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नीलगाय को ‘हिंसक पशु’ करार देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Wed, 15 Jun 2016 08:36 PM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Jun 2016 08:36 PM IST
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petition in the Supreme Court agaisnt declaring Nilgai as a violent animal
फाइल फोटो

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में एक वर्ष के लिए नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को ‘हिंसक पशु की श्रेणी में डालने संबंधी केंद्र सरकार के तीन अधिसूचनाओं को निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।

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बुधवार को न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार की गई। पीठ ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए कहा कि इसी हफ्ते याचिका पर सुनवाई होगी। याचिका गौरी मुलेखी की ओर से दायर की गई है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पीठ से कहा कि केंद्र सरकार को इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जानवरों को मारने के लिए लोग भाड़े पर रखे जा रहे हैं।
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-कोर्ट ने स्वीकार की याचिका, इसी सप्ताह होगी सुनवाई
- बिहार, उत्तराखंड और हिमाचल में क्रमश: नीलगाय, जंगली सुअर व बंदरों को डाला गया है ‘हिंसक जानवरों’ की सूची में


गत वर्ष एक दिसंबर को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बिहार के कुछ जिलों में एक साल के लिए नीलगाय और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया गया था। वहीं, तीन फरवरी, 2016 को मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर एक साल के लिए उत्तराखंड के कुछ जिलों में जंगली सुअर को हिंसक पशुओं की श्रेणी में डाल दिया था।

जबकि गत 24 मई को जारी तीसरी अधिसूचना में एक वर्ष के लिए हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में बंदर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया था। याचिका में कहा गया कि बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक सर्वेक्षण के इस तरह की अधिसूचनाएं जारी नहीं की जानी चाहिए।


एक बार अगर किसी जानवर को हिंसक पशुओं की श्रेणी में डाल दिया गया तो जंगली जानवर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मिलने वाले संरक्षण से महरूम हो जाता है।

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