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NEET Row: पेपर लीक नहीं हुआ तो क्यों रद्द हुई परीक्षा? संसदीय समिति ने NTA प्रमुख से पूछे सवाल; मिले ये जवाब
Thu, 21 May 2026 08:24 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 21 May 2026 08:24 PM IST
सार
NEET Row: संसदीय समिति की बैठक में सांसदों ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर एनटीएक के शीर्ष अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। एनटीए के डीजी अभिषेक सिंह ने कहा कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है। परीक्षा की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, एनटीए ने संसदीय समिति को क्या बताया, पढ़िए रिपोर्ट-
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नीट पेपर लीक मामला।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति की बैठक में गुरुवार को कई सांसदों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के शीर्ष अधिकारियों से कड़े सवाल किए। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि नीट-यूजी का पेपर उनके सिस्टम से लीक नहीं हुआ था और मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें शिक्षा सचिव विनीत जोशी भी शामिल थे। बैठक के दौरान सांसदों ने एनटीए से पूछा कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और पेपर लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों समेत एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी और महानिदेशक अभिषेक सिंह ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए एनटीए के डीजी
सूत्रों के अनुसार, जब सांसदों ने पूछा कि नीट-यूजी का पेपर कैसे लीक हुआ, तो एनटीए के महानिदेशक ने कहा कि यह लीक उनके सिस्टम से नहीं हुआ। इस पर कई सांसदों ने सवाल किया कि फिर पेपर लीक कैसे हुआ और परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की जरूरत क्यों पड़ी। एनटीए प्रमुख इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और उन्होंने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है।
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कुछ विपक्षी सांसदों ने जांच रिपोर्ट समिति के सामने रखने की मांग की। लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ सांसदों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी है और उसे अपना काम करने देना चाहिए।
एनटीए के अधिकारियों ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, एनटीए ने बताया कि राधाकृष्णन रिपोर्ट में सुझाए गए करीब 70 प्रतिशत अल्पकालिक सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि एक भरोसेमंद और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए व्यापक समीक्षा की जा रही है और पेपर सेटिंग व वितरण में भरोसेमंद लोगों को शामिल किया जा रहा है। एनटीए अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने पर विचार किया जा रहा है।
सांसदों ने उठाया कर्मचारियों की कमी का मुद्दा
सांसदों ने एनटीए में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। अधिकारियों ने बताया, एजेंसी में लगभग 25 फीसदी पद खाली हैं। इन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है, ताकि किसी भी तरह की खामी को दूर किया जा सके।
ये भी पढ़ें: 'मोदी जी ने न जिम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया', नीट लीक मामले में सरकार पर फिर बरसे राहुल गांधी
बैठक के बाद दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि समिति की कार्यवाही गोपनीय होती है और वह इस पर चर्चा नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बैठक बहुत अच्छी रही और सभी सदस्यों ने अपनी चिंताएं रखीं।
एनटीए अधिकारियों ने पहले बताया कि पेपर लीक और गड़बड़ियों को रोकने के लिए विस्तृत एसओपी और चेकलिस्ट तैयार कर राज्यों और जिलों के प्रशासन के साथ साझा की गई हैं और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।
22 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा
एनटीए ने समिति को बताया कि नीट-यूजी 2026 का आयोजन तीन मई को 5,432 केंद्रों पर 565 शहरों में हुआ था, जिनमें 14 विदेशी शहर भी शामिल थे। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी और 22.7 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 22.05 लाख परीक्षा में शामिल हुए थे।
राधाकृष्णन समिति ने कई सुधारों की सिफारिश की है, जिनमें प्रवेश परीक्षाओं का एकीकरण, कंप्यूटर आधारित परीक्षण की ओर धीरे-धीरे बढ़ना और एक राष्ट्रीय परीक्षण सुविधा बनाना शामिल है। दीर्घकालिक सुझावों में पेपर आधारित परीक्षा से कंप्यूटर आधारित परीक्षा की ओर बदलाव, कई सत्रों और कई चरणों में परीक्षा, प्रयासों की सीमा और आयु सीमा लागू करना शामिल है। इन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर लागू किया जाएगा।
