फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   presidential polls: race between ram nath kovind and meira kumar but history says anything else

1952 से कैसे बदला राष्ट्रपति चुनाव? पिछले दो दशकों से केंद्र v/s विपक्ष का रह गया मुकाबला

Mon, 17 Jul 2017 10:26 AM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार Updated Mon, 17 Jul 2017 10:26 AM IST
विज्ञापन
 presidential polls: race between ram nath kovind and meira kumar but history says anything else

राष्ट्रपति चुनाव की रेस में इस बार एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार हैं, जिसे लेकर कहा जा रहा है कि रामनाथ कोविंद, मीरा कुमार को मात दे सकते हैं। इस चुनावी मैदान में कई बदलाव आए हैं, लेकिन इन सबके बीच पिछले दो दशकों से ये मुकाबला केंद्र और विपक्ष के बीच रह गया है। एक समय ऐसा भी था जब उम्मीदवारों के बीच होने वाला मुकाबला बेहद रोचक हुआ करता था। आइए आपको बताते हैं 1952 से इस मैदान में हो रही लड़ाई का दिलचस्प इतिहास....

विज्ञापन


2017 का राष्ट्रपति चुनाव 14 वां राष्ट्रपति चुनाव है, इससे पहले चुनाव 1952, 1957, 1962, 1967, 1969, 1974, 1977, 1982, 1987, 1992, 1997, 2002, 2007 और 2012 में हो चुका है। 1952 के चुनाव में पांच उम्मीदवारों की बीच जद्दोजहद हुई, लेकिन ये आकंड़ा 1957 और 1962 में तीन उम्मीदवारों के बीच रह गया।
विज्ञापन


इस बीच 1967 के चुनाव में करीब 17 उम्मीदवार शामिल हुए। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने करीब 1 लाख वोटों से के सुब्बाराव को मात दी, जबकि करीब 9 उम्मीदवारों को वोट ही नहीं मिले। दो उम्मीदवारों को 125 वोट और अन्य दो को 232 वोट पड़े। दूसरे और तीसरे नंबर पर आने वाले उम्मीदवारों को क्रमश: 1369 और 750 वोट मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन

हारे उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते थे

 presidential polls: race between ram nath kovind and meira kumar but history says anything else
जाकिर हुसैन की कार्यकाल में ही मौत हो जाने के बाद 1969 में फिर चुनाव हुए और इस बार रेस में 15 उम्मीदवार थे। चुनाव में हार जाने के बाद उम्मीदवार विरोध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते थे। इतना ही नहीं राष्ट्रपति चुनाव के जरिए पब्लिसिटी पाने के लिए उम्मीदवार नियमों का हवाला देते थे और खबरों में बने रहते थे। 

इस तरह की परेशानियों के उठने की वजह से तत्काल सरकार और विपक्ष ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव एक्ट 1952 में बदलाव करने का फैसला किया और इसमें संसोधन करते हुए 1974 एक्ट लाया गया। इस एक्ट के मुताबिक अब किसी भी उम्मीदवार के 10 सपोर्ट्स जो प्रपोजर्स और 10 सेकेंडर्स होने चाहिए। साथ ही करीब 2500 रुपये सिक्योरिटी जमा किए जाने का बदलाव आया। यह भी निर्देश दिए गए कि उम्मीदवार नामांकन भरने के ऐलान के बाद से 14 दिनों के अंदर पर्चा दाखिल कर सकते हैं।

इस संसोधन के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव की रेस में उम्मीदवारों में कमी नहीं। ऐसा माना जाता है कि 1977 में  सबसे ज्यादा उम्मीदवार 37 इस रेस में शामिल हुए। ये चुनाव इसलिए ऐतिहासिक साबित हुआ था क्योंकि 36 का पर्चा रिजेक्ट कर दिया गया और नीलम संजीव रेड्डी बिना किसी विरोध के राष्ट्रपति चुने गए। इसके बाद पर्चे तो कई भरे जाते थे, लेकिन रेस सिर्फ दो नामों के बीच दिखने लगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed