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Hindi News ›   India News ›   PIL petitioners must do their homework, cant just ask for everything under sun: Supreme Court

नसीहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पीआईएल दायर करने वाले होमवर्क करें, उदाहरण भी दें, हर चीज नहीं मांग सकते

Mon, 27 Sep 2021 07:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 27 Sep 2021 07:24 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जनहित याचिआ दायर करने वालों को अच्छी तैयारी के बाद ही आने की नसीहत दी।

 

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PIL petitioners must do their homework, cant just ask for everything under sun: Supreme Court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

हर मामले में पीआईएल लेकर सुप्रीम कोर्ट की दौड़ लगाने वालों को शीर्ष अदालत ने कहा कि वे मामले का होमवर्क अवश्य करें और ध्यान में रखें कि वे हर चीज की मांग नहीं कर सकते।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी नीति को लेकर याचिका दायर करने पर उसमें कमी बताना जनहित याचिकाकर्ता का दायित्व है। याचिका में कुछ आंकड़े और उदाहरण भी होना चाहिए। याचिकाकर्ता हर बात अदालत या सरकार पर नहीं छोड़ सकता।
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इस नसीहत के साथ ही जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति- 2017 को लागू करने, कोरोना से मृत लोगों के आश्रितों के लिए आजीविका की व्यवस्था करने और अन्य निर्देश देने की मांग की गई थी। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि किसी नीतिगत मामले में खामियां बताना पीआईएल याचिकाकर्ता का दायित्व है। खामियों बताने के साथ कुछ आंकड़े और उदाहरण भी पेश किए जाना चाहिए।
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नई याचिका दायर करने का निर्देश
उक्त याचिका सुनने से इनकार करने के साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपने दावे के समर्थन में आंकड़े व उदाहरण के साथ नई याचिका दायर करे। कोर्ट ने कहा कि पीआईएल के साथ समस्या यह है कि आप कई मांगें करते हैं। एक मांग करें तो हम इससे निपट सकते हैं, लेकिन आप हर चीज की मांग करने का दावा करते हैं। याचिकाकर्ता हर चीज अदालत या सरकार पर नहीं छोड़ सकता। नीति के अमल में कमी को दर्शाने वाले उदाहरण या आंकड़े तो दिखाने होंगे।


एक मामले के आधार पर देशभर के लिए निर्देश नहीं दे सकते
याचिकाकर्ता सी. अंजी रेड्डी की ओर से पेश वकील श्रवण कुमार ने कोर्ट से कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के रमेश का उदाहरण दिया है। रमेश ने कोरोना महामारी के दौरान निर्धन और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए मुफ्त और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में अस्पताल में भर्ती होने पर लाखों रुपये खर्च किए। पीठ ने कहा कि आपको उचित याचिका और उचित मांग के साथ अदालत में आना चाहिए। हम आंध्र प्रदेश के एक रमेश कुमार के मामले के आधार पर देशभर के लिए निर्देश नहीं दे सकते। उनके बारे में दी गई जानकारी का स्रोत क्या है?

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