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महाराष्ट्र में चरम पर सत्ता संघर्ष, आज भाजपा विधायक दल की बैठक

Wed, 30 Oct 2019 10:24 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: देव कश्यप Updated Wed, 30 Oct 2019 10:24 AM IST
सार

  • अमित शाह ने रद्द किया दौरा तो उद्घव ने रद्द की बैठक
  • नई सरकार के गठन में देरी तय, आज भाजपा विधायक दल की बैठक
  • शिवसेना के 45 विधायक भाजपा के साथ सरकार बनाने के पक्ष में: काकड़े

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Power struggle in Maharashtra: Amit Shah will not talk to Uddhav without  prepared a solid roadmap

विस्तार

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा और शिवसेना के बीच संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। इस मुद्दे पर दोनों ही दल झुकने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना की तीखी बयानबाजी से नाराज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जहां बुधवार को होने वाली अपनी मुंबई यात्रा टाल दी है। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान से नाराज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नई सरकार के गठन के लिए होने वाली दोनों दलों की बैठक टाल दी है।

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दरअसल शाह बुधवार को पार्टी के विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेने मुंबई जाने वाले थे। उनकी योजना शाम में उद्धव से मुलाकात की थी। इसी बीच शिवसेना की तीखी बयानबाजी से नाराज शाह ने मुंबई जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। उनकी जगह अब कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा वहां जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि अब जब तक नई सरकार के गठन के लिए कोई ठोस रोडमैप तैयार नहीं होगा, तब तक शाह और उद्धव की बैठक नहीं होगी। उधर शिवसेना ने भी सीएम की कुर्सी और सत्ता के कार्यकाल के बराबर बंटवारे पर अडिग रहने का संदेश दिया है।

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आज भाजपा विधायक दल की बैठक

भाजपा बुधवार को विधायक दल का नेता चुनेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसमें मौजूद नहीं होंगे। शाह ने बैठक से पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर और पार्टी उपाध्यक्ष अविनाश खन्ना को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इसमें, सीएम पद के लिए एक बार फिर से फडणवीस के नाम पर मुहर लगना तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के सवाल पर फडणवीस ने कहा, यह पहले ही तय हो चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं और अब केवल औपचारिकता होनी बाकी है। वहीं केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना को केंद्र और राज्य सरकार में अतिरिक्त मंत्री पद के बदले महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की मांग छोड़ने की सलाह दी है।

 

नई सरकार के गठन में देरी तय

शिवसेना और भाजपा के बीच फंसे पेच के कारण राज्य में नई सरकार के गठन में देरी तय है। शिवसेना की जिद के आगे नहीं झुकने का संदेश देने के लिए भाजपा की योजना फिलहाल शीर्ष स्तर पर बातचीत नहीं करने की है। पार्टी की योजना इस बीच निर्दलीय और छोटे-छोटे दलों के विधायकों को साध कर अपने समर्थक विधायकों की संख्या बढ़ाने की है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कार्यकाल के बंटवारे और सीएम का पद शिवसेना को दिए जाने की मांग स्वीकार नहीं करेगी।

शिवसेना करना चाहती है मोलभाव की राजनीति: भाजपा

शिवसेना के बैठक रद्द करने के बाद भाजपा सूत्रों ने कहा कि यह सिर्फ उसकी चाल है। शिवसेना सरकार गठन के काम को लंबा खींचना चाहती है, ताकि ज्यादा मोलभाव कर सके। भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं ने शिवसेना की रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि शिवसेना मंत्रिमंडल में कुछ अधिक व अहम मंत्री पदों के साथ सरकार बनाने को राजी हो जाएगी, लेकिन इससे पहले अधिक सौदेबाजी करेगी। वह कुछ ऐसे अहम विभाग मांगेगी, जो पिछली सरकार में भाजपा के पास थे।

