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मायावती पर विवादित टिप्पणी कर एक झटके में अर्श से फर्श पर आए दयाशंकर

Fri, 22 Jul 2016 09:47 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया Updated Fri, 22 Jul 2016 09:47 AM IST
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One controversial comment of Dayashankar Singh came of floor from top
दयाशंकर सिंह - फोटो : amar ujala

बसपा सुप्रीमो मायावती के विरुद्ध आपत्तिजनक देकर भाजपा के निष्कासित प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह बुरे फंस गए हैं। जिस पार्टी से वह वर्षों तक जुड़े रहे, उस पार्टी ने इसकी वजह से उन्हें एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी की इस कार्रवाई से उनके राजनीति कैरियर को बड़ा धक्का लगा है, जिसकी निकट भविष्य में भरपाई संभव नहीं होगी।

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बक्सर के राजपुर गांव के मूल निवासी दयाशंकर सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ से अपनी राजनीति सफर की शुरुआत की। वह 1997-98 में लखनऊ विश्वविद्यालय के महामंत्री जबकि 1999-2000 में छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। 2000 में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री बन गए। 2003 में वह भाजयुमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। 
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दयाशंकर सिंह ने 2007 में बलिया नगर विधानसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें करारी शिकस्त मिली। इस चुनाव में वह अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। ये सीट तब बसपा की मंजू सिंह ने जीती थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश मंत्री का दायित्व सौंपा। 2016 में हुए स्थानीय निकाल क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में भाजपा ने इन्हें अपना प्रत्याशी बनाया पर दयाशंकर चुनाव हार गए। इसके बावजूद पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया।

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टिकट के दावेदारों की खिली बांछें

One controversial comment of Dayashankar Singh came of floor from top
दयाशंकर सिंह - फोटो : amar ujala

उपाध्यक्ष मनोनीत होने के बाद वह पहली बार मऊ पहुंचे थे कि स्वागत से अति उत्साहित होकर बसपा सुप्रीमो मायावती के विरुद्ध आपत्तिजनक बयान देकर अपने पैर में खुद कुल्हाड़ी मार ली। साथ ही पार्टी की भी जबरदस्त किरकिरी कराई। डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी ने भी दयाशंकर को बाहर करने में देर नहीं लगाई। इसके साथ ही एक ही दिन में दयाशंकर सिंह अर्श से सीधे फर्श पर आ गए। 

नगर विधानसभा से 2007 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके दयाशंकर सिंह इस बार भी नगर से टिकट के लिए दावेदार माने जा रहे थे। संगठन में अच्छी पकड़ होने के कारण कई दावेदार अंदर ही अंदर उनसे भयभीत थे।

उन लोगों को इस बात का भय था कि दयाशंकर सिंह संगठन में अपने संबंधों का लाभ उठाकर टिकट लेने में बाजी मार सकते हैं। लेकिन अब दयाशंकर सिंह को पार्टी से निकाले जाने के बाद अन्य दावेदारों की बाछें खिल गईं हैं।

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