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राष्ट्रपति चुनाव: सरगर्मी बढ़ी मगर उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार

Sat, 22 Apr 2017 07:11 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट Updated Sat, 22 Apr 2017 07:11 AM IST
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President's election: Suspense on candidate

जुलाई महीने में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव दर चुनाव सियासी झटका झेल रहा विपक्ष जहां इसी चुनाव के बहाने भाजपा विरोधी मोर्चा खड़ा करने की कोशिश में है, वहीं अंकगणित के लिहाज से जरूरी वोटों से महज कुछ ही दूरी पर खड़ा राजग को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस मुद्दे से पर्दा उठाए जाने का इंतजार है। अपने फैसलों से हमेशा चौंकाने वाले प्रधानमंत्री राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के मामले में भी सबको चौंकने पर मजबूर करेंगे। फिलहाल संकेत यह है कि इस पद के लिए प्रधानमंत्री की पसंद राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्र की कोई बड़ी हस्ती होगी, जबकि विपक्ष की ओर से पहली कोशिश किसी चेहरे पर उलझने के बदले सर्वसम्मत उम्मीदवार उतारने पर सहमति बनाने की है।

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भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की प्रचंड जीत ने पार्टी की राह आसान कर दी है। चुनाव नतीजे आने के बाद चुनौती राजग को एकजुट करने की थी। बीते 10 मार्च की राजग की बैठक में यह चुनौती भी पार कर ली गई। निश्चित रूप से इस पद के लिए प्रधानमंत्री मोदी की पसंद ही पहली और आखिरी पसंद होगी। गौरतलब है कि पहले किसी आदिवासी या दलित महिला को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। हालांकि अब पार्टी ने संकेत दिया है कि इस पद के लिए किसी बड़ी सियासी या सामाजिक हस्ती पीएम मोदी की पसंद होगी। मनपसंद व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाने के लिए भाजपा को राजग के सांसदों व विधायकों के अलावा करीब 12000 मतों की जरूरत है। इसके लिए निर्दलीय विधायकों, टीआरएस, एआईएडीएमके के बागी सांसदों-विधायकों से संपर्क साधा गया है।
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उधर, चुनाव दर चुनाव भाजपा से सियासी पटखनी खा रहा विपक्ष इस चुनाव के बहाने राजग विरोधी दलों को एकजुट करने की कोशिश में है। बिहार और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री क्रमश: नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के अलावा एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार इस दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। इस सिलसिले में नीतीश ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी सोनिया से मिले हैं। इनकी पहली कोशिश फिलहाल राजग विरोधी दलों में सर्वसम्मत उम्मीदवार उतारने पर आम सहमति बनाने की है।
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क्या है राजग की स्थिति
लोकसभा और राज्यसभा के कई पद खाली हैं, जबकि मनोनीत सदस्य वोट नहीं डाल सकते। इस हिसाब से दोनों सदनों के वोट डालने वाले 772 सांसदों में राजग के 407 सांसद हैं। एक सांसद के वोट का मूल्य 708 होता है। ऐसे में संसद में राजग के पास 288156 वोट हैं। राजग के 1810 विधायकों के मतों का मूल्य करीब 2.46 लाख है। इस प्रकार राजग के मतों का मूल्य करीब 5.36 लाख है। ऐसे में अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए भाजपा को करीब 12000 अतिरिक्त मतों की जरूरत पड़ेगी। इन्हीं जरूरी मतों को पूरा करने के लिए भाजपा की निगाहें निर्दलीय विधायकों को साधने के अलावा विपक्ष में फूट पैदा करने की है।



फिलहाल एकजुटता है विपक्ष का लक्ष्य
विपक्ष को भी पता है कि राष्ट्रपति चुनाव में राजग का पलड़ा भारी है। मगर विपक्षी खेमे के कई नेता इस चुनाव के बहाने राजग विरोधी मोर्चा बनने की संभावना देख रहे हैं। यही कारण है कि विपक्षी खेमे के कई नेता इस दिशा में विपक्ष में उम्मीदवारी के सवाल पर एका बनाने में जुटे हैं।

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