शाह और उद्धव 50-50 फॉर्मूले को देंगे अंतिम रूप: पाटिल 

मुंबई। भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे जल्द ही 50-50 फॉर्मूले को अंतिम रूप देंगे। पाटिल ने कहा कि बुधवार को होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी उपाध्यक्ष अविनाश राय हिस्सा लेंगे। हालांकि, पाटिल ने लोकसभा चुनाव से पहले हुए भाजपा-शिवसेना के बीच बनी सहमति पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फॉर्मूला लोकसभा चुनाव से पहले प्रस्तावित किया गया था और इसके  बारे में मुझे जानकारी नहीं है।  

लगता है नहीं बनेगी भाजपा-शिवसेना सरकार: पृथ्वीराज 

सतारा। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मंगलवार को कहा कि भाजपा और शिवसेना के बीच जारी खींचतान को देखकर लगता है कि राज्य में उनकी सरकार नहीं बनेगी। दोनों पार्टियों के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे साफ है कि दोनों के बीच कुछ समस्या है। चव्हाण ने कहा कि इन सबके चलते मतदाताओं में असमंजस में हैं। दोनों ही पार्टियों को साथ आकर लोगों को बताना चाहिए कि उनके बीच क्या तय हुआ है। 

शिवसेना के 45 विधायक भाजपा संग सरकार बनाने के पक्ष में : काकड़े

भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय काकड़े ने दावा किया कि शिवसेना के 45 विधायक भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने को इच्छुक हैं और चाहते हैं कि देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनें। काकड़े ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शिवसेना विपक्ष में बैठेगी।

एक टीवी चैनल से बात करते हुए मंगलवार को भाजपा सांसद ने कहा, शिवसेना के 56 विधायकों में से 45 ने भाजपा के साथ सरकार बनाने की इच्छा जताई है। वह चाहते हैं कि उन्हें सरकार में शामिल किया जाए। इन विधायकों का मानना है कि उनकी पार्टी को भाजपा के मिलकर देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में जल्द से जल्द सरकार का गठन करना चाहिए। ये विधायक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को भी मना लेंगे। काकड़े ने कहा कि नतीजों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है, लिहाजा शिवसेना के पास सरकार का हिस्सा बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

वीडियो जारी कर शिवसेना ने फडणवीस पर साधा निशाना

देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री पद साझा नहीं करने के बयान के बाद शिवसेना ने एक पुराना वीडियो जारी किया है। यह वीडियो 18 फरवरी के मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन का है। उद्धव ठाकरे के करीबी हर्षल प्रधान ने ‘जरा याद करो जबानी’ शीर्षक से यह वीडियो जारी किया। इसमें फडणवीस मराठी में कह रहे हैं, हमने सत्ता में फिर आने के बाद पदाें और जिम्मेदारियों को समान रूप से बांटने का फैसला किया है।

यहां कोई दुष्यंत नहीं, जिसके पिता जेल में हों : राउत

शिवसेना सांसद संजय राउत ने देवेंद्र फडणवीस के पांच साल भाजपा का ही मुख्यमंत्री होगा, बयान के बाद कहा है कि अब पार्टी की तरफ से केवल उसके अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ही बात करेंगे। वहीं राज्य में सरकार बनने में हो रही देरी पर उन्होंने कहा कि यहां (महाराष्ट्र) कोई दुष्यंत नहीं, जिसके पिता जेल में हों। शिवसेना धर्म और सत्य की राजनीति करती है। शरद पवार ने राज्य में भाजपा विरोधी माहौल बना दिया है और कांग्रेस कभी भाजपा के साथ जाएगी नहीं। उन्होंने कहा कि उद्धव कह चुके हैं, शिवसेना के सामने विकल्प खुले हैं परंतु वह पाप हम करना नहीं चाहते। शिवसेना न्याय की राह पर चलती है। हम सत्ता के भूखे नहीं हैं। राउत ने कहा कि हमने वही मांग की है, जो लोकसभा चुनाव के समय दोनों दलों के नेताओं के बीच तय हुई थी। 

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