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वृद्धावस्था पेंशन की योजना ठीक, लेकिन लागू करने का सिस्टम जरूरी : सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Oct 2018 03:52 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (एनसेप) पहली नजर में बहुत अच्छा सिस्टम लग रहा है। इस प्रोग्राम के जरिए ही बुजुर्गों की पेंशन और अन्य मामलों का निपटारा किया जाता है। लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया में बहुत बड़े-बड़े छेद हैं, जिन्हें भरा जाना आवश्यक है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार के पास इस योजना को लागू करने के लिए एक सिस्टम होना चाहिए, जिससे जाना जा सके कि कौन सा अधिकारी अपना काम सही तरीके से कर रहा है।
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पीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के अंदर एनसेप के तहत काम की निगरानी व मूल्यांकन करने वाली समितियों के गठन का संविधान पेश करने के आदेश दिए हैं। पीठ पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ अधिवक्त अश्विनी कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अपनी याचिका में कुमार ने सरकार की तरफ से बुजुर्गों को महज 200 रुपया महीना पेंशन दिए जाने को बेहद कम बताया था और देश में उचित संख्या में वृद्धाश्रम स्थापित कराने के आदेश केंद्र व राज्य सरकारों को देने की मांग की थी।
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मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से उपस्थित एडिशन सालिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने एनसेप का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय बुजुर्ग पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना और अन्नपूर्णा योजना को एकसाथ मिलाकर एनसेप को बनाया गया है। एनसेप के लिए 2018-19 में करीब 9975 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिससे पुरानी योजना के तहत पंजीकृत 3 करोड़ बुजुर्गों को पेंशन दी जा रही है। पीठ के एक सवाल पर एएसजी ने बताया कि एनसेप की जिम्मेदारी एक राष्ट्रीय सामाजिक सलाहकार समिति संभाल रही है।
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3 नहीं 10 करोड़ हो चुके हैं बुजुर्ग
एएसजी के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए अश्विनी कुमार ने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़कर 10.38 करोड़ हो चुकी है। उन्होंने 2050 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या करीब 300 फीसदी तक बढ़ने की संभावना जताते हुए कहा कि महज 7 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ही बुजुर्गों को 2000 रुपये महीना पेंशन दे रहे हैं। उन्होंने बुजुर्गों के लिए 3000 रुपया महीना पेंशन दिए जाने की मांग की। उन्होंने 10 करोड़ बुजुर्गों को महज 200 रुपये महीना की पेंशन पर गुजारा करने के लिए छोड़ने को मजाक बताया।