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Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar Winners: 2019 में इस पुरस्कार में क्या हुए बदलाव, अब किन बच्चों को मिलता है ये सम्मान?
Mon, 24 Jan 2022 06:57 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 24 Jan 2022 06:57 PM IST
सार
पीएम ने समाजसेवा के क्षेत्र में पुरस्कार हासिल करने वाले जालंधर के मीधांश से कहा ‘आपने अपने काम से यह साबित कर दिया कि हमारे देश के बच्चों में जो योग्यता है उससे बड़े-बड़े बदलाव आ सकते हैं।’
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पीएम मोदी ने किया बच्चों से संवाद
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से बातचीत की। 'राष्ट्रीय बालिका दिवस' और 'आजादी का अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में पीएम ने पुरस्कार विजेता बच्चों से वर्चुअली बातचीत की। गणतंत्र दिवस के मौके पर दिए जाने वाले इस राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए कुल 29 बच्चों को चुना गया है।
हर साल ये बच्चे पुरस्कार लेने के लिए दिल्ली आते हैं और राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस के परेड में भी हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण ऐसा नहीं हो सका और इस साल विजेताओं को 'ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी' के जरिए डिजिटल सर्टिफिकेट्स दिए गए हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2020' के लिए 49 बच्चों का चयन हुआ था।
2019 में हुए अहम बदलाव
पहले हर साल बहादुरी के लिए गणतंत्र दिवस के मौके पर बच्चों को यह पुरस्कार दिया जाता था। लेकिन 2019 में केंद्र सरकार ने इसमें अहम बदलाव करते हुए सिर्फ बहादुर बच्चों को ही नहीं बल्कि नवाचार, सामाजिक सेवा, शैक्षिक, कला और संस्कृति और खेल में भी अच्छा करने वाले बच्चों को भी देना शुरू किया है।
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हर साल ये बच्चे पुरस्कार लेने के लिए दिल्ली आते हैं और राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस के परेड में भी हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण ऐसा नहीं हो सका और इस साल विजेताओं को 'ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी' के जरिए डिजिटल सर्टिफिकेट्स दिए गए हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2020' के लिए 49 बच्चों का चयन हुआ था।
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2019 में हुए अहम बदलाव
पहले हर साल बहादुरी के लिए गणतंत्र दिवस के मौके पर बच्चों को यह पुरस्कार दिया जाता था। लेकिन 2019 में केंद्र सरकार ने इसमें अहम बदलाव करते हुए सिर्फ बहादुर बच्चों को ही नहीं बल्कि नवाचार, सामाजिक सेवा, शैक्षिक, कला और संस्कृति और खेल में भी अच्छा करने वाले बच्चों को भी देना शुरू किया है।
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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
- फोटो : सोशल मीडिया
बदलाव की वजह क्या रही?
दरअसल हर साल वीरता पुरस्कार का आयोजन संस्था भारतीय बाल कल्याण परिषद करती थी। संस्था की तरफ से चयनित बच्चों को ही महिला और बाल विकास मंत्रालय स्वीकृत करता था और इन बच्चों को पुरस्कार दिए जाते थे। लेकिन इस संस्था पर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे और दिल्ली हाईकोर्ट में इस पर एक केस चलने लगा। जिसके बाद महिला और बाल विकास मंत्रालय ने खुद को इस संस्था से अलग कर लिया। नाम को बदलने के साथ ही पुरस्कार पाने वाले क्षेत्र का विस्तार कर दिया गया।
परिषद की भूमिका क्या थी?
परिषद वर्ष 1957 से देशभर में बहादुरी का काम करने वाले बच्चों के नामों का चयन करते हुए उन्हें पुरस्कार देती थी, जिसमे केंद्र सरकार सहयोग देती रही। सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस परेड से पहले होनहार बच्चों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी मिलने का मौका मिलता था।
दरअसल हर साल वीरता पुरस्कार का आयोजन संस्था भारतीय बाल कल्याण परिषद करती थी। संस्था की तरफ से चयनित बच्चों को ही महिला और बाल विकास मंत्रालय स्वीकृत करता था और इन बच्चों को पुरस्कार दिए जाते थे। लेकिन इस संस्था पर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे और दिल्ली हाईकोर्ट में इस पर एक केस चलने लगा। जिसके बाद महिला और बाल विकास मंत्रालय ने खुद को इस संस्था से अलग कर लिया। नाम को बदलने के साथ ही पुरस्कार पाने वाले क्षेत्र का विस्तार कर दिया गया।
परिषद की भूमिका क्या थी?
परिषद वर्ष 1957 से देशभर में बहादुरी का काम करने वाले बच्चों के नामों का चयन करते हुए उन्हें पुरस्कार देती थी, जिसमे केंद्र सरकार सहयोग देती रही। सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस परेड से पहले होनहार बच्चों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी मिलने का मौका मिलता था।
राष्ट्रीय बाल कल्याण परिषद
- फोटो : अमर उजाला
पुरस्कार पाने वाले बच्चों की पढ़ाई, ट्रेनिंग आदि का पूरा खर्चा परिषद ही देती थी। 1996 से, देश के प्रत्येक प्रधान मंत्री ने गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए 5-18 वर्ष की आयु के बच्चों को सम्मानित किया है। पदक के साथ, उन्हें एक प्रमाण पत्र, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार भी मिलता है।
परिषद ने क्या कहा?
केंद्र सरकार के इस पुरस्कार से खुद को अलग कर लेने के बाद परिषद ने अपने स्तर पर 21 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, 2018 देने की घोषणा की। परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने कहा कि केंद्र सरकार ने बेशक अदालत में वित्तीय अनियमितता के केस के चलते राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 में खुद को अलग कर लिया है, लेकिन संस्था बहादुर बच्चों को यह पुरस्कार देती रहेगी। उन्होंने कहा कि परिषद केवल बहादुरी के लिए पुरस्कार देती थी। जबकि सरकार द्वारा चयनित बच्चों में सभी का चयन बहादुरी के लिए नहीं है।
परिषद ने क्या कहा?
केंद्र सरकार के इस पुरस्कार से खुद को अलग कर लेने के बाद परिषद ने अपने स्तर पर 21 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, 2018 देने की घोषणा की। परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने कहा कि केंद्र सरकार ने बेशक अदालत में वित्तीय अनियमितता के केस के चलते राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 में खुद को अलग कर लिया है, लेकिन संस्था बहादुर बच्चों को यह पुरस्कार देती रहेगी। उन्होंने कहा कि परिषद केवल बहादुरी के लिए पुरस्कार देती थी। जबकि सरकार द्वारा चयनित बच्चों में सभी का चयन बहादुरी के लिए नहीं है।