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तीन लाख परिवारों से मिलकर कांग्रेस के लिए रास्ता बनाएगी पीके की टीम

Fri, 09 Sep 2016 03:39 AM IST
यशोदा श्रीवास्तव/ अमर उजाला, गोरखपुर
यशोदा श्रीवास्तव/ अमर उजाला, गोरखपुर Updated Fri, 09 Sep 2016 03:39 AM IST
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PK's team will meet 3 lac families in UP
- फोटो : amar ujala

यूपी की जनता से दूर हुई कांग्रेस उनसे जुड़ने के लिए बेताब है। राहुल की किसान यात्रा या खाट सभा का निहितार्थ यही है। पूर्वांचल में शुरू उनकी यात्रा का अभी तक का जो निष्कर्श सामने आया है, वह मात्र इतना की यह कांग्रेस का अपनी जमीन तलाशने की कवायद भर है। लोग जुड़ रहे हैं और उन्हें सुन रहे है।

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पहले भी ऐसा होता रहा है लेकिन यूपी के चुनाव में इसका असर पिछले 27 सालों में नहीं दखा गया। इस बार कांग्रेस के चुनाव की कमान पीके ने संभाल रखी है। उनकी टीम के करीब 20 हजार लोग पूर्वांचल में कांग्रेस की जमीन तैयार करने के लिए सक्रिय हैं। एक जिले से कम से कम तीन लाख लोगों से मिलने का लक्ष्य है।
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पीके टीम के सदस्य विकास सिंह की मानें तो यह लक्ष्य नहीं, उन परिवारों से मिलना ही है। इसके लिए अलग अलग जिलों में करीब 4500 की टीम सक्रिय है। पीके की जो चुनावी रणनीति है, वह बहुत आसान नहीं है। खासकर कांग्रेस के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए जो एसी में बैठकर कांग्रेस को सत्ता दिलाने की ढकोसलेबाजी किया करते थे। ऐसे नेताओं के दिन लद गए हैं।

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जिलेवार जो 4500 की टीम तैयार की गई

PK's team will meet 3 lac families in UP

जिलेवार जो 4500 की टीम तैयार की गई है वे बूथ लेवल के हैं। एक कार्यकर्ता को एक दिन में दस परिवार से मिलना है। तय प्रोफार्मा के हिसाब से उस परिवार से बात करनी है। और उसके मर्जी से उसपर हस्ताक्षर कारवाने हैं। इस प्रोफार्मा पर यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का एजेंडा है।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। यूपी में कांग्रेस को धरातल पर कैसे लाया जाय इसके लिए फरवरी से एक्सरसाइज जारी था। कहा कि मुद्दा तो बहुत है। लेकिन सबसे ज्वलंत मुद्दा किसानों के कर्ज माफी का है। इसे लेकर देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। प्रदेश हो या देश की सरकारें किसानों के बारे में लंबी लंबी बातें करती रही हैं। उन्हें अन्नदाता जैसे सम्मोहक शब्दों से लुभाया जाता है।

लेकिन जब उनके उद्धार की बात होती है तो यही नेता कन्नी काट जाते हैं। जो सहूलियतें किसानों को मिलनी चाहिए,वे उद्योगपतियों के हिस्से में चली जाती है। कांग्रेस ने किसानों के कर्ज पर ध्यान दिया है। युपीए की पिछली सरकार ने देश भर के किसानों का 70 हजार करोड़ कर्ज माफ किया है। वे चाहे गरीब किसान रहे हों या अमीर। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी और बिजली बिल की समस्या से किसान सीधे जुड़ा हुआ है। कांग्रेस उनके हित की बात कर रही है।

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