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जनहित में न हो तो RTI के तहत निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 03 Sep 2017 05:13 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि किसी कर्मचारी की निजी जानकारियां तब तक आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं, जब तक कि वह जनहित से जुड़ा हुआ न हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से निजता पर अतिक्रमण होगा।
न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे ने केनरा बैंक के एक कर्मचारी द्वारा किसी व्यक्ति की नौकरी ज्वाइन करने की तारीख, उसे पद और ट्रांसफर आदेशों से संबंधित जानकारी मांगे जाने को अत्यंत ही अनुचित करार दिया है।
पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समझ आएगा क्या होता है "डू नॉट डिस्टर्ब"
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पीठ ने इसके लिए वर्ष 2013 में दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को आधार बनाया है। इन फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इनकम टैक्स रिटर्न में किसी व्यक्ति द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी को आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर वह जानकारी जनहित से जुड़ा हो तो जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
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न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे ने केनरा बैंक के एक कर्मचारी द्वारा किसी व्यक्ति की नौकरी ज्वाइन करने की तारीख, उसे पद और ट्रांसफर आदेशों से संबंधित जानकारी मांगे जाने को अत्यंत ही अनुचित करार दिया है।
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पीठ ने इसके लिए वर्ष 2013 में दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को आधार बनाया है। इन फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इनकम टैक्स रिटर्न में किसी व्यक्ति द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी को आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर वह जानकारी जनहित से जुड़ा हो तो जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।