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लवासा समिति ने सौंपी 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट, 8 खास बातें
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
Updated Mon, 01 May 2017 05:08 PM IST
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अशोक लवासा
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कुछ दिनों पहले अशोक लवासा की अगुवाई वाली समिति ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अपनी समीक्षा रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट की जांच व्यय विभाग द्वारा की जा रही है। इसके बाद इसे सचिवों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद, सातवां वेतन आयोग के तहत भत्ते की रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रिमंडल को मंजूरी के लिए भेज दी जाएगी।
ये भी पढ़ें- सातवां वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों को कल मिल सकती है बड़ी खबर
गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग को केंद्र सरकार ने पिछले साल 29 जून को ही स्वीकार कर लिया था। सरकार ने ये घोषणा की थी कि इसके तहत वेतन वृद्धि को 1 जनवरी से लागू किया जाएगा। लेकिन इस पर केंद्रीय कर्मचारियों ने अपना विरोध जताया जिसके बाद मामले की जांच के लिए जांच समिति का गठन किया गया।
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गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग को केंद्र सरकार ने पिछले साल 29 जून को ही स्वीकार कर लिया था। सरकार ने ये घोषणा की थी कि इसके तहत वेतन वृद्धि को 1 जनवरी से लागू किया जाएगा। लेकिन इस पर केंद्रीय कर्मचारियों ने अपना विरोध जताया जिसके बाद मामले की जांच के लिए जांच समिति का गठन किया गया।
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जानिए इस रिपोर्ट से जुड़ी 8 बड़ी बातें
- अशोक लवासा की अगुवाई वाली समिति ने 27 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपी। 28 अप्रैल को जारी अपने बयान में वित्त मंत्रालय ने कहा कि कुछ भत्तों जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों और विशिष्ट कर्मचारी वर्गों पर लागू हैं, उनमें संशोधन का सुझाव दिया गया है।
- वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया कि लवासा समिति द्वारा विशिष्ट कर्मचारी श्रेणियों में रेलवे, डॉक्टर, वैज्ञानिक, रक्षाकर्मी और नर्स शामिल हैं।
- नरेन्द्र मोदी सरकार ने वित्त सचिव अशोक लवासा के अगुवाई में जुलाई में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की थी।
- सातवें वेतन आयोग ने कुल 196 भत्तों में से 52 को खत्म करने और 36 अन्य भत्तों को बड़े भत्तों में शामिल करने का सुझाव दिया था।
- सातवें वेतन आयोग ने कैशियर, साइकिल, मसाले, फ्लाइंग स्क्वाड, हेयरकट, बागे, साबुन, वर्दी, सतर्कता और धोने जैसे भत्तों को बंद करने या विलय करने की सिफारिश की थी।
- शुरुआत में भत्तों पर समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार महीने का समय दिया गया था, लेकिन ये समय सीमा बाद में 22 फरवरी, 2017 तक बढ़ा दी गई थी।
- अशोक लवासा की अगुवाई वाली समिति ने वित्त मंत्री को रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले कई मंत्रालयों के साथ-साथ कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की थी।
- सरकारी कर्मचारियों से संबंधित मामलों में सातवें वेतन आयोग ने शहरों के आधार पर घर के किराए पर भत्ते को 2 से 6 फीसदी कम करने का सुझाव दिया था। कर्मचारी प्रतिनिधि इस भत्ते पर बकाए की मांग कर रहे हैं।
- वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया कि लवासा समिति द्वारा विशिष्ट कर्मचारी श्रेणियों में रेलवे, डॉक्टर, वैज्ञानिक, रक्षाकर्मी और नर्स शामिल हैं।
- नरेन्द्र मोदी सरकार ने वित्त सचिव अशोक लवासा के अगुवाई में जुलाई में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की थी।
- सातवें वेतन आयोग ने कुल 196 भत्तों में से 52 को खत्म करने और 36 अन्य भत्तों को बड़े भत्तों में शामिल करने का सुझाव दिया था।
- सातवें वेतन आयोग ने कैशियर, साइकिल, मसाले, फ्लाइंग स्क्वाड, हेयरकट, बागे, साबुन, वर्दी, सतर्कता और धोने जैसे भत्तों को बंद करने या विलय करने की सिफारिश की थी।
- शुरुआत में भत्तों पर समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार महीने का समय दिया गया था, लेकिन ये समय सीमा बाद में 22 फरवरी, 2017 तक बढ़ा दी गई थी।
- अशोक लवासा की अगुवाई वाली समिति ने वित्त मंत्री को रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले कई मंत्रालयों के साथ-साथ कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की थी।
- सरकारी कर्मचारियों से संबंधित मामलों में सातवें वेतन आयोग ने शहरों के आधार पर घर के किराए पर भत्ते को 2 से 6 फीसदी कम करने का सुझाव दिया था। कर्मचारी प्रतिनिधि इस भत्ते पर बकाए की मांग कर रहे हैं।