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प्लैट खरीदार बिल्डर कंपनी के खिलाफ कर सकता है दिवालियापन प्रक्रिया की शुरुआत
Wed, 03 Apr 2019 02:07 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 03 Apr 2019 02:07 AM IST
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नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने प्लैट खरीदार को फाइनेंशियल क्रेडिटर मानते हुए कहा कि वह बिल्डर कंपनी के खिलाफ कारपोरेट इंसॉल्वेंसी रेजुलेशन (दिवालियापन प्रस्ताव) प्रक्रिया की शुरुआत कर सकता है। एनसीएलटी के अध्यक्ष एमएम कुमार और सदस्य प्रदीप आर राठी की पीठ ने फ्लैट खरीदार रविंदर कुमार पथेला को फाइनेंसियल क्रेडिटर मानते हुए उसके उस आवेदन को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अल्मेंड इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिवालियापन प्रस्ताव प्रक्रिया की शुरुआत करने की इजाजत मांगी थी।
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एनसीएलटी ने इस मामले में जुगराज सिंह बेदी को अंतरिम रेजुलेशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया है। बिल्डर कंपनी से आईआरपी को हर तरह का सहयोग और मदद करने का निर्देश दिया गया है। इसमें किसी तरह की कोताही बरतने पर आईआरपी उचित आदेश के लिए एनसीएलटी के पास आवेदन दाखिल कर सकते हैं। बिल्डर ने गुड़गांव के सेक्टर-109 के एक प्रोजेक्ट के लिए ‘बाय बैक ऑफर’ निकाला था।
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रविंदर ने इस ऑफर में दिलचस्पी दिखाते हुए 1750 वर्गफीट के एक फ्लैट खरीदने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि इस फ्लैट के लिए उसने बिल्डर को 1.46 करोड़ रुपये दिए। इसके बाद दोनों के बीच 2014 में करार हुआ। करार के मुताबिक, कंपनी ने उसके द्वारा दी गई रकम पर कोई ब्याज नहीं दिया। इतना ही नहीं, फ्लैट वापस खरीदने के करार का भी उल्लंघन किया।
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रविंदर ने कंपनी पर 1.76 करोड़ रुपये 18 फीसदी ब्याज के साथ दावा ठोका। जवाब में कंपनी ने प्रारंभिक तौर पर यह आपत्ति जताई कि इसे मध्यस्थता के लिए भेजा जाना चाहिए। साथ ही कंपनी का यह कहना था कि प्लैट खरीददार रविंदर सही मंशा के साथ एनसीएलटी नहीं आए हैं। रविंदर ने यह बात छुपाई कि उसने आईसीआईसीआई से होम लोन लिया था और संपत्ति को बैंक को गिरवी रखा है।
लेकिन एनसीएलटी ने तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए फ्लैट खरीददार को फाइनेंशियल क्रेडिटर मानते हुए कहा है कि वह बिल्डर कंपनी के खिलाफ कारपोरेट इंसॉल्वेंसी रेजुलेशन प्रक्रिया की शुरुआत कर सकता है।