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मोदी दुनिया के बेस्ट पीएम? जानें सच

Mon, 12 Dec 2016 04:39 PM IST
BBC
BBC Updated Mon, 12 Dec 2016 04:39 PM IST
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PM Modi world's best? know the truth

यदि आप भोलेपन के साथ ऑनलाइन ख़बरें पढ़ते हैं तो थोड़ा सतर्क रहने की ज़रूरत है। जिन चीज़ों को ऑनलाइन वायरल किया जाता है, उस पर कहीं आप भी आंख बंद कर भरोसा तो नहीं कर लेते? यदि ऐसा है तो सनसनीखेज ख़बरों को पढ़ते वक्त और लोगों से साझा करते वक्त थोड़ा सब्र रखें।

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2016 में वायरल हुईं ख़बरों का सच
जून 2016 के आसपास पीएम मोदी को लेकर एक मैसेज खूब वायरल हुआ। इसमें लिखा गया था कि यूनेस्को ने कुछ ही मिनट पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे बढ़िया प्रधानमंत्री घोषित किया है।
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इस खबर को फ़ेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप से लेकर हर तरह के सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसका पता लगाने के लिए अहमदाबाद के आरटीआई कार्यकर्ता ने पीएमओ से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी।
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आरटीआई में पूछा गया कि यूनेस्को का वो सर्टिफिकेट दिखाएं जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे बढ़िया पीएम बताया गया है। इसके अलावा यह भी पूछा गया कि किस तारीख को ऐसा ऐलान किया गया है और यूनेस्को की आधिकारिक वेबलिंक शेयर करें।  इसके जवाब में पीएमओ ने बताया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं। प्रधानमंत्री कार्यालय के इस जबाब से ये साबित हो गया कि ये ख़बर महज अफ़वाह थी।

ख़बर चली- "सावधान, ब्रेकिंग न्यूज़- डोनल्ड ट्रंप गिरफ्तार

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इसी तरह एक और ख़बर चली- "सावधान, ब्रेकिंग न्यूज़- डोनल्ड ट्रंप गिरफ्तार। अगर आप दो पुलिस अधिकारियों को डोनल्ड ट्रंप को गिरफ्तार करने की तस्वीर अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर पाएं तो इस खबर को पढ़ने के लिए लिंक न खोलें, यह वायरस है। किसी ने क्लिक किया और उसके कंप्यूटर में वायरस फैल गया। कृपया इस जानकारी को फैलाएं।"

दैट्स नॉनसेंस डॉट कॉम के मुताबिक ऐसा मैसेज कई लोगों के पास आया था। इसमें डोनल्ड ट्रंप को गिरफ़्तार होने की बात कही गई थी। सच तो यह है कि न ही डोनल्ड ट्रंप कभी गिरफ्तार हुए और न ही कभी ऐसा कोई वायरस आया। यह ख़बर पूरी तरह फ़र्जी निकली। कई मार्केटिंग कंपनी ऐसे लिंक के जरिए अपना प्रचार करने की कोशिश करती है। ऐसे फ़र्जी लिंक और मैसेज से बचना ज़रूरी है।

साल 2016 के लिए इस फोटो को नेशनल जियोग्रफिक का सबसे बढ़िया फोटो घोषित किया गया है। ट्विटर और व्हाट्सऐप पर इस तस्वीर के बारे में कई लोगों ने अपनी पसंद भी ज़ाहिर कर दी है। लेकिन अगर अब भी आप अनजान हैं तो अब जान लीजिए- यह तस्वीर फर्जी है।

गिज़्मोडो के अनुसार रूस के किसी डिज़ाइनर ने कई तस्वीरों को मिलाकर इस तस्वीर को तैयार किया है। जब इस तस्वीर को बड़ा करेंगे तो ये बात पता चल जाती है। इस तस्वीर के साथ नेशनल जियोग्रफिक के चीफ फोटोग्राफर बॉब बर्टन का नाम भी लिखा हुआ मिलेगा, लेकिन गिज़्मोडो की मानें तो इस नाम का कोई भी फ़ोटोग्राफर नेशनल जियोग्राफिक में काम ही नहीं करता है।

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वायरल फोटो

इस साल फ़ेसबुक लाइव के जरिए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें दिखाया गया कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के पास एक अंतरिक्ष यात्री को स्पेस वॉक करते हुए देखा जा सकता है। फेसबुक लाइव की लोकप्रियता की वजह से लाखों लोग इस वीडियो के ज़रिए बेवकूफ बने थे।

दैट्स नॉनसेंस डॉट कॉम के मुताबिक यह वीडियो लाइव नहीं था। यह 2013 में किए गए स्पेस वॉक का रिप्ले था। जब भी ऐसा स्पेस वॉक की योजना होती है तो नासा और इंटरनेश्नल स्पेस स्टेशन इस बात का ऐलान पहले ही कर देता है।

साल 2016 व्हाट्सऐप पर एक मैसेज शेयर किया गया जिसमें व्हाट्सऐप के डायरेक्टर कह रहे थे कि हमने अपनी कंपनी को फ़ेसबुक को बेच दिया है। इस मैसेज को 10 लोगों से शेयर करें ताकि आपका नया अकांउट एक्टिवेट हो जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो आपका व्हाट्सऐप अकाउंट बंद हो जाएगा।

इस तरह भी फैलाई गई अफवाह

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कई लोगों ने ऐप बंद होने के डर से ये मैसेज खूब फैलाया लेकिन ये खबर भी फर्जी निकली। असल में व्हाट्सऐप ने कभी ऐसा करने को नहीं कहा, ये सिर्फ किसी खुराफात दिमाग की उपज थी। ट्विटर के जरिए भी खूब अफवाहें फैलाई जाती हैं।  दैट्स नॉनसेंस डॉट कॉम के मुताबिक एक बार ट्विटर पर #RIPMileyCyrus ट्रेंड करने लगा।

कई लोगों ने इस बात का यकीन कर लिया कि अमरीकी पॉप सिंगर माइली सायरस का निधन हो गया है। लेकिन ये अफ़वाह ज्यादा देर तक नहीं टिकी, जल्द ही कई मीडिया रिपोर्ट से साबित हो गया कि माइली सायरस के निधन की खबर पूरी तरह झूठी है।

भारत में इस साल जेएनयू का मुद्दा राष्ट्रीय मीडिया में काफी छाया रहा। कुछ ख़ास वर्गों में जेएनयू को बंद करने की मांग उठने लगी। जेएनयू के विरोध में ये अफ़वाह फैलाई गई कि टाटा ग्रुप ने ये ऐलान किया है कि उनकी कंपनी जेएनयू के किसी छात्र को नौकरी नहीं देगी।

इसके बाद टाटा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए ये साफ किया गया कि उनकी कंपनी ने ऐसा कोई भी बयान जारी नहीं किया है. यह खबर भी पूरी तरह फ़र्जी निकली। स्मार्टफोन पर मैसेजिंग के फैलने से ऐसी अफवाहों को सच्चाई मानकर शेयर करने वालों की कमी नहीं हैं।  तो जब भी व्हाट्सऐप पर कुछ शेयर करते हैं तो एक बार उसके बारे में सोच ज़रूर लीजिएगा।

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