अफगानिस्तान भाग गया मसूद अजहर: पाक
- पाकिस्तान सरकार और सेना के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से फैलाई जा रही अजहर के पाक में नहीं होने की बात
- पठानकोट आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने मसूद को नजरबंदी में रखने का किया था दावा
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पाकिस्तान का कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में नहीं है। अजहर पर भारत की ओर से डाले जा रहे दबाव का चौतरफा असर देखते हुए पाकिस्तान सरकार और सेना के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से यह बात फैलाई जा रही है।
पाकिस्तान मामले से जुड़ी भारतीय एजेसियों को यह खबर मिल रही है कि मसूद अजहर कुछ दिनों पहले पाकिस्तान छोड़ अफगानिस्तान चला गया है। जबकि पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान ने अजहर को नजरबंद रखने का दावा किया था। भारतीय खुफिया एजेंसी के उच्चपदस्थ सूत्र ने अमर उजाला को बताया कि मसूद अजहर से पूछताछ करने की नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की पहल ने पाकिस्तानी सेना और सरकार के भारत विरोधी धड़े को असहज कर दिया है।
पाक के संयुक्त जांच दल (जेआईटी) और एनआईए की आपसी औपचारिक व तकनीकी शर्तों के मुताबिक पाकिस्तान भारत की इस मांग को नजरअंदाज नहीं कर सकता। जिस तरह भारत ने तमाम राजनीतिक विरोधों से बावजूद तकनीकी आधार पर जेआईटी को पठानकोट एयरबेस जैसे संवेदनशील जगहों पर जाने की इजाजत दी है उसी तरह पाकिस्तान को भी भारत की शर्तें माननी होगी। सूत्रों के मुताबिक भारत ने जेआईटी में आईएसआई के सदस्य की मौजूदगी से भी आंखे मूंद ली ताकि जांच की रफ्तार में अड़चन पैदा ना हो।
नवाज शरीफ ने किया था मसूद को नजरबंदी में रखने का दावा
पठानकोट हमले में जैश की संलिप्तता के बाद पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उसे नजरबंदी में रखने का दावा किया था। लेकिन अब पाकिस्तान का यह यू टर्न आगे की रणनीति को देखते हुए लिया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक चीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में मसूद को पक्ष में वोट देने के साथ इस मामले में पाकिस्तान की पूरी मदद कर रहा है। खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व निदेशक एएस दुल्लत के मुताबिक चीन पाकिस्तान के जरिए भी भारत को उलझाए रखने की नीति पर काम कर रहा है।
दुल्लत ने कहा कि पाकिस्तान में कई पॉवर सेंटर काम कर रहे हैं। पाक के इस तरह के पैतरों के बावजूद भारत को अपनी बात पर कायम रहते हुए बातचीत का रास्ता खोले रखना होगा। एजेंसी सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ चल रहे सेना के जर्ब-ए-अज्ब ऑपरेशन की वजह से पाक-अफगानिस्तान सीमा पर वहां के फौज की बड़ी सख्ती है। ऐसे में मसूद अजहर का अफगानिस्तान चले जाने की बात गले से नहीं उतर रही है।