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PAK उच्चायोग के स्टॉफ का दावा- इसरो कर्मचारी देता था खुफिया जानकारी, पुलिस ने किया खारिज
amarujala.com- Written by: राघवेंद्र मिश्र
Updated Thu, 20 Apr 2017 09:32 AM IST
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महबूब अख्तर का फेक आईकार्ड
- फोटो : indian express
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जांच एजेंसियों में पिछले साल उस समय खलबली मच गई थी, जब दिल्ली पुलिस ने 26 अक्टूबर को पाकिस्तान उच्च आयोग के एक कर्मचारी महमूद अख्तर को जासूसी के आरोप में हिरासत में लिया था। उस पर आरोप था कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के एक अधिकारी से उसे कुछ संवेदनशील जानकारियां मिली थी।
महमूद अख्तर से पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इसरो के कई कर्मचारियों के प्रोफाइल की स्क्रूटनी की थी। लेकिन, कई महीनों की जांच के बाद पाया गया कि इसमें कोई भी कर्मचारी शामिल नहीं था। क्राइम ब्रांच के डीसीपी मधुर वर्मा के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, इस मामले में इसरो के किसी भी कर्मचारी के शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है, अख्तर को दिल्ली चिड़ियाघर के बाहर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उससे आईएससी के अधिकारियों और दूसरी जांच एजेंसियों ने चाणक्यपुरी ऑफिस में पूछताछ की थी। इसके बाद उसे उच्च आयोग को सौंप दिया गया था।
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45 मिनट की पूछताछ में अख्तर ने दावा किया था कि उसे पाकिस्तान उच्च आयोग में तैनात एक आईएसआई एजेंट और इसरो के अधिकारी ने कुछ संवेदनशील जानकारियां दी थी। इसके बाद इसकी जानकारी जांच अधिकारियों ने संबंधित विभागों को दे दी गई और कर्मचारियों की प्रोफाइल की स्क्रीनिंग शुरू हुई थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं पाया।
पुलिस ने इस मामले में एक सप्लिमेंटरी चार्जशीट फाइल की थी। इसमें उसने कहा कि सभी दस्तावेज को संबंधित एजेंसियों से सत्यापित कराया गया था।
डीसीपी वर्मा ने कहा, हमने पहले गिरफ्तार चार व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी, जिसमें समाजवादी पार्टी सांसद मुनव्वर सलीम का पर्सनल असिस्टेंट भी शामिल था। इस मामले में अथॉरिटीज से इन डॉक्युमेंट्स के क्लासिफाइड होने के बाद सप्लिमेंटरी चार्जशीट दायर किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कहा है कि दस्तावेजों में सर क्रीक, आर्मी फायर प्लान और सतह से हवाई मिसाइलों की स्थिति का विवरण शामिल है। पुलिस ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि सभी डाक्युमेंट्स को क्लासिफाइड किया गया है, जो कि युद्ध के दौरान दूसरे देश को परिचालन लाभ देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
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महमूद अख्तर से पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इसरो के कई कर्मचारियों के प्रोफाइल की स्क्रूटनी की थी। लेकिन, कई महीनों की जांच के बाद पाया गया कि इसमें कोई भी कर्मचारी शामिल नहीं था। क्राइम ब्रांच के डीसीपी मधुर वर्मा के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, इस मामले में इसरो के किसी भी कर्मचारी के शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है, अख्तर को दिल्ली चिड़ियाघर के बाहर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उससे आईएससी के अधिकारियों और दूसरी जांच एजेंसियों ने चाणक्यपुरी ऑफिस में पूछताछ की थी। इसके बाद उसे उच्च आयोग को सौंप दिया गया था।
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45 मिनट की पूछताछ में अख्तर ने दावा किया था कि उसे पाकिस्तान उच्च आयोग में तैनात एक आईएसआई एजेंट और इसरो के अधिकारी ने कुछ संवेदनशील जानकारियां दी थी। इसके बाद इसकी जानकारी जांच अधिकारियों ने संबंधित विभागों को दे दी गई और कर्मचारियों की प्रोफाइल की स्क्रीनिंग शुरू हुई थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं पाया।
पुलिस ने इस मामले में एक सप्लिमेंटरी चार्जशीट फाइल की थी। इसमें उसने कहा कि सभी दस्तावेज को संबंधित एजेंसियों से सत्यापित कराया गया था।
डीसीपी वर्मा ने कहा, हमने पहले गिरफ्तार चार व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी, जिसमें समाजवादी पार्टी सांसद मुनव्वर सलीम का पर्सनल असिस्टेंट भी शामिल था। इस मामले में अथॉरिटीज से इन डॉक्युमेंट्स के क्लासिफाइड होने के बाद सप्लिमेंटरी चार्जशीट दायर किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कहा है कि दस्तावेजों में सर क्रीक, आर्मी फायर प्लान और सतह से हवाई मिसाइलों की स्थिति का विवरण शामिल है। पुलिस ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि सभी डाक्युमेंट्स को क्लासिफाइड किया गया है, जो कि युद्ध के दौरान दूसरे देश को परिचालन लाभ देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।