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राष्ट्रपति की सलाह: न्यायाधीशों की चयन प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता, परीक्षा के माध्यम से की जा सकती है नियुक्ति
Sun, 28 Nov 2021 10:35 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 28 Nov 2021 10:35 AM IST
सार
संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 'जज का चयन जज' प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण के अलावा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी मौजूद थे।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए चर्चा में रही कॉलेजियम प्रणाली एक बार फिर सुर्खियों में है। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जज के माध्यम से जज के चयन की प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है। ऑल इंडिया परीक्षा के माध्यम से उच्च पदों पर न्यायाधीशों की नियुक्ति की जा सकती है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपेार्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ने कहा कि न्यायाधीशों का चयन एक प्रासंगिक मुद्दा है। बिना किसी दुविधा के एक स्वतंत्र लोकतंत्र के लिए बदलाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में दृढ़ दृष्टिकोण रख्ता हूं कि न्यायालय की स्वतंत्रता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोई और बेहतर तरीका खोजा जा सकता है।
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हो सकती है अखिल भारतीय न्यायिक सेवा
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि निम्न से लेकर उच्च पद तक न्यायाधीशों के चयन के चयन व प्रमोशन के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह विचार नया नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की चयन प्रक्रिया के इससे भी बेहतर सुझाव हो सकते हैं, लेकिन हमारा लक्ष्य सिर्फ यह होना चाहिए कि न्याय वितरण के लिए स्वतंत्र व मजबूत न्याय व्यवस्था।
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अत्यधिक विवेक का प्रयोग करें न्यायाधीश
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में न्यायाधीशों को याद दिलाया कि अदालत कक्षों के अंदर बोलने में अत्यधिक विवेक का प्रयोग करना उन पर निर्भर करता है। उन्होंने न्यायधीशों व वकीलों को संबोधित करते हुए कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपने अपने लिए एक उच्च 'बार' निर्धारित किया है। इसलिए यह न्यायाधीशों पर भी निर्भर करता है कि वे अदालतों में बोलने में अत्यधिक विवेक का प्रयोग करें।अविवेकी टिप्पणी भले ही वह अच्छे इरादे से किया गया है लेकिन वह न्यायपालिका को नीचा दिखाने के लिए संदिग्ध व्याख्याओं की जगह बनाता है।