{"_id":"583d349a4f1c1b051cde5dd9","slug":"outlook-the-demonetisation-is-likely-to-bank-fires","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"...तो इसलिए बैकफायर भी कर सकता है नोटबंदी का यह फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
...तो इसलिए बैकफायर भी कर सकता है नोटबंदी का यह फैसला
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 29 Nov 2016 02:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी का फैसला दरअसल एक बहुत बड़ा जुआ है और इसके "बैकफायर" करने की पूरी संभावना है। लोगों को जिस तरह की दिक्कतें हो रही हैं, उनसे साफ है कि जो राजनेता इस तरह के फैसला लेता है, उसमें जोखिम उठाने की बहुत अधिक क्षमता है। भविष्य में इसका क्या राजनीतिक असर होगा, यह अभी किसी को नहीं मालूम। यदि विपक्ष का भारत बंद कामयाब होता और कोई जन आक्रोश वाकई होता तो उसका एक मतलब भी था।
लेकिन ऐसा लगता है कि विपक्ष जान बूझ कर जन आक्रोश का एक माहौल बनाना चाहता है, जिसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं है न ही उसका कोई सियासी फायदा है। ऐसा लगता है कि विपक्ष सही तरीके से जन आक्रोश भी नहीं दिखा पाया और एक बात जो वह लगातार कह रहा है, उसका कोई असर भी नहीं है। ऐसा नहीं दिख रहा है कि विपक्ष कोई ऐसी बात सामने रख रहा है, जिसका आम जनता पर कोई असर हो।
विज्ञापन
लेकिन ऐसा लगता है कि विपक्ष जान बूझ कर जन आक्रोश का एक माहौल बनाना चाहता है, जिसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं है न ही उसका कोई सियासी फायदा है। ऐसा लगता है कि विपक्ष सही तरीके से जन आक्रोश भी नहीं दिखा पाया और एक बात जो वह लगातार कह रहा है, उसका कोई असर भी नहीं है। ऐसा नहीं दिख रहा है कि विपक्ष कोई ऐसी बात सामने रख रहा है, जिसका आम जनता पर कोई असर हो।
विज्ञापन
विपक्ष एक अजीब रूप में दिख रहा है, जिसमें हठधर्मिता है। इसमें कोई शक नहीं कि आम जनता को नोटबंदी से दिक्कते हुई हैं, लेकिन विपक्ष उन दिक्कतों को सही ढंग से उठा नहीं पया, न ही लोगों को लगा कि विपक्ष के जरिए इस मुद्दे को कारगर तरीके से उठाया जा सकता है। भारत में अब तक किसी सरकार का कोई कदम इतना दूरगामी और व्यापक प्रभाव छोड़ने वाला नहीं हुआ है, जितना नोटबंदी।
इसका असर भिखारी से लेकर सबसे धनी आदमी तक हुआ है, भारत में मुझे ऐसा कोई फैसला याद नहीं आता जिसका असर इतना व्यापक हुआ हो। सत्ताधारी पार्टी ने इस फैसले के राजनीतिक लाभ के बारे में तो सोचा ही होगा, पर क्या उसका कोई आर्थिक या वित्तीय चिंतन भी इसके पीछे था, अहम यह है। मोदी शायद भारत की आंतरिक ताकत भी इस फैसले के जरिए दिखाना चाहते थे।
इसका असर भिखारी से लेकर सबसे धनी आदमी तक हुआ है, भारत में मुझे ऐसा कोई फैसला याद नहीं आता जिसका असर इतना व्यापक हुआ हो। सत्ताधारी पार्टी ने इस फैसले के राजनीतिक लाभ के बारे में तो सोचा ही होगा, पर क्या उसका कोई आर्थिक या वित्तीय चिंतन भी इसके पीछे था, अहम यह है। मोदी शायद भारत की आंतरिक ताकत भी इस फैसले के जरिए दिखाना चाहते थे।
उन्होंने मुझे एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि कुंभ में पूरे ऑस्ट्रेलिया की आबादी जितने लोग आते हैं और फिर चुपचाप अपने अपने घर भी लौट जाते हैं और यह राज्य के हस्तक्षेप के बगैर ही होता है। उन्हें शायद लगा कि इस फैसले का आने वाले समय में भारत के लिए अच्छा होगा और देश को आर्थिक फायदा होगा।