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जम्मू में आठवीं बार राज्यपाल शासन: एनएन वोहरा का फोन और मौन हो गईं महबूबा

Wed, 20 Jun 2018 10:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Jun 2018 10:16 AM IST
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President has approved imposition of Governor rule in Jammu and Kashmir
फाइल फोटो

जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती का कार्यकाल मंगलवार को राज्यपाल के एक फोन के बाद अचानक खत्म हो गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्यपाल एनएन वोहरा ने सीएम महबूबा को फोन कर भाजपा की तरफ से समर्थन वापस लेने की जानकारी दी।

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अधिकारियों ने बताया कि महबूबा के लिए यह किसी अन्य दिन की तरह ही कामकाजी दिन था। मुख्यमंत्री उस समय सिविल सचिवालय में थी जब मुख्य सचिव बीबी व्यास ने फोन रिसीव किया। फोन पर मुख्यमंत्री के कार्यकाल के खत्म होने की सूचना आई। राज्यपाल ने व्यास से सीएम के बारे में पूछा और उनसे तुरंत बात कराने को कहा। यह सब भाजपा के महासचिव राम माधव के दिल्ली में करीब 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के कुछ मिनट पहले हुआ। 
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अधिकारियों के अनुसार राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को भाजपा के निर्णय के बारे में जानकारी दी। इससे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राज्यपाल रविंद्र रैना ने राज्यपाल को पत्र भेज निर्णय के बारे में जानकारी थी। इसके साथ भाजपा के मंत्रियों के इस्तीफे भी थे। 59 वर्षीय महबूबा यह खबर सुनकर मौन हो गईं। थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ बात करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपना इस्तीफा दे देंगी।

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6 साल 264 दिन जम्मू-कश्मीर में रहा था राज्यपाल शासन
जम्मू-कश्मीर में भाजपा के समर्थन वापस लेने और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद राज्य संविधान के अनुच्छेद-92 के तहत राज्यपाल शासन लागू हो गया है। अन्य राज्यों में संविधान के अनुच्छेद-356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू होता है। यह पहली बार नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में ऐसी स्थिति बनी है। अलग-अलग कारणों से पहले भी सात बार ऐसे हालात बने हैं। ये लेकर राज्य में आठ बार राज्यपाल शासन लगाए गए हैं।

26 मार्च, 1977 - 9 जुलाई, 1977 : इस दौरान नेशनल कांफ्रेंस के शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण नेशनल कांफ्रेंस सदन में अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद राज्य में 105 दिन राज्यपाल शासन लागू रहा।

6 मार्च 1986 - 7 नवंबर 1986 : शेख अब्दुल्ला के बड़े दामाद गुलाम मोहम्मद शाह ने नेकां को तोड़कर अवामी नेशनल कांफ्रेंस बनाई। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन से राज्य में सरकार बनाई। हालांकि, कुछ ही समय बाद राज्य में कानून-व्यवस्था का हवाला देकर कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया।

19 जनवरी, 1990 - 9 अक्तूबर, 1996 : राज्य में पनपे उग्रवाद के दौरान जगमोहन को राज्यपाल बनाने पर फारूक अब्दुल्ला ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राज्य में 6 साल 264 दिन तक राज्यपाल शासन रहा। 

18 अक्तूबर, 2002 - 2 नवंबर, 2002 : इस दौरान चुनाव के निर्णायक नतीजे नहीं आने के कारण 15 दिन के लिए राज्यपाल शासन रहा। इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई।


11 जुलाई, 2008 - 5 जनवरी, 2009 : तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नवी आजाद ने अमरनाथ श्राइन को जमीन स्थानांतरित करने का फैसला लिया। इसके बाद पीडीपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। नतीजतन आजाद सरकार अल्पमत में आ गई। इसके बाद राज्य में 178 दिन राज्यपाल शासन रहा। 

9 जनवरी, 2015 - 1 मार्च, 2015 : त्रिशंकु विधानसभा के कारण 51 दिन तक सरकार नहीं बन पाई थी। बाद में भाजपा और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई। 

8 जनवरी, 2016 - 4 अप्रैल, 2016 : तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद राज्य में 87 दिन राज्यपाल शासन लागू रहा। 

 
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