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Opposition Meet: 26 दलों के सामूहिक संकल्प में दिखी 'कांग्रेस' की झलक, 'केजरीवाल' और 'दीदी' का रखा पूरा ख्याल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 18 Jul 2023 06:53 PM IST
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सार
आईएनडीआईए के संकल्प पत्र में कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी ने कई बार कहा है कि मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की है, उनमें 95 फीसदी विपक्ष के नेता हैं...
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Opposition Meet: Glimpses of 'Congress' seen in collective resolution of 26 parties
Bengaluru Opposition Meeting - फोटो : Agency

विस्तार

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक हुई। विपक्षी कुनबे को अब नया नाम दिया गया है। राहुल गांधी ने कहा, अब लड़ाई, इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (आईएनडीआईए) और भाजपा के बीच है। इंडिया बनाम मोदी के बीच है। विपक्षी दलों की बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की है। खास बात ये रही कि बैठक के बाद जब 'आईएनडीआईए' का संकल्प पत्र जारी हुआ, तो उसमें 'कांग्रेस' के एजेंडे की झलक दिखाई दी। जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी, मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रही है, उन्हें 'संकल्प' पत्र में शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, संकल्प पत्र में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी के मुद्दे का भी पूरा ख्याल रखा गया है। विपक्षी खेमे के ये दोनों नेता, चुनी हुई सरकारों को केंद्र द्वारा राज्यपाल/एलजी के माध्यम से परेशान करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। इसे भी संकल्प पत्र में जगह मिली है।

यह भी पढ़ें: Opposition meet: इन चार राज्यों में कांग्रेस को करना होगा सबसे बड़ा सियासी बलिदान! कैसे हुआ सब कुछ 'ऑल इज वेल'

सोनिया और राहुल ने मणिपुर हिंसा का मुद्दा खूब उठाया

कांग्रेस पार्टी लंबे समय से धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और संघवाद पर बात करती रही है। कांग्रेस ने अपने 85वें राष्ट्रीय महाधिवेशन में उक्त मामलों को केंद्र में रखा था। पार्टी के बयान में कहा गया, भारत का विचार, पंडित जवाहरलाल नेहरु द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और संघवाद के लिए खड़ी है। कांग्रेस को वर्तमान ध्रुवीकृत राजनीति में केंद्र स्थान पर कब्जा करके राजनीतिक डिस्कॉर्स को फिर से परिभाषित करना चाहिए। मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर कांग्रेस ने भरपूर आवाज उठाई है। राहुल गांधी ने हिंसा ग्रस्त इलाकों में दो दिवसीय दौरा किया था। इसके अलावा कांग्रेस मुख्यालय में मणिपुर के वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रेसवार्ता की। राहुल गांधी ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान कहा था, उनके लिए मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक महत्वपूर्ण नहीं थी। मणिपुर जलता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे। सर्वदलीय बैठक तब बुलाई गई, जब प्रधानमंत्री स्वयं देश में नहीं हैं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने एक वीडियो संदेश में मणिपुर के लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा, इस हिंसा ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा पर एक गहरा घाव छोड़ा है। मणिपुर में लोगों का जीवन तबाह कर दिया गया।

एजेंसियों के दुरुपयोग पर सभी दलों ने उठाई आवाज

आईएनडीआईए के संकल्प पत्र में कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी ने कई बार कहा है कि मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की है, उनमें 95 फीसदी विपक्ष के नेता हैं। इसमें सबसे ज्यादा रेड तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के घरों और दफ्तरों पर की गई हैं। पार्टी ने आशंका जताई थी कि 2024 से पहले विपक्ष के अनेक नेता, केंद्रीय जांच एजेंसियों के जाल में फंस सकते हैं। संकल्प पत्र में कहा गया है कि सरकार द्वारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ एजेंसियों का खुल्लम-खुल्ला हमारी राजनीति के संघीय ढांचे को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। केजरीवाल और ममता बनर्जी ने राज्यपाल/उपराज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अब संकल्प पत्र में वह बात कही गई है कि गैर-भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की भूमिका सभी संवैधानिक मानदंडों से अधिक रही है। भाजपा सरकार द्वारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ एजेंसियों का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग हमारे लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। गैर-भाजपा शासित राज्यों की वैध जरूरतों, आवश्यकताओं और अधिकारों को केंद्र द्वारा सक्रिय रूप से अस्वीकार किया जा रहा है।

