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जापान के साथ असैन्य परमाणू करार कर एनएसजी की राह में एक कदम और आगे बढ़ा भारत

Sat, 12 Nov 2016 04:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 12 Nov 2016 04:54 PM IST
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Nuclear deal with Japan gives India a boost fighting for NSG membership

जापान के साथ भारत का असैन्य परमाणु करार एक ऐतिहासिक कदम है। शुक्रवार को पीएम मोदी और जापान के पीएम शिंजो अबे ने करार पर दस्तखत किए। जानकारों की मानें तो इस करार के साथ ही भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनने की कोशिशों में एक कदम और आगे बढ़ गया है। जापान के साथ किए गए असैन्य परमाणू करार से दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा संबंधों में मजबूती आएगी। साथ ही अमेरिकी कंपनियों को भारत में परमाणु संयंत्र स्थापित करने में भी आसानी होगी।

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पिछले साल दिसंबर में जापानी पीएम अबे की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी थी। लेकिन कुछ मुद्दों को अंतिम रूप नहीं दिए जाने की वजह से अब तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो पाया था। समझौते के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट कर कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिंजो अबे ने स्वच्छ और हरित विश्व के लिए असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इसके साथ ही भारत परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाला पहला देश बन गया है जिसने जापान के साथ ऐसा समझौता किया है। 
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इस समझौते के तहत अब जापान भारत को परमाणु तकनीक निर्यात कर सकेगा। साथ ही दोनों देशों की द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा रिश्तों में मजबूती आएगी और यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दोनों देश मिलकर दबंग चीन से मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं। 

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परमाणु ऊर्जा बाजार में जापान का अच्छा दखल

Nuclear deal with Japan gives India a boost fighting for NSG membership

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एटम बम विस्फोट का दंश झेल चुके जापान में भारत के साथ परमाणु समझौते को लेकर राजनीतिक विरोध का माहौल था। खासतौर पर वर्ष 2011 में फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हादसे के बाद यह विरोध काफी बढ़ गया।

परमाणु ऊर्जा बाजार में जापान का अच्छा खासा दखल है। ऐसे में जापान के साथ परमाणु समझौते से न्यूक्लियर प्लांट का निर्माण करने वाली अमेरिकी कंपनियों वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कारपोरेशन और जीई एनर्जी इंक के लिए भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना आसान हो जाएगा, क्योंकि दोनों कंपनियों में जापान ने निवेश किया है। इससे पहले भारत अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, फ्रांस, नामीबिया, अर्जेंटीना, कनाडा, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ असैन्य परमाणु समझौता कर चुका है।

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