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बुलेट ट्रेन में ज्यादा सामान ले जाने पर देने होंगे पैसे, एनएचएसआरसीएल बना रही प्लान
Sun, 14 Jul 2019 09:03 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 14 Jul 2019 09:03 AM IST
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बुलेट ट्रेन के साथ शिंजो आबे-नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
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भारत की पहली सुपरफास्ट बुलेट ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को चेकइन करते समय अपने लगेज के लिए पैसे देने पड़ेंगे। यात्रियों को भारी भरकम लगेज (सामान) ले जाने से रोकने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने फैसला लिया है कि वह चेक इन करते समय लगेज का पैसा लेगा। यह संस्था मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना को अंजाम दे रही है।
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हर कोच के अंदर हैंड बैगेज के लिए पर्याप्त जगह होगी। हालांकि आखिरी कोच में कुछ सीटों को हटाया जा सकता है ताकि एक्सट्रा (अतिरिक्त) चेकइन लगेज के लिए जगह बनाई जा सके। जिसके लिए यात्रियों को एक्सट्रा पैसे देने होंगे। यह भारत की पहली बुलेट ट्रेन होगी। उम्मीद है कि इस ट्रेन का परिचालन 2022 से शुरू हो जाएगा। जापान में बुलेट ट्रेन को शिनकानसेन के नाम से जाना जाता है।
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बुलेट ट्रेन के शुरू होते ही भारत मे हाई स्पीड ट्रेनों के युग की शुरुआत हो जाएगी। जिसमें 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ सकेंगी। एनएचएसआरसीएल के अनुसार जापानी लोग यात्रा करते समय अपने साथ ज्यादा सामान नहीं ले जाते हैं। इस कारण उनके यहां चेक-इन लगेज के लिए कोई अतिरिक्त जगह नहीं है। मगर भारत के लिए इस ट्रेन को दोबारा डिजायन किया गया है ताकि लगेज के लिए जगह बनाई जा सके।
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एनएचएसआरसीएल के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने कहा, 'यह विचार खासतौर से यात्रियों को ज्यादा मात्रा में सामान लेकर यात्रा करने से हतोत्साहित करने के लिए है। इसपर किसी तरह का नियंत्रण किया जाना चाहिए। हमारा मकसद इससे पैसे कमाने का नहीं है। यदि मुफ्त में इसकी इजाजत दी जाएगी तो इसपर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। इसके अलावा हैंड लगेज और चेक-इन सामान के लिए निर्दिष्ट आयाम होंगे।'
नरेंद्र मोदी सरकार ने इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए 15 अगस्त, 2022 डेडलाइन घोषित की हुई है। इसी साल भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 साल पूरे करेगी। एनएचएसआरसीएल को हालांकि 2022 तक नेटवर्क के एक हिस्से को खोलने और दिसंबर 2023 तक इसे पूरा करने की उम्मीद है।
खरे ने कहा, 'शुरू में हमारे पास 24 ट्रेनों का सेट होगा जिसमें से 18 जापान से आएंगी। जबकि छह का निर्माण भारत में होगा। जब हम कहते हैं कि बुलेट ट्रेन का भारत में निर्माण होगा तो इसका मतलब यह नहीं है कि 100 प्रतिशत हिस्सा यहीं बनेगा क्योंकि अहम हिस्से जापान से आएंगे। शताब्दी ट्रेनों की तरह बुलेट ट्रेन के कोच में ओवरहेड बिन्स होंगे जिसमें हैंड बैगेज रखे जाएंगे।'
खरे ने आगे कहा, 'यह जापान से बिलकुल अलग है क्योंकि वहा भारी लगेज ले जाने की संस्कृति नहीं है। हम भारी सामान के लिए अलग से जगह बना रहे हैं। यात्रियों को अपने साथ हैंड बैगेज ले जाने की इजाजत होगी लेकिन जो लोग अपने साथ भारी भरकम सामान ले जाना चाहते हैं उन्हें एडवांस में बुकिंग करनी होगी। इसकी अवधारणा केबिन बैगेज और चेक-इन बैगेज की तरह होगी।'