संकल्प पत्र में शामिल ये खास बातें

हम, भारत के 26 प्रगतिशील दलों के हस्ताक्षरित नेता, संविधान में निहित भारत के विचार की रक्षा के लिए अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हैं। हमारे गणतंत्र के चरित्र पर भाजपा द्वारा व्यवस्थित तरीके से गंभीर हमला किया जा रहा है। हम अपने देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। भारतीय संविधान के मूलभूत स्तंभों-धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, आर्थिक संप्रभुता, सामाजिक न्याय और संघवाद-को व्यवस्थित रूप से और खतरनाक रूप से कमजोर किया जा रहा है। हम मणिपुर को तबाह करने वाली मानवीय त्रासदी पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री की खामोशी चौंकाने वाली और अभूतपूर्व है। मणिपुर को शांति और सुलह के रास्ते पर वापस लाने की तत्काल आवश्यकता है। हम संविधान और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकारों पर जारी हमले का मुकाबला करने और उनका सामना करने के लिए दृढ़ हैं। हमारी राजनीति के संघीय ढांचे को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। गैर-भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की भूमिका सभी संवैधानिक मानदंडों से अधिक रही है।

जांच एजेंसियों का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग

भाजपा सरकार द्वारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ एजेंसियों का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग हमारे लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। गैर-भाजपा शासित राज्यों की वैध जरूरतों, आवश्यकताओं और अधिकारों को केंद्र द्वारा सक्रिय रूप से अस्वीकार किया जा रहा है। हम आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों और रिकॉर्ड बेरोजगारी के गंभीर आर्थिक संकट का सामना करने के अपने संकल्प को मजबूत करते हैं। विमुद्रीकरण अपने साथ एमएसएमई और असंगठित क्षेत्रों में अनकही दुर्दशा लेकर आया, जिसके परिणामस्वरूप हमारे युवाओं में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी आई। हम पसंदीदा मित्रों को देश की संपत्ति की लापरवाही से बिक्री का विरोध करते हैं। हमें एक मजबूत और रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ एक प्रतिस्पर्धी और फलते-फूलते निजी क्षेत्र के साथ एक निष्पक्ष अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहिए, जिसमें उद्यम की भावना को बढ़ावा दिया जाए और विस्तार करने का हर अवसर दिया जाए। किसान और खेत मजदूर के कल्याण को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

नफरत और हिंसा को हराने के लिए एक साथ

हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ पैदा की जा रही नफरत और हिंसा को हराने के लिए एक साथ आए हैं। महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और कश्मीरी पंडितों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए एवं सभी सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए एक निष्पक्ष सुनवाई की मांग करते हैं। पहले कदम के रूप में, जाति जनगणना को लागू करें। हम अपने साथी भारतीयों को निशाना बनाने, प्रताड़ित करने और दबाने के लिए भाजपा की प्रणालीगत साजिश से लड़ने का संकल्प लेते हैं। नफरत के उनके जहरीले अभियान ने सत्तारूढ़ दल और उसकी विभाजनकारी विचारधारा का विरोध करने वाले सभी लोगों के खिलाफ द्वेषपूर्ण हिंसा को जन्म दिया है। ये हमले न केवल संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि उन बुनियादी मूल्यों को भी नष्ट कर रहे हैं, जिन पर भारत गणराज्य की स्थापना हुई है। हम राष्ट्र के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक एजेंडा पेश करने का संकल्प लेते हैं। हम शासन के सार और शैली दोनों को बदलने का वादा करते हैं जो अधिक परामर्शात्मक, लोकतांत्रिक और सहभागी होगा।

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