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Poonch Attack: पुलवामा हमले जैसा था खुफिया इनपुट, पहले फायरिंग, फिर फेंके कई ग्रेनेड, क्या मार्ग पर थी आरओपी?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 21 Apr 2023 07:36 PM IST
सार

Poonch Attack: इस तरह का घात लगाकर किया गया हमला, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिलता रहा है। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर कई ऐसे बड़े हमले किए हैं, जिनमें एक साथ आईईडी ब्लास्ट और फायरिंग, दोनों का इस्तेमाल हुआ है। इस तरह के हमले में जवानों को संभलने का मौका नहीं मिलता...

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Poonch Attack: Intelligence input was like Pulwama attack, first firing, then threw several grenades
Poonch Terror Attack - फोटो : ANI

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के पुंछ के भिंबर गली क्षेत्र में सैन्य वाहन पर हुए आतंकवादी हमले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। चूंकि कश्मीर में जी-20 की बैठक प्रस्तावित है और इसे लेकर खुफिया इनपुट जारी हुआ था। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जिस तरह के इनपुट, पुलवामा हमले से पहले जारी किए गए थे, कुछ वैसे ही अलर्ट इस बार भी मिलते रहे हैं। घटनास्थल को देखकर कहा जा सकता है कि आतंकियों ने पहले सेना के वाहन पर फायर किया होगा, उसके बाद एक साथ कई ग्रेनेड फेंके गए होंगे। विशेषज्ञ ने बताया, जिस तरह से वाहन और जवानों के शव, झुलसे हुए थे, ऐसा तभी संभव है, जब हमलावर बहुत निकट छिपे हों।

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सैन्य विशेषज्ञ के अनुसार, इस हमले में देखने वाली बात यह भी है कि आतंकी हमले के बाद कोई जवाबी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। संभव है कि वाहन में बैठ जवानों को संभलने का मौका ही न मिला हो, लेकिन उस मार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी 'आरओपी' तो रही होगी। आतंकी हमले की भयावहता से मालूम होता है कि हमले के वक्त आसपास कम दूरी पर कोई दूसरा वाहन नहीं था। हमले को अंजाम देकर, आतंकी आसानी से भाग गए।

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यह भी पढ़ें: पुंछ आतंकी हमला: पंजाब के चार जवान वतन पर कुर्बान, परिवार को एक-एक करोड़ देगी मान सरकार

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ये घात लगाकर किया गया हमला था। सेना के ट्रक पर एक तरफ से नहीं, बल्कि चारों ओर से फायरिंग हुई है। जब तक जवानों को संभलने का मौका मिलता, आतंकियों ने एक के बाद कई ग्रेनेड फेंक दिए। इससे वाहन में आग लग गई।

इस तरह का घात लगाकर किया गया हमला, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिलता रहा है। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर कई ऐसे बड़े हमले किए हैं, जिनमें एक साथ आईईडी ब्लास्ट और फायरिंग, दोनों का इस्तेमाल हुआ है। इस तरह के हमले में जवानों को संभलने का मौका नहीं मिलता। ऐसे हमले की रणनीति बहुत सोच समझकर तैयार की जाती है। कई बार रेकी होती है। सेना के वाहन पर हुए हमले की जिम्मेदारी, आतंकी संगठन पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) ने ली है। उन्होंने अगले माह कश्मीर में होने जा रही जी-20 बैठक को टारगेट करने की धमकी दी है। इस घटना को लेकर सेना मुख्यालय, उत्तरी कमान की ओर से बयान जारी किया गया है। उसमें कहा गया है कि आतंकवादियों ने भारी बारिश और क्षेत्र में कम दृश्यता का फायदा उठाते हुए हमले को अंजाम दिया है। आतंकवादियों ने सेना के वाहन पर गोलीबारी की। ऐसा शक भी है कि आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर ग्रेनेड भी फेंक दिए। इससे वाहन में आग लग गई।

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2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 की समाप्ति के बाद पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट, अस्तित्व में आया था। यह समूह, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' के लिए काम करता है। पीएएफएफ ने गत वर्ष राजौरी में एक सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी।

भारत सरकार ने इस साल जनवरी में पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट और इससे जुड़े सभी समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के रहने वाले अरबाज अहमद मीर को भी उक्त अधिनियम के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था। अहमद मीर, वर्तमान में पाकिस्तान में रह रहा है और वह आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' के लिए काम करता है।

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