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Election 2017: यूपी में 'रामलहर' से बड़ी साबित हुई 'मोदीलहर'

Sat, 11 Mar 2017 01:42 PM IST
amarujala.com- Written by : अजय कुमार सिंह
amarujala.com- Written by : अजय कुमार सिंह Updated Sat, 11 Mar 2017 01:42 PM IST
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PM narendra Modi proved to be bigger than 'Ramlahar' in UP election 2017
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

यूपी विधानसभा चुनाव की काउंटिंग चल रही है। रुझानों में बीजेपी सभी पार्टियों को ध्वस्त करते हुए बहुत आगे चल रही है। बीजेपी को ऐसी बढ़त साल 1991 में मिली थी, लेकिन अभी जो रुझान मिल रहे हैं, वो 1991 की लहर को भी ध्वस्त कर दिया है। उस दौर को 'रामलहर' कहा जाता है, क्योंकि 1991 में राम जन्मभूमि आंदोलन के जरिए बीजेपी कड़े हिन्दुत्व के मुद्दे पर जनता के बीच चुनाव लड़ी थी। साल 1991 में बीजेपी ने इसी 'रामलहर' में 221 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार आंकड़ा पिछले हर आंकड़े को पीछे छोड़ता जा रहा है।  

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अटल विहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी उस समय देश में 'मंडल' की हवा के बीच 'कमंडल' लेकर निकली थी और 1991 में कल्याण सिंह के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। बीजेपी को उस चुनाव में 425 सीटें में से 221 सीटें मिली। कांग्रेस जहां 46 सीटों पर सिमट गई तो पूर्व पीएम वीपी सिंह की पार्टी जनता दल को 92 सीटें मिली थी। जनता पार्टी (चंद्रशेखर) 34 और बसपा 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। 
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1991 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 85 सीटों में से 51 सीटों पर जीत हासिल की थी।  जनता दल जो कि पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ी थी वो 22 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्व पीएम चंद्रशेखर की जनता पार्टी ने चार सीटों पर और कांग्रेस 5 सीटों पर जीत पायी थी। उस समय उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था।

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'मोदी लहर' से कैसे पीछे छूट गई 'राम लहर'

PM narendra Modi proved to be bigger than 'Ramlahar' in UP election 2017

आपको बता दें कि ये वो दौर था जब देश में मंडल की राजनीति का उभार हुआ था। जनता दल कई राज्यों में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, लेकिन यूपी चुनाव में मंडल की राजनीति कमंडल के आगे बौना साबित हो गई और कल्याण सिंह के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। अटल बिहारी वाजपेयी का चेहरा उस दौर में नरेंद्र मोदी से कम लोकप्रिय नहीं था। ध्यान दें कि वो समय सोशल मीडिया और टेलीविजन के प्रसार का नहीं था। फिर भी अटल-आडवाणी की जोड़ी लोगों की जुबां पर दर्ज हो गई थी। राम जन्मभूमि आंदोलन ने बीजेपी को जिंदा करने में अहम भूमिका निभाई थी। यूपी की राजनीति से धीरे-धीरे बीजेपी देश भर में फैलने लगी और कांग्रेस यहीं से सिमटने लगी। खासकर हिन्दी पट्टी राज्यों में बीजेपी लगातार बढ़ती गई। 

 

प्रदेश में 2007 से पहले 1991 में चली ‘राम लहर’ के बीच हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 211 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उसके बाद करीब 16 साल तक प्रदेश में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। यहां गठजोड़ की ही सरकारें गठित हुईं। 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश का सिलसिला टूटा और बसपा 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ सत्तासीन हुई। 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने सपा के सिर पूर्ण बहुमत की सरकार का ताज सजाया।

पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व ने यूपी में फिर वहीं सिक्का जमाया, जो राम लहर में अटल-आडवाणी की जोड़ी ने की थी। लोकसभा की 80 सीटों में से बीजेपी 73 सीटों पर जीत दर्ज की। 1991 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 85 सीटों में से 51 सीटें ही जीत पाई थी। उस समय उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था। यानि 'मोदी लहर' लोकसभा चुनाव में ही 'राम लहर' के किले को ध्वस्त कर दिया था।

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