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ऐतिहासिक: 16 महीने के जन्मेश ने दो लोगों को दिया नया जीवन; भुवनेश्वर AIIMS में रचा गया प्रत्यारोपण का इतिहास

Tue, 04 Mar 2025 11:01 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 04 Mar 2025 11:01 AM IST
सार

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 16 महीने के मास्टर जन्मेश लेंका ने अंग दान से दो मरीजों को नई जिंदगी दी है। बता दें कि, यह मामला ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके साथ ही जन्मेश ओडिशा में सबसे कम उम्र के अंगदाता बन गए हैं।

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Odisha: 16-month-old gives new life to two patients through organ donation, AIIMS Bhubaneswar, News in hindi
जन्मेश लेंका, सबसे कम उम्र का अंग दानदाता - फोटो : X / @AIIMSBhubaneswr

विस्तार

ओडिशा के भुवनेश्वर एम्स में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है, जहां 16 महीने के मास्टर जन्मेश लेंका ने अंग दान के माध्यम से दो मरीजों को नई जिंदगी दी। यह एक प्रेरणादायक और भावनात्मक घटना है, जब जन्मेश के माता-पिता ने अपने बच्चे की मौत के बावजूद अंग दान का साहसिक निर्णय लिया और दूसरों के लिए आशा की किरण बन गए।
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एक मार्च को ब्रेन डेड घोषित किया गया था जन्मेश
मास्टर जन्मेश लेंका 12 फरवरी को डॉ. कृष्ण मोहन गुल्ला की देखरेख में एम्स भुवनेश्वर के बाल रोग विभाग में भर्ती किया गया था। उसे फ़ॉरेन बॉडी एस्पिरेशन के कारण सांस में समस्या हो गई थी। तत्काल सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और आईसीयू टीम की निरंतर कोशिशों के बावजूद, जन्मेश को 1 मार्च को ब्रेन डेड घोषित किया गया।

बच्चे को लिवर और किशोर को मिली किडनी
इसके बाद, एम्स भुवनेश्वर की मेडिकल टीम ने उनके माता-पिता से अंग दान पर चर्चा की। अत्यधिक दुख के बावजूद, माता-पिता ने अंग दान के लिए सहमति दी, जिससे उनके बच्चे के अंगों से दूसरों की जिंदगी बचाई जा सकी। लिवर को सफलतापूर्वक एकजुट कर डॉ. ब्रह्मदत्त पटनायक की अगुवाई में गैस्ट्रो सर्जरी टीम ने दिल्ली के इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) भेजा, जहां उसे एक बच्चे में प्रत्यारोपित किया गया। इसके अलावा, मास्टर जन्मेश के दोनों किडनी एम्स भुवनेश्वर में एक किशोर मरीज में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए गए। इस प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. प्रसांत नायक ने किया।

माता-पिता ने पेश की मानवता और सहनशीलता की मिसाल
एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. आशुतोष बिस्वास ने अंग दान और प्रत्यारोपण प्रक्रिया में शामिल सभी चिकित्सकों और समन्वयकों की सराहना की। मास्टर जन्मेश का यह बलिदान और उनके माता-पिता का साहसिक निर्णय अंग दान के महत्व को रेखांकित करता है, खासकर बच्चों के मामलों में। इस फैसले से जन्मेश के माता-पिता की मानवता और सहनशीलता का उदाहरण मिलता है, जो दूसरों की मदद के लिए अपनी निजी त्रासदी को पार करते हैं। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि मास्टर जन्मेश के पिता एम्स भुवनेश्वर में एक छात्रावास वार्डन के रूप में काम करते हैं।
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