'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण, पीएम बोले- क्या महापुरुषों को याद करना अपराध है?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Updated Wed, 31 Oct 2018 10:52 AM IST
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PM Modi - फोटो : ANI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया। यह देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में तैयार 182 मीटर ऊंची प्रतिमा है। इसकी ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी है। इसके निर्माण में 70,000 टन सीमेंट, 18,500 टन मजबूत लोहा, 6,000 टन स्टील और 3,550 टन कांसे का प्रयोग किया गया है। 
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इस दौरान पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि आज पूरा देश सरदार पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। नर्मदा के तट पर आज हम सभी खुश हैं। देशभर में कई लोग 'एकता के लिए दौड़' (रन फॉर यूनिटी) में भाग ले रहे हैं। आज का यह दिन भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। भारत के सम्मान के लिए समर्पित एक विराट व्यक्तित्व का उचित स्थान देने का और अपने इतिहास को उजागर करने का काम भारत के वर्तमान ने किया है। 
उन्होंने कहा कि आज के दिन को भारत के इतिहास में याद किया जाएगा। इस दिन को कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल पाएगा। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए एक नया इतिहास रचा है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का गगनचुंबी आधार भी रखा है। 

उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण करने का मौका मिला है। गुजरात के लोगों ने मुझे जो अभिनंदन पात्र दिया है, उसके लिए मैं गुजरात के लोगों का बहुत-बहुत आभारी हूं। आज मैं आपके यह सम्मान पत्र में आशीर्वाद की अनुभूति कर रहा हूं। 

सरदार पटेल के योगदान के कारण आज भारत एकजुट

पीएम ने कहा, 'दुनिया की ये सबसे उंची प्रतिमा पूरी दुनिया और हमारी भावी पीढ़ियों को सरदार साहब के साहस, सामर्थ्य और संकल्प की याद दिलाती रहेगी। सरदार पटेल के योगदान के कारण ही आज भारत एकजुट है। सरदार साहब का सामर्थ्य तब भारत के काम आया था, जब मां भारती साढ़े पांच सौ से ज्यादा रियासतों में बंटी थी। दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति घोर निराशा थी। निराशावादियों को लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से ही बिखर जाएगा।' 

उन्होंने कहा, 'सरदार पटेल ने तब 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था कि विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है। सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।' 
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