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बिहार के विधायक पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना

Fri, 10 Feb 2017 09:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Fri, 10 Feb 2017 09:47 PM IST
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on Bihar MLA Supreme Court imposed a fine of Rs 10 lakh

सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी सार्थक उद्देश्य वाली याचिका दाखिल करने से नाराज होकर बिहार विधायक रविन्द्र सिंह पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 

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शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता विधायक से कहा कि आप जनप्रतिनिधि है, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि किसी भी तरह की याचिका दायर कर दें। वहीं एक अन्य याचिकाकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हमें समझ में नहीं आ पा रहा है कि आखिरकार यह याचिका क्यों दायर की गईं। बिहार केअरवल से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक को वर्ष 1994 में छपे एक आलेख को लेकर आपत्ति थी। उन्होंने इसकी जांच कराने की गुहार की थी। आलेख पिछड़ी जाति से संबंधित था।

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पीठ ने ठुकराई जुर्माना कम करने की गुहार

on Bihar MLA Supreme Court imposed a fine of Rs 10 lakh

पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आलेख वर्ष 1994 में छपा था, ऐसे में आप इतने वर्ष बाद क्यों याचिका लेकर आए। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि विधायक ने वर्ष 2013 में इस आलेख को पढ़ा और इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन गत दिसंबर में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

लेकिन पीठ ने याचिका को फालतू बताते हुए याचिकाकर्ता पर दस लाख रुपये जुर्माना कर दिया। याचिकाकर्ता ने पीठ ने जुर्माने को कम करने की गुहार की लेकिन पीठ ने इसे ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि आपके लिए यह राशि बेहद कम है।

पीठ ने लगाया शिक्षक पर एक लाख रुपये का जुर्माना

on Bihar MLA Supreme Court imposed a fine of Rs 10 lakh
सुप्रीम कोर्ट

वहीं एक अन्य मामले में महाराष्ट्र के रहने वाले 66 वर्षीय एक शिक्षक पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया। वास्तव में शिक्षक की ओर से पेश वकील ने पीठ ने याचिका वापस लेने की गुहार लगाई, जिस पर चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हम तीनों ने आपकी मोटी फाइल पढ़ी और इसके लिए समय खर्च किए और अब आप याचिका वापस लेना चाहती है। पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी सवाल किया आप महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और आप गुजरात से संबंधित मामले को लेकर याचिका दायर की है और वह भी सीधे सुप्रीम कोर्ट में।

पीठ ने पूछा कि आखिर आप हाईकोर्ट क्यो नहीं गए? पीठ ने कहा कि हर दिन इस तरह की दो-तीन मामले सामने आते हैं। यह लंबे समय से चल रहा है लेकिन अब हम चाहते हैं कि ऐसा न हो। किसी को अदालत का समय नष्ट करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी करते हुए पीठ ने शिक्षक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

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