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संघ पर आतंकियों से संबंधों का आरोप लगा चुके हैं प्रणब, आज मंच पर भागवत संग रहे मौजूद

Fri, 08 Jun 2018 06:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Jun 2018 06:51 AM IST
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Pranab Mukherjee had accused RSS for relations with terrorists, now with Mohan Bhagwat

संघ के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर अपनी ही पार्टी कांग्रेस के निशाने पर आए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने 60 साल के सार्वजनिक जीवन में विवादों से हमेशा दूर रहे। यहां तक कि उनके राजनीतिक विरोधी भी उनका सम्मान और प्रशंसा करते थे। राजग के पहले कार्यकाल के दौरान राज्यसभा में हिंदुत्व पर हो रही बहस के दौरान मुखर्जी के किसी तर्क से नाराज होकर तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी जोर-जोर से बोलने लगे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें बैठने का इशारा किया। बाद में वाजपेयी ने मुखर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि वह काफी शोध करने के बाद तार्किक बात करते हैं।

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विवादों से दूर रहने वाले प्रणब की विरोधी भी करते रहे हैं तारीफ

आरएसएस को बताया था देश के लिए खतरा


प्रणब ने भले ही बृहस्पतिवार को संघ के संघ शिक्षा वर्ग को संबोधित किया हो, लेकिन आठ साल पहले उन्होंने संघ को आतंकवाद का पोषक बताते हुए जांच की मांग की थी। बतौर कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य मुखर्जी ने 2010 में दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित पार्टी के 83वें महाधिवेशन में एक प्रस्ताव पेश किया था। इसमें आतंकियों से संबंधों का आरोप लगाते हुए संघ को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था।
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संघ पर देश को बांटने का लगाया था आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार प्रस्ताव को प्रणब ने ही तैयार किया था। प्रस्ताव में घृणा और हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए संघ को देश की धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरा बताया गया था। इसमें कहा गया था कि यह संगठन देश को बांटने का षड्यंत्र रच रहा है। कांग्रेस के प्रस्ताव में कहा गया था कि जो संगठन देश की सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संघ और उसकी सहयोगी संस्थाओं के आतंकवादियों से संबंध हैं। इसकी जांच की जानी चाहिए।
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प्रस्ताव में मोदी पर भी साधा गया था निशाना

प्रस्ताव में मोदी पर निशाना साधते हुए कहा गया था कि संघ, विहिप और भाजपा द्वारा फैलाई सांप्रदायिक हिंसा से देश की आर्थिक प्रगति प्रभावित हो रही है। कांग्रेस केंद्र सरकार से आग्रह करती है कि गुजरात में 2002 में हुए नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों को उचित सजा दिलाए। 

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