OPS: AIRF अध्यक्ष बोले- कर्मियों का भविष्य सुरक्षित रखने में फेल हुई सरकार, तो कठोर एक्शन के लिए रहें तैयार
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विस्तार
देश में पुरानी पेंशन बहाली के लिए ज्वाइंट फोरम फॉर रेस्टोरेशन ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम (जेएफआरओपीएस)/नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के बैनर तले आंदोलन कर रहे विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने का निर्णय अब तूल पकड़ने लगा है। केंद्र एवं राज्यों के कुछ कर्मचारी संगठन, इसके पक्ष में नजर नहीं आ रहे। महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कई राज्यों में ओपीएस को लेकर प्रदर्शन/रैलियां आयोजित हो रही हैं। अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने के निर्णय पर जब कर्मचारी संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई, तो एआईआरएफ के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्रा को एक पत्र जारी करना पड़ा। उन्होंने 17 मार्च को जेएफआरओपीएस/एनजेसीए के घटक संगठनों को लिखे पत्र में कहा है कि ओपीएस व अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार के साथ हुई जेएफआरओपीएस/एनजेसीए के प्रतिनिधियों की बातचीत पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। सभी साथियों से अपील है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मियों का भविष्य सुरक्षित रखने में अगर सरकार फेल रहती है, तो आने वाले समय में कर्मचारी संगठन, कठोर एक्शन के लिए तैयार रहें।
14 मार्च को हुई थी अहम बैठक
जेएफआरओपीएस/एनजेसीए ने सरकार को ओपीएस के मुद्दे पर 19 मार्च को देश में एक मई से होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस देने का निर्णय लिया था। इसके बाद 14 मार्च को नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी और नेशनल काउंसिल/जेसीएम (स्टाफ साइड) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में हड़ताल पर जाने का निर्णय रद्द कर दिया गया। इस बैठक में सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय के सचिव (व्यय), सचिव डीओपीटी, अतिरिक्त सचिव (व्यय), चेयरमैन पीएफआरडीए, जेएस/डीएफएस और ईडी/पीएफआरडीए उपस्थित रहे। कर्मचारी पक्ष की तरफ से बैठक के लिए एआईआरएफ के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्रा, एनएफआईआर के गुमान सिंह, कन्फेडरेशन के महासचिव रूपक सरकार, आईएनडीडब्ल्यूएफ के आर. श्रीनिवासन, एआईडीईएफ के श्री कुमार और ऑल इंडिया अकाउंट्स एंड ऑडिट एसोसिएशन के तपन बोस का नाम तय किया गया। बैठक के बाद शिव गोपाल मिश्रा द्वारा स्ट्राइक की कॉल वापस लेने का जो पत्र जारी किया गया, उसमें लिखा कि श्रीकुमार, बैठक में मौजूद नहीं थे, हालांकि फाइनल निर्णय को लेकर उनकी सहमति ली गई है।
दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं
शिव गोपाल मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा, भारत सरकार, मौजूदा पेंशन सिस्टम के रिव्यू पर काम कर रही है। अभी वह काम पूरा नहीं हो सका है। सरकार के प्रतिनिधियों ने उस काम को पूरा करने के लिए कुछ और समय मांगा है। ऐसे में सरकार को कुछ समय दे दिया गया। ओपीएस को लेकर किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने के लिए केंद्र सरकार को जो समय दिया गया है और इसके चलते एक मई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल, वापस लेने की बात हुई है, उसके मद्देनजर ज्वाइंट फोरम फॉर रेस्टोरेशन ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम (जेएफआरओपीएस)/ नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के सभी धड़ों से परामर्श किया गया है। इनके सदस्यों के साथ या तो फोन पर बातचीत हुई है, या उनके साथ फेस टू फेस बैठक आयोजित की गई। मिश्रा के मुताबिक, मेरा दृढ़ विश्वास है कि आने वाले 2-3 महीनों में आसमान नहीं टूट पड़ेगा। यदि पुरानी पेंशन की बहाली की हमारी मांग पूरी नहीं हुई, तो हम किसी भी क्षण कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में ओपीएस व अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार के साथ हुई जेएफआरओपीएस/एनजेसीए के प्रतिनिधियों की बात पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। जेएफआरओपीएस/एनजेसीए के साथियों से अपील है कि सरकार, कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने में फेल होती है तो वे किसी भी एक्शन के लिए तैयार रहें।
सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी
नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी और नेशनल काउंसिल/जेसीएम (स्टाफ साइड) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी ने बैठक में उन कारणों के बारे में बताया था, जिनके चलते वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट पेश होने में देरी हुई है। डिप्टी सेक्रेटरी ने बताया कि कमेटी, कर्मियों के मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है। वह कमेटी जल्द ही सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। डिप्टी सेक्रेटरी ने जेसीएम (स्टाफ साइड) के सदस्यों से अपील की थी कि वे कमेटी पर विश्वास रखें। वित्त मंत्रालय की कमेटी फाइनल निर्णय पर पहुंचे, इसके लिए जेसीएम को कुछ समय देना चाहिए। इसके बाद जेएफआरओपीएस/एनजेसीए ने सरकार को अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस देने की प्रक्रिया रद्द कर दी। 'पुरानी पेंशन' बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे कर्मचारी संगठनों ने फरवरी में केंद्र सरकार को ओपीएस लागू करने के लिए छह सप्ताह का अल्टीमेटम दिया था। यह अहम निर्णय, सात फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित हुई नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया था।
इन सात लोगों ने तय की थी स्ट्राइक की तिथि
उस महत्वपूर्ण कमेटी में शिव गोपाल मिश्रा, संयोजक (जीएस/एआईआरएफ), डॉ. एम राघवैया, को-कन्वीनर (जीएस/एनएफआईआर), कामरेड एसएन पाठक, अध्यक्ष एआईईडीएफ, कामरेड अशोक सिंह, अध्यक्ष आईएनडीडब्लूएफ, कारमेड रूपक सरकार, आईटीईएफ/कॉन्फेडरेशन, कामरेड गीता पांडे, अध्यक्ष एआईपीटीएफ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद यूपी के अध्यक्ष कामरेड हरि किशोर तिवारी को शामिल किया गया था। पुरानी पेंशन बहाली के लिए अब अगला कदम क्या हो। देश में अनिश्चितकालीन स्ट्राइक की तिथि, यह तय करने का अधिकार भी इस कमेटी को दिया गया। इसी कमेटी ने 19 मार्च को स्ट्राइक का नोटिस देने और एक मई से राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया था।
टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में गठित कमेटी
24 मार्च 2023 को संसद सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी कर्मचारियों के 'पेंशन सिस्टम' की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की थी। छह अप्रैल को समिति का गठन कर दिया गया। वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव, व्यय विभाग के विशेष सचिव एवं पेंशन फंड नियामक विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के अध्यक्ष, इस कमेटी के सदस्य बनाए गए थे। यह समिति इस बात को लेकर सुझाव देगी कि सरकारी कर्मचारियों पर लागू एनपीएस के मौजूदा ढांचे में किसी तरह का कोई बदलाव जरूरी है या नहीं। समिति जो भी सुझाव देगी, उसमें राजकोषीय निहितार्थों और समग्र बजटीय प्रभाव को ध्यान में रखा जाएगा।
बैठक के बाद नए सिरे से आगे बढ़ेगा आंदोलन
कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा था, उनका संगठन नए सिरे से आंदोलन शुरू करने पर चर्चा करेगा। इसके लिए संगठन की बैठक बुलाई जाएगी। लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र की नई सरकार के समक्ष मजबूती से ओपीएस व दूसरे लंबित पड़े मुद्दे रखे जाएंगे। केंद्र सरकार में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना, निजीकरण पर रोक लगाना, आठवें वेतन आयोग का गठन करना और कोरोनाकाल में रोके गए 18 महीने के डीए का एरियर जारी करना, ये बातें भी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं। सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मियों की मांगों में पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना या उसे पूरी तरह खत्म करना, भी शामिल है। जब तक इस एक्ट को खत्म नहीं किया जाता, तब तक ओपीएस की राह मुश्किल ही बनी रहेगी। वजह, एनपीएस के तहत कर्मियों का जो पैसा कटता है, वह पीएफआरडीए के पास जमा है। केंद्र सरकार, कह चुकी है कि वह पैसा राज्यों को नहीं लौटाया जाएगा। ऐसे में जहां भी ओपीएस लागू हो रहा है, वहां पर सरकार बदलते ही दोबारा से एनपीएस लागू हो जाए, इस बाबत कुछ कहा नहीं जा सकता।