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पांच राज्यों में जीत की पहली सीढ़ी तो टिकट बंटवारा है, घमासान तय

Mon, 08 Oct 2018 08:36 PM IST
शशिधर पाठक, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
शशिधर पाठक, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 08 Oct 2018 08:36 PM IST
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path of victory in five states is Ticket distribution, tough fight ahead 
assembly election 2018

म.प्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। इनमें से तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और म.प्र. के चुनाव नतीजे 2019 का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं। 

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इन सभी राज्यों में प्रत्याशियों के टिकट का बंटवारा ही पहली सीढ़ी है और भाजपा तथा कांग्रेस जैसी दोनों पाटियों के खेमे में घमासान होना तय माना जा रहा है। भाजपा को जहां राजस्थान और म.प्र. में टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी की चिंता सता रही है, वहीं कांग्रेस के खेमे में तीनों राज्यों को लेकर इस संकट की आहट महसूस की जा रही है। 
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भाजपा ने विकसित किया है एक तंत्र

हालांकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर एक तंत्र विकसित कर रखा है। इसमें जिताऊ उम्मीदवार, राष्ट्रीय स्वयं सेवक या उसके अनुषांगिक संगठन में काम करने वाला प्रत्याशी या फिर भाजपा का कार्यकर्ता पहली प्राथमिकता में रहता है।
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इसके लिए बूथ स्तर से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक पार्टी जमीनी तैयारी और रिपोर्ट को प्राथमिकता देती है, लेकिन इसके बाद चुनाव लड़ने की कतार में खड़े कार्यकर्ताओं को टिकट न मिल पाने पर नाराजगी की पूरी गुंजाइश है। इसी तरह भाजपा ने उ.प्र. से लेकर पिछले कई चुनावों में दूसरे दलों के बागियों को सम्मान से टिकट दिया है। बागी जीते भी हैं। 

भाजपा के सामने एक बड़ा संकट तीनों राज्यों में वसुंधरा राजे, रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान समर्थकों को संतुष्ट करना भी है। राजस्थान में वसुंधरा के समर्थक उनके इशारे पर नाचते हैं। वसुंधरा टिकट बंटवारे में अपनी अच्छी भूमिका चाहती हैं। वह जल्द घुटने भी नहीं टेकतीं।

इसके सामानांतर भाजपा अध्यक्ष ने वसुंधरा को भावी चेहरा घोषित करके चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथ में ले रखी है। इसका असर भी है। वसुंधरा विरोधी खेमा (अर्जुनराम मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत, भूपेन्द्र यादव, ओम माथुर समेत अन्य) राज्य में सत्ता में लौटने के लिए सक्रिय हो गया है। करणी सेना के लोकेन्द्र कालवी भी मेहनत कर रहे हैं। 

म.प्र. और छत्तीसगढ़ में शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री रमन सिंह का अपना राजनीतिक भविष्य है। दोनों ने तीन विधानसभा चुनाव जीतने में सफलता पाई है। दोनों ही मुख्यमंत्रियों को संघ का आशीर्वाद प्राप्त है और सबका मूल मंत्र पहले सत्ता में लौटना ही है।

कांग्रेसः समर्थकों में टकराव की गुंजाइश

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कांग्रेस - फोटो : twitter

कांग्रेस पार्टी के नेता कांग्रेस अध्यक्ष केवल राहुल गांधी हैं, लेकिन राहुल कोई फैसला लोकतांत्रिक तरीके से लेते हैं इसलिए प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और तीनों राज्यों के प्रभारियों पर काफी कुछ निर्भर करता है। इन्हीं में और इनके समर्थकों में टकराव की पूरी गुंजाइश है। 

पार्टी के सचिव विनीत पूनिया भी मानते हैं कि आप सभी को संतुष्ट नहीं कर सकते। सबसे बड़ी चुनौती म.प्र. में है। वहां कांग्रेस के तीन धुरंधर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व महासचिव दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्य में डटे हैं। 

इसके अलावा तमाम मझोले लेकिन प्रभावी नेता हैं। तीनों की बड़े नेताओं का पूरे प्रदेश में कुछ न कुछ प्रभाव है। इसे साधना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। दूसरी चुनौती राजस्थान है। राजस्थान में कांग्रेस अध्यक्ष ने अशोक गहलोत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। सचिन पायलट प्रदेश अध्यक्ष हैं। दोनों की आंख चिड़िया की एक आंख (मुख्यमंत्री की कुर्सी) पर टिकी है। 

सचिन उत्साह में रहते हैं तो अशोक गहलोत को मीठी छुरी कहा जाता है। गहलोत की पूरे प्रदेश में हर जाति, वर्ग, समुदाय पर पकड़ है। इसके अलावा तमाम छत्रप हैं। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहली प्राथमिकता तीनों प्रदेशों में कांग्रेस की सरकार बनानी है। छत्तीसगढ़ में म.प्र. और राजस्थान की तुलना में चुनौती कम है, लेकिन टिकट का बंटवारा बहुत आसान भी नहीं है। राज्य के प्रभारी पीएल पूनिया कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
 

लोकल कमांडर दुरुस्त तो हाथ में सत्ता की चाबी

कांग्रेस के म.प्र. के एक बड़े नेता का कहना है कि प्रत्याशी का चयन तो लोकल कमांडर के चयन जैसा है। वह सही है तो आधी जीत उसी समय तय हो जाती है। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग जैसी एक लोकतांत्रिक व्यवस्था है। इसलिए प्रत्याशी सही ही चुने जाएंगे। वहीं भाजपा ने एप से लेकर तमाम प्रयोग किए हैं। भाजपा मुख्यालय के नेताओं का कहना है कि 15 अक्टूबर के बाद अपने आप तस्वीर सामने आने लगेगी। 

15 अक्टूबर के बाद आएगी प्रत्याशियों की सूची

छत्तीसगढ़ में दो फेज में चुनाव होगा। पहले चरण का नामांकन 23 अक्टूबर से आरंभ होगा। ऐसे में 15 अक्टूबर के बाद से प्रत्याशियों के चयन की सूची बाहर आने की उम्मीद है। कांग्रेस पार्टी के सचिव विनीत पूनिया का भी कहना है कि प्रत्याशियों की सूची जारी होने में कम से कम दस दिन का समय लग सकता है। 

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