खुशी है कि राहुल बोलना सीख रहे हैं: मोदी
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नोटबंदी के विरोध में संसद ठप करने लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी तुलना आतंकियों को ‘कवर फायर’ देने वाली पाकिस्तान सेना से की। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ‘भूकंप’ वाले बयान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि वह बोलना सीख गए हैं।
राहुल पर चुटकी लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के युवा नेता बोलने से पहले नहीं सोचते और अनजाने में ही अपनी पार्टी के शासनकाल की विफलता स्वीकार कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद अपने लोकसभा क्षेत्र में पहली बार संक्षिप्त दौरे पर गए मोदी ने कहा कि नोटबंदी से न सिर्फ ‘कालेधन’ का खुलासा हुआ बल्कि ‘काले मन’ का भी पता चला है।
उत्तर प्रदेश में कई विकास योजनाओं का शुभारंभ करने के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि विपक्षी दल भ्रष्टाचारियों का साथ देंगे। कई लोग कहते हैं कि मैंने इतने बड़े कदम (नोटबंदी) के परिणाम को नहीं समझा।
दरअसल मैं तो यही अंदाजा नहीं लगा पाया कि विपक्ष दल और उनके नेता भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए इस दर्जे की बेशर्मी पर उतर आएंगे।’ नोटबंदी को लेकर सरकार पर हमले कर रहे विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर पाकिस्तानी सेना जिस तरह ‘कवर फायर’ देते हुए आतंकियों की घुसपैठ कराती है, ठीक उसी तरह विपक्ष भ्रष्ट और बेईमानों के समर्थन में बेशर्मी से इस कदम का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने 46 वर्षीय राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘अब मैं समझा कि किसके लिए पूरा संसद सत्र किया गया था। उनके पास एक युवा नेता हैं जिन्होंने अभी-अभी बोलना सीखा है। उनकी इस उपलब्धि से मुझे अपार खुशी हो रही है। सन 2009 में आप नहीं बता पाए कि इस पैकेट के अंदर क्या है और क्या नहीं। अब हम इसकी तहकीकात कर रहे हैं। वह (राहुल) हमेशा धमकी देते थे कि जब वह बोलेंगे तो भूचाल आ जाएगा। यदि वह नहीं बोलते तभी भूचाल आ सकता था। यह ऐसा भूकंप था जिसे पिछले 10 साल से जनता झेल रही थी। उनके बोलने से अब भूकंप का खतरा टल गया है। अब हम निश्चिंत हो सकते हैं कि प्राकृतिक आपदा का खतरा टल गया है।’
ई-ट्रांजेक्शन पर राहुल गांधी ने चिंता जताई थी कि देश में निमभन साक्षरता दर के कारण ऐसा संभव नहीं है। इस पर भी मोदी ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए क्योंकि मुझे काला जादू नहीं आता कि मैंने लोगों को निरक्षर बना दिया। वह बोलने से पहले नहीं सोचते और यह भी नहीं महसूस करते कि वह अपनी ही पार्टी के लंबे कार्यकाल की विफलता स्वीकार कर रहे हैं।’
चिदंबरम, मनमोहन पर कड़ा प्रहार
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वे लोग गरीबी, निरक्षरता और गांवों में बिजली के अभाव के कारण कैशलेस अर्थव्यवस्था को व्यर्थ बता रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके जरिये वे अपना ही रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे हैं।
मनमोहन सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि गरीबी उन्हीं की दी हुई विरासत है और उनकी बेदाग छवि के बावजूद उनके कार्यकाल में कई सारे घोटाले हुए। ये लोग कह रहे हैं कि तकरीबन 50 फीसदी आबादी गरीब है। मुझे ताज्जुब होता है कि वह (मनमोहन) इस दुर्दशा को स्वीकार करते हुए अपना ही रिपोर्ट कार्ड क्यों बता रहे हैं। वह दो बार प्रधानमंत्री रहे और उससे पहले एक बार वित्त मंत्री। सन 1970 से वह प्रमुख पदों पर कार्यरत रहे हैं।’
मैंने तो नहीं उखाड़े बिजली खंभे
चिदंबरम ने कहा था कि भारत में लगभग आधे से ज्यादा गांवों में बिजली नहीं पहुंची है इसलिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की व्यापक स्वीकार्यता संभव नहीं है। इस पर मोदी ने चुटकी ली, ‘इसमें किसकी गलती है? क्या मैंने बिजली के खंभे उखाड़ दिए और गांवों में बिजली के तार खींच डाले।’
खुद को काशी का बच्चा बताते हुए मोदी ने कहा, ‘इसके बावजूद मुझे खुशी है कि इस पवित्र भूमि की शक्ति ने मुझे काम करने की प्रेरणा दी है और विघ्नकारियों को अनजाने में ही अपनी विफलता स्वीकार करने के लिए बाध्य किया है।’