अमित शाह का ऑपरेशन 'ऑल आउट': क्या गृह मंत्री के इस प्लान में फंस चुके हैं आतंकी और नक्सली?
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विस्तार
देश में आतंकवाद और नक्सलवाद, अपने अंतिम दौर में है। केंद्रीय गृह मंत्री का आपरेशन 'ऑल आउट' सफलता के करीब है। आतंकी और नक्सली, गृह मंत्री के 'प्लान' में फंस चुके हैं। सीआरपीएफ दिवस (CRPF Day) पर शाह ने कहा था, जिस संकल्प के साथ सीआरपीएफ कश्मीर, नक्सल क्षेत्रों और पूर्वोत्तर में काम कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अगले कुछ वर्षों में तीनों ही क्षेत्रों में हमें सीआरपीएफ की आवश्यकता नहीं रहेगी। अगर ऐसा होता है तो इसका पूरा श्रेय सीआरपीएफ को ही जाता है। आतंकियों और नक्सलियों पर आखिरी जोरदार वार की तैयारी चल रही है।
चौतरफा वार से बच नहीं सकेंगे आतंकी व नक्सली
केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा सीआरपीएफ डे पर कही गई बात के कई अर्थ निकाले जा रहे थे। आखिर सीआरपीएफ को ऐसे जोखिम वाले क्षेत्रों से हटाने की बात क्यों हो रही है। कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने का खासा अनुभव रखने वाले केंद्रीय सुरक्षा बल के एक आईजी गृह मंत्री की बात को बिल्कुल सही बताते हैं। आने वाले कुछ वर्षों में आतंकवाद और नक्सलवाद, इन दोनों को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। इनके लिए 'ऑल आउट' प्लान चल रहा है। इसमें केवल मुठभेड़ या आईईडी विस्फोट जैसा कुछ शामिल नहीं है, बल्कि ये एक चौतरफा वार है। इसमें एनकाउंटर के अलावा विकास की गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। लोगों से सीधा बात हो रही है। उन्हें समझ भी आ रहा है कि अब बहुत हो चुका है। बच्चों के लिए स्कूल, दवाई और कमाई, वे ऐसे मुद्दे पर ज्यादा गौर कर रहे हैं।
620 करोड़ रुपये में बनेंगे किलेबंद पुलिस स्टेशन
भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर, उत्तर पूर्व और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आपरेशन 'ऑल आउट' शुरू किया है। आतंकियों और नक्सलियों पर नकेल कसी जा रही है। इन सभी क्षेत्रों में केंद्रीय एजेंसियों एवं सुरक्षा बल एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। दहशतगर्दों को मदद पहुंचाने वालों पर कड़ा प्रहार किया गया है। अंडर ग्राउंड और ओवर ग्राउंड वर्कर खत्म हो रहे हैं। सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक हथियार, उपकरण, ठोस इंटेलिजेंस और किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि, सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान विशेष बलों एवं विशेष आसूचना शाखाओं 'एसआईबी' की मजबूती के लिए 371 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की गई हैं। 620 करोड़ रुपये की लागत से 250 किलेबंद पुलिस स्टेशनों को मंजूरी प्रदान की गई है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी परियोजना के तहत 10300 किलोमीटर क्षेत्र में सड़कों का निर्माण किया गया है।
मोबाइल कनेक्टिविटी से नक्सली हो रहे परेशान
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहले मोबाइल कनेक्टिविटी बहुत कम थी। अगर सरकार, मोबाइल टावर खड़ा करती तो नक्सलियों द्वारा उसे क्षतिग्रस्त कर दिया जाता था। इसके बाद सीआरपीएफ ने टावर की सुरक्षा कमान संभाली। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहले चरण के तहत 2243 मोबाइल टावर खड़े किए गए हैं। लोकल लोगों ने मोबाइल कनेक्टिविटी का फायदा उठाना शुरू किया है। सुरक्षा बलों को भी खुफिया जानकारियां जुटाने में मदद मिलने लगी है। दूसरे चरण के अंतर्गत 2542 टावर मंजूर किए गए हैं। 47 आईटीआई और 68 कौशल विकास केंद्रों को स्वीकृति प्रदान की गई है। पिछले वर्षों में 1236 नई बैंक शाखाएं खोली गई हैं। 1077 एटीएम और 14230 बैंकिंग करेस्पांडेंट का प्रावधान किया गया है। साथ ही 4903 डाकघर अनुमोदित किए गए हैं। इनमें से 3053 डाकघर शुरू हो चुके हैं। फ्लैगशिप स्कीमों पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 77 फीसदी की गिरावट
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय के मुताबिक, वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में अब 77 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2009 में 2258 घटनाएं हुई थीं, साल 2021 में इनकी संख्या 509 रह गई है। इन घटनाओं में आम लोगों और सुरक्षा बलों को मिलाकर देखें तो इनके मारे जाने की संख्या में 85 फीसदी की कमी हुई है। साल 2010 में ऐसी मौतों की तादाद 1005 थी। पिछले साल यह आंकड़ा 147 रह गया है। गत वर्ष 126 वामपंथी उग्रवादी मारे गए हैं। 50 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए हैं। 97 आम लोगों की जान चली गई। वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित जिलों के रूप में वर्गीकृत इलाके अब 25 ही बचे हैं। 2018 में इनकी संख्या 35 से 30 पर पहुंच गई थी। ऐसे में नक्सली और आतंकी, अब अपने अंतिम दौर में हैं।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद मारे गए 439 आतंकवादी
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद 439 आतंकवादी मारे गए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का कहना है, अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से यानी 5 अगस्त 2019 से 26 जनवरी 2022 तक 541 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जबकि 439 आतंकवादी मारे गए। इनमें 98 नागरिकों की मौत हो गई। इसके अलावा 109 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए हैं। गृह राज्य मंत्री का कहना था, इन घटनाओं के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है। लगभग 5.3 करोड़ रुपये की निजी संपत्ति के नुकसान का आकलन किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने जम्मू में कहा था, अगले कुछ वर्षों में जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर में केंद्रीय सुरक्षा बलों की जरूरत नहीं पड़ेगी।