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दुर्लभ बीमारी की सूची और इलाज के लिए तैयार होगी पॉलिसी, सरकार ने की बैठक
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 14 Oct 2016 03:39 AM IST
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देश में कौन सी बीमारी को दुर्लभ माना जाए और उसके इलाज के लिए क्या तौर-तरीका होना चाहिए। इलाज पर होने वाला खर्च सरकार वहन करे या मरीज को अपने स्तर से इलाज पर खर्च करना होगा। इन सब बातों को लेकर बृहस्पतिवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में एक बैठक हुई।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दुर्लभ बीमारियों में कौन-कौन सी बीमारी को शामिल किया जाए और इन बीमारियों के इलाज की रुपरेखा क्या होनी चाहिए इस पर चर्चा हुई। संभव है कि थैलीसीमिया, गौचर, डाउन सिंड्रोम सहित कुछ अन्य दुर्लभ और अनुवांशिक बीमारियों को दुर्लभ बीमारियों की श्रेणी में रखा जाए। देश के अलग-अलग राज्यों में और कौन सी दुर्लभ बीमारियां ज्यादा है इस पर भी चर्चा हुई। दरअसल, दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित कई मरीज इलाज में होने वाले खर्च को वहन नहीं कर पाने की वजह से अदालत पहुंच चुके हैं, जिसके बाद अदालत ने मंत्रालय से इस संबंध में सवाल-जवाब की है।
मंत्रालय की सूत्रों की माने तो दुर्लभ बीमारियों पर स्वास्थ्य मंत्रालय इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से भी राय मांगेगी कि कौन-कौन सी ऐसी दुर्लभ बीमारी है जिसकी रोकथाम की जा सकती है। इसके लिए किस तरह का प्रोग्राम चलाया जाना चाहिए जिससे मरीजों की संख्या को कम किया जा सके और बीमारी को गंभीर होने से भी रोका जा सके।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दुर्लभ बीमारियों में कौन-कौन सी बीमारी को शामिल किया जाए और इन बीमारियों के इलाज की रुपरेखा क्या होनी चाहिए इस पर चर्चा हुई। संभव है कि थैलीसीमिया, गौचर, डाउन सिंड्रोम सहित कुछ अन्य दुर्लभ और अनुवांशिक बीमारियों को दुर्लभ बीमारियों की श्रेणी में रखा जाए। देश के अलग-अलग राज्यों में और कौन सी दुर्लभ बीमारियां ज्यादा है इस पर भी चर्चा हुई। दरअसल, दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित कई मरीज इलाज में होने वाले खर्च को वहन नहीं कर पाने की वजह से अदालत पहुंच चुके हैं, जिसके बाद अदालत ने मंत्रालय से इस संबंध में सवाल-जवाब की है।
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मंत्रालय की सूत्रों की माने तो दुर्लभ बीमारियों पर स्वास्थ्य मंत्रालय इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से भी राय मांगेगी कि कौन-कौन सी ऐसी दुर्लभ बीमारी है जिसकी रोकथाम की जा सकती है। इसके लिए किस तरह का प्रोग्राम चलाया जाना चाहिए जिससे मरीजों की संख्या को कम किया जा सके और बीमारी को गंभीर होने से भी रोका जा सके।
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