President: राष्ट्रपति की IFS अफसरों से अपील, अवैध गतिविधियों से वनों की रक्षा के लिए प्रभावी भूमिका निभाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईएफएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज वनों को अवैध गतिविधियों से बचाने की जरूरत है। वन अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभाने की जरूरत है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आईएफएस प्रोबेशनरों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार वन क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दे रही है। विकास की गतिविधियों में आदिवासी समुदायों के योगदान को मान्यता मिली है। भारतीय वन सेवा के अफसरों को उनके अधिकारों और जैव विविधता के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर जागरूक करना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने बड़ी संख्या में महिलाओं के वन अधिकारी बनने पर खुशी जताई। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए वन बहुत जरूरी हैं। आईएफएस अधिकारियों को अवैध गतिविधियों से वनों की रक्षा करने के लिए अपनी भूमिका प्रभावी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी देश के समृद्ध और विविध वन संपदा के संरक्षक हैं।
आईएफएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज वनों को अवैध गतिविधियों से बचाने की जरूरत है। वन अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभाने की जरूरत है। अगर अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं तो इसका अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आईएफएस अफसर वनवासियों की विरासत और संस्कृति के भी संरक्षक हैं।
#WATCH | President Droupadi Murmu shares her childhood experiences with Forest Service probationers, exhorts them to work with empathy towards life-giving forests along with having a meaningful career. pic.twitter.com/r26Wepnc5E
— ANI (@ANI) December 21, 2022
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वन में पैदा होने वाले उत्पादों से 27 करोड़ से ज्यादा लोगों की आजीविका चलती है। इनमें औषधीय गुण भी पाया जाता है। लेकिन भारत में वन क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों में सिर्फ 15 फीसद ही औषधीय हैं। राष्ट्रपति मुर्मू देश के विभिन्न हिस्सों में जंगलों में आग लगने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज न सिर्फ वनों के संरक्षण की चुनौती है बल्कि हमें पर्यावरण परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना है।