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PM मोदी के सलाहकार बोले: IIT खड़गपुर में हजार साल पुराना गुरुकुल का विचार, टीम इंडिया की तरह करना होगा काम
Fri, 19 Aug 2022 08:29 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 19 Aug 2022 08:29 PM IST
सार
पीएम के सलाहकार ने कहा, "हम किसी से टेक्नोलॉजी उधार नहीं ले सकते हैं और न ही उसका स्वदेशीकरण कर सकते हैं। हमें नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता है। हमें उस ज्ञान का निर्माता बनना है।"
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AMIT KHARE IAS
- फोटो : social media
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार अमित खरे ने आईआईटी खड़गपुर के 72वें स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोगों को खुद ही ज्ञान अर्जन करना चाहिए क्योंकि भारत बौद्धिक संपदा में महाशक्ति बनना चाहता है। खरे ने कहा कि हमें अपने इतिहास के ज्ञान को भविष्य के साथ जोड़ने की जरूरत है और इसमें आईआईटी जैसे संस्थानों की मुख्य भूमिका है।
'हमें बौद्धिक संपदा में महाशक्ति बनने की जरूरत'
उन्होंने आगे कहा, "हमारी सभ्यता सौ साल से ज्यादा पुरानी है। हमारे पास अतीत का ज्ञान है और हम इसे विकसित कर सकते हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों की मदद से इसका परीक्षण कर सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा, हम एक आईटी महाशक्ति हैं लेकिन हमें बौद्धिक संपदा में एक महाशक्ति बनने की जरूरत है।
'नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता'
खरे ने कहा, "हम किसी से टेक्नोलॉजी उधार नहीं ले सकते हैं और न ही उसका स्वदेशीकरण कर सकते हैं। हमें नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता है। हमें उस ज्ञान का निर्माता बनना है।" उन्होंने कहा कि जैव-विज्ञान और इंजीनियरिंग के बीच इंटरफेस के कारण ज्ञान के नए मोर्चे उभर रहे हैं जिनका उपयोग बड़े डेटा का पता लगाने के लिए नीतियों को तैयार करने में मदद करने के लिए किया जा रहा रहा है।
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'स्थानीय संस्थानों की मदद कर सकता है आईआईटी खड़गपुर'
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने आगे कहा, "हर संस्थान के साथ सामाजिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। आईआईटी खड़गपुर स्थानीय संस्थानों का सहयोग कर सकता है और स्थानीय विकास एवं तकनीकी सहायता प्रदान करके उनकी मदद कर सकता है।"
'उद्योग और समाज के बीच समान जागरूकता जरूरी'
उन्होंने कहा कि संस्थान और समाज के बीच एक जुड़ाव होना चाहिए। समाज को जिज्ञासा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उद्योग और समाज के बीच समान जागरूकता होनी चाहिए। शिक्षा, उद्योग और समाज की त्रिमूर्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में एक हजार साल पहले गुरुकुल का जो विचार था, वही आधुनिक दृष्टिकोण और नई तकनीक के साथ आज आईआईटी खड़गपुर में मौजूद है।
खरे ने कहा, यहां आपके पास एक ही परिसर में कुछ नया लाने के लिए एक टीम के रूप में सभी शिक्षक, कर्मचारी, पूर्व एवं वर्तमान छात्र हैं। टीम इंडिया के रूप में हमे एक साथ काम करना होगा और देश के लिए प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में काम करने के लिए आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों को प्रोत्साहित करना होगा।
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'हमें बौद्धिक संपदा में महाशक्ति बनने की जरूरत'
उन्होंने आगे कहा, "हमारी सभ्यता सौ साल से ज्यादा पुरानी है। हमारे पास अतीत का ज्ञान है और हम इसे विकसित कर सकते हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों की मदद से इसका परीक्षण कर सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा, हम एक आईटी महाशक्ति हैं लेकिन हमें बौद्धिक संपदा में एक महाशक्ति बनने की जरूरत है।
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'नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता'
खरे ने कहा, "हम किसी से टेक्नोलॉजी उधार नहीं ले सकते हैं और न ही उसका स्वदेशीकरण कर सकते हैं। हमें नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता है। हमें उस ज्ञान का निर्माता बनना है।" उन्होंने कहा कि जैव-विज्ञान और इंजीनियरिंग के बीच इंटरफेस के कारण ज्ञान के नए मोर्चे उभर रहे हैं जिनका उपयोग बड़े डेटा का पता लगाने के लिए नीतियों को तैयार करने में मदद करने के लिए किया जा रहा रहा है।
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'स्थानीय संस्थानों की मदद कर सकता है आईआईटी खड़गपुर'
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने आगे कहा, "हर संस्थान के साथ सामाजिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। आईआईटी खड़गपुर स्थानीय संस्थानों का सहयोग कर सकता है और स्थानीय विकास एवं तकनीकी सहायता प्रदान करके उनकी मदद कर सकता है।"
'उद्योग और समाज के बीच समान जागरूकता जरूरी'
उन्होंने कहा कि संस्थान और समाज के बीच एक जुड़ाव होना चाहिए। समाज को जिज्ञासा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उद्योग और समाज के बीच समान जागरूकता होनी चाहिए। शिक्षा, उद्योग और समाज की त्रिमूर्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में एक हजार साल पहले गुरुकुल का जो विचार था, वही आधुनिक दृष्टिकोण और नई तकनीक के साथ आज आईआईटी खड़गपुर में मौजूद है।
खरे ने कहा, यहां आपके पास एक ही परिसर में कुछ नया लाने के लिए एक टीम के रूप में सभी शिक्षक, कर्मचारी, पूर्व एवं वर्तमान छात्र हैं। टीम इंडिया के रूप में हमे एक साथ काम करना होगा और देश के लिए प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में काम करने के लिए आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों को प्रोत्साहित करना होगा।