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पीएम ने कहा- कोरोना के खिलाफ जीवन-मृत्यु की इस लड़ाई में भौतिक दूरी बढ़ाएं, मन की नहीं
Sun, 29 Mar 2020 12:07 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Sun, 29 Mar 2020 12:07 PM IST
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नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन का फैसला किया। इसके बाद से पूरे देश में जरूरी सेवाएं को छोड़कर बाकी सभी पर ताला लग गया। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को 'मन की बात' में देश की जनता से इसके लिए माफी मांगी है।
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उन्होंने संवेदना जताते हुए कहा कि लोगों की परेशानी के लिए वो देशभर की जनता से माफी मांगते हैं। पीएम ने कहा कि दुनिया के हालात को देखने के बाद लगता है कि आपके पूरे परिवार को इस महामारी से सुरक्षित रखने के लिए बस यही एक रास्ता बचा है। बहुत से लोग नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सभी को घरों में बंद कर रखा है। आपको जो भी इससे असुविधा हुई है, इसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं।
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इस लड़ाई में हमें जीतना है
लॉकडाउन के बाद से देशभर भावुक करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। शहरों मे काम ठप होने से दिहाड़ी मजदूर पैदल ही अपने गांवों के लिए निकल पड़े हैं। लोग हजार किलोमीटर की भी दूरी की परवाह किए बिना छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल चल रहे हैं। मीडिया में लगातार ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो बेहद संवेदनशील हैं।
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पीएम मोदी ने कहा कि मैं आपकी परेशानी समझता हूं। देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए ये कदम उठाए बिना कोई रास्ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ लड़ाई, जीवन और मृत्य के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है।
डॉक्टरों का त्याग, तपस्या और समर्पण
भारत में ऐसी स्थिति न आए इसके लिए ही हमें निरंतर प्रयास करना है। आज जब मै डाक्टरों का त्याग, तपस्या, समर्पण देख रहा हूं तो मुझे आचार्य चरक की कही हुई बात याद आती है। आचार्य चरक ने डाक्टरों के लिए बहुत सटीक बात कही है। मैं जानता हूं कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता, लेकिन कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं क्योंकि अभी भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे। अगर आप 21 दिनों के लॉकडाउन का नियम तोड़ेंगे तो वायरस से बचना मुश्किल होगा।
खराब व्यवहार करना जायज नहीं
आपने देखा होगा, बैंकिंग सेवाओं को सरकार ने चालू रखा है और बैंकिंग-क्षेत्र के लोग पूरे मन से इस लड़ाई का नेतृत्व करते हुए आपकी सेवा में मौजूद हैं। आज के समय, ये सेवा छोटी नहीं है। कई लोगों ने वायरस के कोई लक्षण नहीं होने पर भी खुद को क्वारंटीन (एकांतवास) किया। ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे विदेश से लौट करके आए हैं, इसलिए जब लोग खुद इतनी जिम्मेदारी दिखा रहे हैं तो उनके साथ खराब व्यवहार करना जायज नहीं है।
सोशल डिस्टेंसिग का मतलब भौतिक दूरी है, मन की दूरी नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की कि सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब भौतिक दूरी को बढ़ाना और भावनात्मक दूरी को घटाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का अर्थ एक दूसरे से मन की दूरी बनाना नहीं बल्कि भौतिक दूरी को बरकरार रखते हुए संक्रमण को दूसरों में फैलने से रोकना और संक्रमण से खुद को बचाना भी है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ किसी संक्रमित व्यक्ति या संक्रमण के संदिग्ध व्यक्ति को दुत्कारना नहीं है।