर नागपुर में शुरू हुई तलाश
जब उत्तर प्रदेश पुलिस को आरोपियों के मध्य भारत की ओर भागने का शक हुआ, तो उन्होंने नागपुर पुलिस से संपर्क कर मदद मांगी। इसके बाद नागपुर पुलिस ने विशेष टीमें बनाईं, जिन्हें शहर में आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस को यह जानकारी मिली थी कि तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के नंबर वाली एक किराए की गाड़ी से नागपुर पहुंचे थे और शहर में आने के बाद गणेशपेठ इलाके में उतरकर उन्होंने आगे जाने के लिए ई-रिक्शा लिया था।
ई-रिक्शा के सुराग से खंगाले 200 से ज्यादा CCTV कैमरे
यही ई-रिक्शा पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ। जांच टीम ने उस रास्ते का पता लगाने के लिए शहर में लगे 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ पुलिस ने इंटरनेट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया की जानकारी और स्थानीय खुफिया इनपुट की भी मदद ली। करीब 24 घंटे की लगातार निगरानी और पड़ताल के बाद पुलिस उस फ्लैट तक पहुंच गई, जो नागपुर के बाहरी इलाके चिंचभवन की एक ऊंची इमारत की 11वीं मंजिल पर था और तीनों ने किराए पर लिया हुआ था।
नागपुर क्राइम ब्रांच और यूपी एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई
नागपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने उस फ्लैट पर लगातार नजर बनाए रखी और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम के पहुंचने का इंतजार किया। एसटीएफ के पहुंचते ही संयुक्त टीम ने कार्रवाई की और श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे तथा ड्राइवर तनवीर अली को हिरासत में ले लिया। अब पुलिस तीनों को लखनऊ ले जाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है और उन्हें अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड मांगी जाएगी।
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वीडियो जारी कर श्रद्धा ने खुद को बताया बेकसूर
फरार रहने के दौरान श्रद्धा दुबे ने एक वीडियो जारी कर खुद को बेकसूर बताया था और दावा किया था कि शिवा की मौत हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या थी। वहीं, शिवा की मां शुरू से ही श्रद्धा और उसके साथियों पर हत्या का आरोप लगा रही हैं। मामले में पुलिस की आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से मौत की परिस्थितियों को लेकर और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।