एनटीए ने यह भी बताया कि क्लाउड आधारित प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग से परीक्षा को सुरक्षित बनाने की योजना है। एजेंसी के अनुसार, सात मई को उसे परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी मिली थी, जिसे आठ मई को केंद्रीय एजेंसियों को जांच के लिए भेज दिया गया। बाद में जांच के आधार पर नीट-यूजी को रद्द कर 21 जून को दोबारा कराने का फैसला लिया गया।
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बैठक में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें शिक्षा सचिव विनीत जोशी भी शामिल थे। बैठक के दौरान सांसदों ने एनटीए से पूछा कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और पेपर लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों समेत एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी और महानिदेशक अभिषेक सिंह ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
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सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए एनटीए के डीजी
सूत्रों के अनुसार, जब सांसदों ने पूछा कि नीट-यूजी का पेपर कैसे लीक हुआ, तो एनटीए के महानिदेशक ने कहा कि यह लीक उनके सिस्टम से नहीं हुआ। इस पर कई सांसदों ने सवाल किया कि फिर पेपर लीक कैसे हुआ और परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की जरूरत क्यों पड़ी। एनटीए प्रमुख इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और उन्होंने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है।
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कुछ विपक्षी सांसदों ने जांच रिपोर्ट समिति के सामने रखने की मांग की। लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ सांसदों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी है और उसे अपना काम करने देना चाहिए।
एनटीए के अधिकारियों ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, एनटीए ने बताया कि राधाकृष्णन रिपोर्ट में सुझाए गए करीब 70 प्रतिशत अल्पकालिक सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि एक भरोसेमंद और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए व्यापक समीक्षा की जा रही है और पेपर सेटिंग व वितरण में भरोसेमंद लोगों को शामिल किया जा रहा है। एनटीए अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने पर विचार किया जा रहा है।
सांसदों ने उठाया कर्मचारियों की कमी का मुद्दा
सांसदों ने एनटीए में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। अधिकारियों ने बताया, एजेंसी में लगभग 25 फीसदी पद खाली हैं। इन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है, ताकि किसी भी तरह की खामी को दूर किया जा सके।
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बैठक के बाद दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि समिति की कार्यवाही गोपनीय होती है और वह इस पर चर्चा नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बैठक बहुत अच्छी रही और सभी सदस्यों ने अपनी चिंताएं रखीं।
एनटीए अधिकारियों ने पहले बताया कि पेपर लीक और गड़बड़ियों को रोकने के लिए विस्तृत एसओपी और चेकलिस्ट तैयार कर राज्यों और जिलों के प्रशासन के साथ साझा की गई हैं और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।
22 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा
एनटीए ने समिति को बताया कि नीट-यूजी 2026 का आयोजन तीन मई को 5,432 केंद्रों पर 565 शहरों में हुआ था, जिनमें 14 विदेशी शहर भी शामिल थे। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी और 22.7 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 22.05 लाख परीक्षा में शामिल हुए थे।
राधाकृष्णन समिति ने कई सुधारों की सिफारिश की है, जिनमें प्रवेश परीक्षाओं का एकीकरण, कंप्यूटर आधारित परीक्षण की ओर धीरे-धीरे बढ़ना और एक राष्ट्रीय परीक्षण सुविधा बनाना शामिल है। दीर्घकालिक सुझावों में पेपर आधारित परीक्षा से कंप्यूटर आधारित परीक्षा की ओर बदलाव, कई सत्रों और कई चरणों में परीक्षा, प्रयासों की सीमा और आयु सीमा लागू करना शामिल है। इन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर लागू किया जाएगा।
एनटीए ने यह भी बताया कि क्लाउड आधारित प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग से परीक्षा को सुरक्षित बनाने की योजना है। एजेंसी के अनुसार, सात मई को उसे परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी मिली थी, जिसे आठ मई को केंद्रीय एजेंसियों को जांच के लिए भेज दिया गया। बाद में जांच के आधार पर नीट-यूजी को रद्द कर 21 जून को दोबारा कराने का फैसला लिया गया।