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President Election: राष्ट्रपति के गांव जाकर प्रधानमंत्री ने क्या दे दिया है संकेत कि दोबारा उम्मीदवार नहीं होंगे कोविंद!

Fri, 10 Jun 2022 07:27 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 10 Jun 2022 07:27 AM IST
सार

भाजपा के तमाम धुरंधर इसी आधार पर भविष्यवाणी कर रहे हैं कि अगला राष्ट्रपति भाजपा का ही होगा और वर्तमान महामहिम के दोबारा इस पद पर आने की संभावना कम है।

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PM Modi given indicating that Ram Nath Kovind will not be a candidate again
राष्ट्रपति चुनाव। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नया राष्ट्रपति कौन होगा ये 21 जुलाई को सामने आ जाएगा। चुनाव आयोग ने नए राष्ट्रपति के चुनाव की तारीख 18 जुलाई तय की है और नतीजे के लिए इसके तीन दिन बाद की तारीख घोषित की है।

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राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की अगवानी प्रोटोकॉल तोड़कर की
चुनाव आयोग की इस घोषणा से छह दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कानपुर गए और खास तौर पर महामहिम रामनाथ कोविंद के बुलावे पर उनके गांव परौंखा जाकर उन्हें अभूतपूर्व सम्मान भी दिया। राष्ट्रपति कोविंद ने प्रधानमंत्री की अगवानी प्रोटोकॉल तोड़कर की और प्रधानमंत्री मोदी ने भी राष्ट्रपति के साथ अपनी आत्मीयता को दिल की गहराइयों से बताया।
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भाजपा के तमाम धुरंधर इसी आधार पर भविष्यवाणी कर रहे हैं कि अगला राष्ट्रपति भाजपा का ही होगा और वर्तमान महामहिम के दोबारा इस पद पर आने की संभावना कम है। कांग्रेस के राजनीतिक पंडितों को भी इसी तरह का आभास है। हालांकि एक केंद्रीय मंत्री का कहना है कि भाजपा में हर बड़ा निर्णय आम राय से और संसदीय बोर्ड में होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस दिशा में मार्ग दर्शन महत्वपूर्ण होता है।
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वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दलित जाति से हैं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू आंध्र प्रदेश के कायस्थ परिवार से ताल्लुक रखते हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वह बिहार के राज्यपाल थे। ऐसे में लगभग सभी राजनीतिक पंडित दो तथ्यों को प्रमुखता दे रहे हैं। पहला, महामहिम कोविंद को दूसरी बार चुनाव लड़ाए जाने की संभावना कम है। हालांकि दूसरे कार्यकाल को लेकर भी सभी का मानना है कि जो प्रधानमंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री चाहेंगे, वहीं होगा। दूसरा तथ्य यह है कि राष्ट्रपति को दूसरी बार उम्मीदवार न बनाने की दशा में नए उम्मीदवार के तौर पर किसी महादलित, आदिवासी अथवा महिला को भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए उम्मीदवार बना सकता है। भाजपा मुख्यालय के पांचवे तल पर बैठने वाले एक प्रमुख नेता का कहना है कि पार्टी ने बड़े और योग्य नेताओं की कोई कमी नहीं है। इस बारे में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व विचार करके फैसला करेगा। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अभी कोई निष्कर्ष निकालना  या अनुमान लगाना ठीक नहीं है।


कांग्रेस और विपक्ष में भी उम्मीदवार को लेकर असमंजस
राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा हो गई है, लेकिन विपक्ष के उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति बहुत साफ नहीं है। हालांकि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री का कहना है कि विपक्ष का साझा उम्मीदवार होना चाहिए। वह कहते हैं कि विपक्ष के पास कद वाले नेता हैं। लेकिन बड़ा सवाल विपक्ष में एकता का है। तृममूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी, एनसीपी के शरद पवार, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, डीएमके के स्टालिन, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, बसपा की नेता मायावती समेत तमाम की सोच बमुश्किल एक लाइन पर आ पा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में पिछले कई साल से बिहार का राष्ट्रीय जनता दल अपना स्टैंड स्पष्ट करने में कोई देर नहीं लगाता। सत्ताधारी दल विपक्ष में इस बिखराव का अपने हित में बखूबी इस्तेमाल करने में सफल हो जाता है।

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