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तूफान: एक सदी पुराना सुंदरबन रिट्रीट यास में हुआ तबाह

Fri, 11 Jun 2021 03:27 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, फ्रेजरगंज।
एजेंसी, फ्रेजरगंज। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 11 Jun 2021 03:27 AM IST
सार

सुंदरबन रिट्रीट को पहला झटका पिछले साल आए तूफान अंफान ने दिया, जिसके बाद यास ने कसर पूरी कर दी और एक सदी से भी पुराने इस रिट्रीट को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

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one century old Sundarban retreat destroyed in cyclone yaas
चक्रवाती तूफान यास - फोटो : पीटीआई

विस्तार

एक सदी से भी पुराना सुंदरबन रिट्रीट पिछले महीने आए चक्रवाती तूफान यास में तबाह हो गया। सर एंड्रयू फ्रेजर ने इस बंगले को बनाया था और यहां वायसरॉय लॉर्ड जार्ज कर्जन ने कई रंगीन शामें बिताई थीं। इसे फ्रेजरगंज रेजिडेंस के नाम से भी जाना जाता है।

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सर एंड्रयू फ्रेजर 1903 से 1908 तक बंगाल के गवर्नर रहे। नामखाना ब्लॉक के बीडीओ शांतनु सिंह ठाकुर ने बताया की तमाम अंग्रेज शासकों का स्वागत कर चुके इस रिट्रीट को यास की दस्तक ने बर्बाद कर दिया। आजादी से पहले यह रिट्रीट भारत के रुतबेदार अमीरों के लिए आकर्षण का केंद्र थी और यहां बड़ी बड़ी हस्तियों का जमघट लगता था।
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इस आलीशान बंगले को पहला झटका पिछले साल आए तूफान अंफान ने दिया, जिसके बाद यास ने कसर पूरी कर दी और एक सदी से भी पुराने इस रिट्रीट को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
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वैज्ञानिकों ने चक्रवाती तूफानों का जल्द पता लगाने का नया तरीका ईजाद किया
देश के वैज्ञानिकों के एक समूह ने तीव्र चक्रवाती तूफानों का जल्द पता लगाने का एक नया तरीका ईजाद कर लिया है। बता दें कि पिछले दिनों आए चक्रवाती तूफान यास ने खासी तबाही मचाई थी।

पानी में बनने वाली भंवर से लगाया जाएगा पूर्वानुमान
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने कहा कि इस तरीके में समुद्र की सतह पर उपग्रह से तूफान का पूर्वानुमान लगाने से पहले पानी में भंवर के प्रारंभिक लक्षणों का अनुमान लगाया जाता है।

अब तक सुदूर संवेदी तकनीकों से इनका समय पूर्व पता लगाया जाता रहा है। हालांकि यह तरीका तभी कारगर होता है जब समुद्र की गर्म सतह पर कम दबाव का क्षेत्र भलीभांति विकसित हो जाता है।

चार भीषण चक्रवाती तूफानों पर किया अध्ययन
डीएसटी ने कहा कि चक्रवात के आने से पर्याप्त समय पहले उसका पूर्वानुमान लगने से तैयारियां करने के लिए समय मिल सकता है और इसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव होते हैं।


वैज्ञानिकों ने मॉनसून के बाद आए चार भीषण चक्रवाती तूफानों पर यह अध्ययन किया है। इनमें फालिन (2013), वरदा (2013), गज (2018) और मादी (2013) शामिल हैं। मॉनसून के बाद आए दो तूफानों मोरा (2017) और आइला (2009) पर भी अध्ययन किया गया।

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